
एकोन की बारिश में लैटिन प्रार्थनाएँ और एक नया धार्मिक विभाजन
स्विट्ज़रलैंड के एक मैदान में पारंपरिक कैथोलिक समूह ने पोप की चेतावनी को दरकिनार कर चार नए बिशपों का अभिषेक किया, जिससे स्वतः बहिष्कार और सदी का पहला बड़ा कलीसियाई विभाजन सामने आया।
बुधवार सुबह स्विट्ज़रलैंड के एकोन गाँव में आल्प्स की तलहटी में बारिश की फुहारों के बीच एक विशाल तंबू के नीचे हज़ारों लोग जमा हुए। चार घंटे तक चले इस अनुष्ठान में लैटिन भजन गूँजते रहे, धूप की सुगंध हवा में घुली रही और पुरोहितों की एक लंबी क़तार वेदी की ओर बढ़ती रही। यह कोई सामान्य प्रार्थना सभा नहीं थी—यह फ्रातेरनितास सासेरदोतालिस सांक्ती पीआई दस (एफ़एसएसपीएक्स) का वह क्षण था जिसकी तैयारी महीनों से चल रही थी और जिसे रोकने के लिए वैटिकन ने अंतिम क्षण तक हर संभव प्रयास किया।
समारोह के केंद्र में चार पुरोहित थे—स्विस पास्काल श्राइबर, अमेरिकी माइकल गोल्डेड, और फ़्रांसीसी मिशेल प्वाइंसिने द सिव्री और मार्क आनापिए—जिन पर बिशप अल्फ़ोंसो द गालारेता और बर्नार्ड फ़ेले ने हाथ रखकर उन्हें बिशप पद पर अभिषिक्त किया। यह कृत्य पोप लियो चौदहवें की स्पष्ट मनाही के बावजूद किया गया, जिन्होंने एक दिन पहले ही एक खुले पत्र में लिखा था: “मैं आपसे पूरे दिल से विनती करता हूँ—कृपया वापस लौट आइए!” पोप ने इसे “अत्यधिक गंभीरता का पाप” और “मसीह के निर्दोष वस्त्र को फाड़ने” जैसा बताया था। लेकिन एफ़एसएसपीएक्स के महाध्यक्ष दावीदे पाल्यारानी ने अपने प्रवचन में स्पष्ट किया: “हम कलीसिया की सेवा करना चाहते हैं, एक ऐसी माँ की तरह जो कठिनाई में है, जो पीड़ित है, जिसे कभी-कभी धोखा दिया गया है।”
यह समूह 1970 में फ़्रांसीसी आर्चबिशप मार्सेल लेफ़ेब्व्र द्वारा स्थापित किया गया था, जिन्होंने द्वितीय वैटिकन परिषद (1962-65) के आधुनिकीकरण सुधारों—विशेषकर धार्मिक स्वतंत्रता, ईसाई एकता और लैटिन के बजाय स्थानीय भाषा में मिस्सा—का कड़ा विरोध किया था। 1988 में ठीक इसी स्थान पर लेफ़ेब्व्र ने बिना पोपीय अनुमति के चार बिशप अभिषिक्त किए थे, जिसके बाद तत्कालीन पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें और नए बिशपों को बहिष्कृत कर दिया था। बाद में 2009 में पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने उस बहिष्कार को वापस लेकर सुलह का प्रयास किया, लेकिन धार्मिक मतभेद कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए। आज एफ़एसएसपीएक्स दुनिया भर में लगभग 600,000 अनुयायियों, 700 से अधिक पुरोहितों और 260 सेमिनरी छात्रों का दावा करता है, और यह 75 से अधिक देशों में सक्रिय है।
इस आयोजन ने वैश्विक दर्शकों को भी अपनी ओर खींचा। समारोह का यूट्यूब पर सीधा प्रसारण किया गया, जिसमें कई भाषाओं में एक साथ अनुवाद की सुविधा थी। प्रसारण के दौरान स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड उभरा, जिससे दूर बैठे श्रद्धालु दान भेज सकते थे। इटली से कुछ दक्षिणपंथी राजनीतिक प्रतिनिधि भी वहाँ मौजूद थे, जिन्होंने इसे “परंपरा का ध्वज कभी न झुकाने” का प्रतीक बताया। वहीं वैटिकन के पूर्व सिद्धांत प्रमुख कार्डिनल गेरहार्ड म्यूलर ने एक साक्षात्कार में टिप्पणी की कि यह समूह “प्रोटेस्टेंटों से भी अधिक प्रोटेस्टेंट” जैसा व्यवहार कर रहा है, क्योंकि यह पोप को तभी स्वीकार करेगा जब पोप उनकी परंपरा की परिभाषा को मान लें।
समारोह के अंत में एक छोटी-सी लेकिन बताने लायक बात ने ध्यान खींचा: चारों नवनियुक्त बिशपों ने वही परिधान पहने थे जो 1988 में पहले विभाजन के समय इस्तेमाल किए गए थे। बारिश थम चुकी थी, और आल्प्स की पहाड़ियों पर बादल छँटने लगे थे। तंबू के बाहर एक स्टॉल पर “एकोन2026” लिखी टोपियाँ और स्मारिका स्वरूप शराब की बोतलें बिक रही थीं—हर बोतल पर बिशप की अँगूठी, क्रॉस या मुकुट जैसा कोई चिह्न अंकित था।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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सेंट पायस एक्स की पुरोहिताई बिरादरी ने पोप लियो XIV की अपील को अनदेखा करते हुए बिना पोप के आदेश के चार बिशपों का अभिषेक करके फूट को अंजाम दिया। लाइव प्रसारित इस कृत्य से 1988 की टूट याद आती है और स्वतः बहिष्कार लागू होता है। एकोन में बारिश में हुए इस समारोह ने मसीह के निर्बाध वस्त्र में एक नई दरार डाल दी।
एक अलग हुए परंपरावादी समूह ने पोप लियो XIV की सहमति के बिना चार बिशपों का अभिषेक करके उन्हें चुनौती दी, जिससे फूट का जोखिम पैदा हो गया। स्विट्जरलैंड में यह समारोह लियो के पोपकाल का पहला बड़ा संकट है, जिन्होंने एकता को प्राथमिकता दी है। इस कृत्य से स्वतः बहिष्कार होता है, लेकिन सेंट पायस एक्स की बिरादरी ने चेतावनियों के बावजूद इसे अंजाम दिया।
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