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भू-राजनीति और राजनीतिगुरुवार, 2 जुलाई 2026

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी मार्च: 900 से अधिक गिरफ्तार, अफ्रीकी देशों ने बुलाए नागरिक वापस

30 जून की समय-सीमा के बाद भड़की हिंसा के बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की, जबकि नाइजीरिया और घाना समेत कई देशों ने कूटनीतिक दबाव बढ़ाया है।

दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख शहरों में 30 जून, 2026 को हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों को देश छोड़ने की मांग की। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस के अनुसार, देशभर में 120 से अधिक मार्च हुए, जिनमें से 108 शांतिपूर्ण रहे जबकि 12 में पुलिस हस्तक्षेप की ज़रूरत पड़ी। उप राष्ट्रीय पुलिस आयुक्त तेबेलो मोसिकिली ने बताया कि आव्रजन उल्लंघन, सार्वजनिक हिंसा और लूटपाट समेत विभिन्न आरोपों में 900 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया। जोहान्सबर्ग के एलेक्जेंड्रा टाउनशिप में विदेशी नागरिकों की दुकानों में लूट के दौरान एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि हिलब्रो में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वाले तीन संदिग्धों को गिरफ़्तार कर लिया गया।

विभिन्न अफ्रीकी देशों की सरकारों ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नाइजीरिया के राष्ट्रपति के विदेश मामलों के वरिष्ठ विशेष सहायक अदेमोला ओशोदी ने एक बयान में कहा कि अफ्रीकी एकता तब तक अर्थहीन है जब तक अफ्रीकी नागरिक महाद्वीप में ही असुरक्षित हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी सरकार से हर हमले की जांच, नाइजीरियाई समुदायों की सुरक्षा, और निगरानी समूहों पर लगाम लगाने की मांग की। घाना और नाइजीरिया ने अप्रैल-मई में ही दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्तों को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया था। मलावी, ज़िम्बाब्वे और घाना समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को वापस बुलाने का अभियान चलाया—मलावी से 15,000 से अधिक और घाना से 1,000 से अधिक लोग स्वदेश लौट चुके हैं।

प्रदर्शनकारी गुटों की स्थिति स्पष्ट है। 'मार्च एंड मार्च' आंदोलन की नेता जैसिंटा न्गोबेसे-ज़ूमा ने घोषणा की कि वे अगले छह महीनों तक हर गुरुवार प्रदर्शन करेंगे ताकि सरकार बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों को बाहर निकालने पर मजबूर हो। 'ऑपरेशन डुडुला' से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने बीबीसी को बताया कि वे पुलिस पर दबाव डालेंगे कि अवैध रूप से रह रहे विदेशियों को गिरफ़्तार किया जाए। इन समूहों का आरोप है कि प्रवासी स्थानीय लोगों के रोज़गार और संसाधन छीन रहे हैं।

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने मार्च से एक दिन पहले कुछ प्रदर्शनकारी नेताओं से मुलाकात कर तनाव कम करने का प्रयास किया। उन्होंने एक टेलीविज़न संबोधन में कहा कि अवैध प्रवास को लेकर लोगों की चिंताएं वैध हैं, लेकिन केवल अधिकृत सरकारी अधिकारी ही कानून के उल्लंघन पर कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि, पर्यवेक्षकों का मानना है कि सरकार की अपनी बयानबाजी भी हिंसा को बढ़ावा दे रही है। अफ्रीकन सेंटर फॉर माइग्रेशन एंड सोसाइटी के ज़ेनोवॉच ट्रैकर के अनुसार, इस वर्ष अब तक दो लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 2008 के दंगों में 60 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

यह मामला अब क्षेत्रीय कूटनीति के केंद्र में है। नाइजीरिया ने दक्षिण अफ्रीका के साथ पूर्व-चेतावनी तंत्र को बिना देरी सक्रिय करने की मांग की है। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस ने पांच प्रांतों में अतिरिक्त बल तैनात किए हैं और सेना को जोहान्सबर्ग के कुछ इलाकों में आकस्मिकता के आधार पर भेजा गया है। प्रदर्शनकारी हर गुरुवार को सड़कों पर उतरने की योजना बना रहे हैं, जबकि विभिन्न अफ्रीकी देशों से नागरिकों की वापसी का सिलसिला जारी है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेसअटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस/ अंग्रेज़ीभाषी
आक्रोशचेतावनीपीड़ितभाव

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी मार्चों ने मानवीय संकट पैदा कर दिया है, जिससे हजारों लोग मलावी और अन्य अफ्रीकी देशों में वापस भागने को मजबूर हुए हैं। 900 से अधिक गिरफ्तारियों के बावजूद, हिंसा ने पहले ही जानें ले ली हैं और विदेशी समुदायों में दहशत फैला दी है। अफ्रीकी सरकारें अपने नागरिकों की सुरक्षा की मांग कर रही हैं और विदेशी-विरोधी हमलों की निंदा कर रही हैं।

अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस/ सुरक्षा
व्यावहारिकताउदासीनता

दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों ने अवैध प्रवास के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान 900 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। 120 मार्चों में से अधिकांश शांतिपूर्ण रहे, लेकिन पुलिस ने उन दर्जन भर में हस्तक्षेप किया जो हिंसक हो गए, जिनमें लूटपाट और एक मौत की सूचना है। सरकार आव्रजन कानूनों के प्रवर्तन और विदेशी-विरोधी हमलों को रोकने की आवश्यकता के बीच संतुलन बना रही है।

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दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी मार्च: 900 से अधिक गिरफ्तार, अफ्रीकी देशों ने बुलाए नागरिक वापस

30 जून की समय-सीमा के बाद भड़की हिंसा के बीच पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की, जबकि नाइजीरिया और घाना समेत कई देशों ने कूटनीतिक दबाव बढ़ाया है।

दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख शहरों में 30 जून, 2026 को हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों को देश छोड़ने की मांग की। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस के अनुसार, देशभर में 120 से अधिक मार्च हुए, जिनमें से 108 शांतिपूर्ण रहे जबकि 12 में पुलिस हस्तक्षेप की ज़रूरत पड़ी। उप राष्ट्रीय पुलिस आयुक्त तेबेलो मोसिकिली ने बताया कि आव्रजन उल्लंघन, सार्वजनिक हिंसा और लूटपाट समेत विभिन्न आरोपों में 900 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया। जोहान्सबर्ग के एलेक्जेंड्रा टाउनशिप में विदेशी नागरिकों की दुकानों में लूट के दौरान एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि हिलब्रो में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वाले तीन संदिग्धों को गिरफ़्तार कर लिया गया।

विभिन्न अफ्रीकी देशों की सरकारों ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नाइजीरिया के राष्ट्रपति के विदेश मामलों के वरिष्ठ विशेष सहायक अदेमोला ओशोदी ने एक बयान में कहा कि अफ्रीकी एकता तब तक अर्थहीन है जब तक अफ्रीकी नागरिक महाद्वीप में ही असुरक्षित हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीकी सरकार से हर हमले की जांच, नाइजीरियाई समुदायों की सुरक्षा, और निगरानी समूहों पर लगाम लगाने की मांग की। घाना और नाइजीरिया ने अप्रैल-मई में ही दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्तों को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया था। मलावी, ज़िम्बाब्वे और घाना समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को वापस बुलाने का अभियान चलाया—मलावी से 15,000 से अधिक और घाना से 1,000 से अधिक लोग स्वदेश लौट चुके हैं।

प्रदर्शनकारी गुटों की स्थिति स्पष्ट है। 'मार्च एंड मार्च' आंदोलन की नेता जैसिंटा न्गोबेसे-ज़ूमा ने घोषणा की कि वे अगले छह महीनों तक हर गुरुवार प्रदर्शन करेंगे ताकि सरकार बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों को बाहर निकालने पर मजबूर हो। 'ऑपरेशन डुडुला' से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने बीबीसी को बताया कि वे पुलिस पर दबाव डालेंगे कि अवैध रूप से रह रहे विदेशियों को गिरफ़्तार किया जाए। इन समूहों का आरोप है कि प्रवासी स्थानीय लोगों के रोज़गार और संसाधन छीन रहे हैं।

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने मार्च से एक दिन पहले कुछ प्रदर्शनकारी नेताओं से मुलाकात कर तनाव कम करने का प्रयास किया। उन्होंने एक टेलीविज़न संबोधन में कहा कि अवैध प्रवास को लेकर लोगों की चिंताएं वैध हैं, लेकिन केवल अधिकृत सरकारी अधिकारी ही कानून के उल्लंघन पर कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि, पर्यवेक्षकों का मानना है कि सरकार की अपनी बयानबाजी भी हिंसा को बढ़ावा दे रही है। अफ्रीकन सेंटर फॉर माइग्रेशन एंड सोसाइटी के ज़ेनोवॉच ट्रैकर के अनुसार, इस वर्ष अब तक दो लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 2008 के दंगों में 60 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

यह मामला अब क्षेत्रीय कूटनीति के केंद्र में है। नाइजीरिया ने दक्षिण अफ्रीका के साथ पूर्व-चेतावनी तंत्र को बिना देरी सक्रिय करने की मांग की है। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस ने पांच प्रांतों में अतिरिक्त बल तैनात किए हैं और सेना को जोहान्सबर्ग के कुछ इलाकों में आकस्मिकता के आधार पर भेजा गया है। प्रदर्शनकारी हर गुरुवार को सड़कों पर उतरने की योजना बना रहे हैं, जबकि विभिन्न अफ्रीकी देशों से नागरिकों की वापसी का सिलसिला जारी है।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 3 स्रोत · 2 भाषाएँ

0%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

निंदक100%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेसअटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस/ अंग्रेज़ीभाषी
आक्रोशचेतावनीपीड़ितभाव

दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी विरोधी मार्चों ने मानवीय संकट पैदा कर दिया है, जिससे हजारों लोग मलावी और अन्य अफ्रीकी देशों में वापस भागने को मजबूर हुए हैं। 900 से अधिक गिरफ्तारियों के बावजूद, हिंसा ने पहले ही जानें ले ली हैं और विदेशी समुदायों में दहशत फैला दी है। अफ्रीकी सरकारें अपने नागरिकों की सुरक्षा की मांग कर रही हैं और विदेशी-विरोधी हमलों की निंदा कर रही हैं।

अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस/ सुरक्षा
व्यावहारिकताउदासीनता

दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों ने अवैध प्रवास के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान 900 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। 120 मार्चों में से अधिकांश शांतिपूर्ण रहे, लेकिन पुलिस ने उन दर्जन भर में हस्तक्षेप किया जो हिंसक हो गए, जिनमें लूटपाट और एक मौत की सूचना है। सरकार आव्रजन कानूनों के प्रवर्तन और विदेशी-विरोधी हमलों को रोकने की आवश्यकता के बीच संतुलन बना रही है।

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