
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने रासायनिक घटकों से पहली बार निर्मित की कृत्रिम कोशिका, पोषण और विभाजन में सक्षम
मिनेसोटा विश्वविद्यालय की टीम ने 'स्पडसेल' नामक ऐसी संरचना तैयार की है जो निर्जीव अणुओं से मिलकर भी सजीव कोशिकाओं जैसा जीवन-चक्र पूरा करती है, हालांकि यह अभी पूर्णतः स्वतंत्र जीव नहीं है।
संश्लेषित जीव विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रयोग के तहत अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पहली बार पूरी तरह रासायनिक घटकों से एक कृत्रिम कोशिका का निर्माण किया है जो पोषक तत्व ग्रहण कर सकती है, वृद्धि कर सकती है और स्वयं का विभाजन कर नई पीढ़ी उत्पन्न कर सकती है। मिनेसोटा विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर केट अडामाला के नेतृत्व में विकसित इस संरचना को 'स्पडसेल' नाम दिया गया है। यह प्रोटोटाइप अभी प्री-प्रिंट अवस्था में है और किसी सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका में प्रकाशित नहीं हुआ है, फिर भी इसने यह प्रदर्शित किया है कि जीवन के मूलभूत कार्यों के लिए किसी रहस्यमय जैविक चिंगारी की आवश्यकता नहीं होती।
स्पडसेल को लगभग 150 से 200 अणुओं से जोड़कर बनाया गया है, जिसमें ई. कोलाई बैक्टीरिया और विषाणु से लिए गए चुनिंदा जीन शामिल हैं। इसका जीनोम मात्र 90,000 क्षार युग्मों का है, जो सात डीएनए प्लास्मिडों में बंटा है। प्राकृतिक कोशिकाओं के विपरीत, इसमें साइटोस्केलेटन नहीं होता; विभाजन के लिए यह झिल्ली की सतह पर प्रोटीन का जमाव करती है, जिससे यांत्रिक दबाव बनता है और कोशिका दो भागों में टूट जाती है। सबसे बड़ी सीमा यह है कि यह अपने राइबोसोम स्वयं नहीं बना सकती, इसलिए प्रोटीन निर्माण के लिए इसे बाहर से तैयार राइबोसोम दिए जाते हैं। इसी कारण हर वंश-क्रम पांच से दस पीढ़ियों के बाद समाप्त हो जाता है।
उत्तरी अमेरिकी शोध दल ने स्पडसेल में एक आनुवंशिक परिवर्तन कर यह भी दिखाया कि लाभकारी उत्परिवर्तन वाली कोशिकाएं तेज़ी से बढ़ीं और अधिक संतति उत्पन्न कीं, जो चयन और प्रतिस्पर्धा का एक सरल रूप है। ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज लंदन के विशेषज्ञ युवल एलानी, जो इस अध्ययन से जुड़े नहीं थे, ने इसे रसायन विज्ञान को जीवन जैसी अवस्था तक ले जाने की दिशा में एक वास्तविक सफलता बताया। उनका मानना है कि शून्य से कोशिका निर्माण करने से प्राकृतिक जीव विज्ञान की सीमाओं से मुक्त होकर ऐसी प्रणालियां डिज़ाइन की जा सकती हैं जो सामान्य कोशिकाएं नहीं कर पातीं।
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि स्पडसेल को अभी 'जीवित' नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह अत्यंत सरल है और पोषण व राइबोसोम के लिए पूरी तरह बाहरी आपूर्ति पर निर्भर है। फिर भी, यह कैंसर उपचार, कार्बन संग्रहण या औद्योगिक रसायन निर्माण जैसी जटिल समस्याओं के लिए प्रोग्रामेबल जैविक मशीनों की नींव मानी जा रही है। टीम ने 'बायोटिक' नामक एक खुला अनुसंधान मंच स्थापित किया है ताकि अन्य प्रयोगशालाएं इस कार्य को आगे बढ़ा सकें। अगला वैज्ञानिक पड़ाव सहकर्मी-समीक्षा के लिए पांडुलिपि का प्रस्तुतीकरण और राइबोसोम के आंतरिक निर्माण की क्षमता विकसित करना होगा, जिससे यह कृत्रिम कोशिका अधिक पीढ़ियों तक स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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A landmark breakthrough in synthetic biology has yielded the world’s first fully synthetic cell capable of eating, growing, and dividing. Built from scratch using non-living chemical parts, SpudCell heralds a new era of designer organisms that could revolutionise medicine and industry.
A cautious step toward artificial life: researchers have built a synthetic cell that mimics key functions but is not truly alive. SpudCell feeds, grows, and divides, yet scientists warn it remains a biochemical construct, not a living organism, tempering expectations about immediate applications.
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