
सेनेगल के विश्व कप से बाहर होने के बाद गुएये ने कोच के खिलाफ मोर्चा खोला, राष्ट्रीय टीम से ब्रेक की घोषणा
मिडफील्डर पापे गुएये ने बेल्जियम से 3-2 की हार के बाद कहा कि जब तक मौजूदा कोचिंग स्टाफ रहेगा, वह राष्ट्रीय टीम से दूर रहेंगे।
सेनेगल के 2026 विश्व कप अभियान का अंत एक नाटकीय हार और उसके तुरंत बाद स्टार मिडफील्डर पापे गुएये के विद्रोही बयान के साथ हुआ। बेल्जियम के खिलाफ अंतिम-16 मुकाबले में 2-0 की बढ़त गंवाने और अतिरिक्त समय में 3-2 से पराजय के कुछ ही घंटों बाद, गुएये ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि जब तक मुख्य कोच पापे थियाव और उनका तकनीकी स्टाफ पद पर बना रहेगा, वह राष्ट्रीय टीम से विराम लेंगे। यह कदम अफ्रीकी फुटबॉल में एक दुर्लभ सार्वजनिक टकराव को उजागर करता है।
मैच का रुख शुरू में पूरी तरह सेनेगल के पक्ष में था। हबीब डियारा और इस्माइला सर्र के पहले हाफ के गोलों ने टीम को क्वार्टर फाइनल की ओर अग्रसर कर दिया था। 66वें मिनट में कोच थियाव ने गुएये को बाहर कर लैमिने कामारा को उतारा, जिसे बढ़त बचाने की रणनीति के रूप में देखा गया। हालांकि, इसके बाद खेल पलट गया। अंतिम चार मिनटों में रोमेलु लुकाकू और यूरी टिलेमान्स ने गोल कर बेल्जियम को बराबरी दिलाई, और फिर अतिरिक्त समय में वीएआर समीक्षा के बाद कामारा के फाउल पर मिले पेनल्टी को टिलेमान्स ने गोल में बदलकर सेनेगल को बाहर कर दिया।
हार के बाद कोच थियाव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदलावों का बचाव करते हुए कहा कि खिलाड़ी थकान के कारण स्वयं बदले जाने की मांग कर रहे थे और उन्हें मैदान पर रखना गैर-पेशेवर होता। इसके विपरीत, गुएये ने मिश्रित क्षेत्र में स्पष्ट कहा कि वह शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट थे और कोच का निर्णय ही एकमात्र कारण था। अफ्रीकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रशंसकों ने थियाव को हटाने की मांग करते हुए एक ऑनलाइन याचिका पर 30,000 से अधिक हस्ताक्षर एकत्र कर लिए हैं, जबकि सेनेगल फुटबॉल महासंघ ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
यह विवाद थियाव के कार्यकाल में पहले से मौजूद तनाव को और गहराता है। 2024 में पदभार संभालने के बाद उन्होंने टीम को अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के फाइनल तक पहुंचाया था, लेकिन बाद में एक विरोध के चलते वह खिताब मोरक्को को सौंप दिया गया। गुएये, जिन्होंने ग्रुप चरण में इराक के खिलाफ दो गोल किए थे, के इस कदम से सेनेगल के आगामी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों—2030 विश्व कप क्वालीफायर और अगले अफ्रीका कप—के लिए अनिश्चितता पैदा हो गई है।
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.10 | neutral |
The player is right to protest an unjust system. The federation and the coach are responsible for the team's disintegration.
The narrative turns an individual dispute into a metaphor for national misrule, making the footballer a symbol of resistance against arbitrary authority.
Both sides have their reasons; the solution will be internal. The boycott is a personal choice that should not destabilize the national team.
By presenting the positions of player and coach as equally legitimate, tension is reduced and conflict is normalized as part of the game.
This incident shows the chronic instability of African federations. Senegal is no exception.
The episode is framed within a broader pattern of systemic dysfunction, downplaying local specifics and reinforcing a stereotype of chaos.
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