
जर्मनी के विश्व कप से बाहर होने पर चांसलर मेर्ज़ का बयान राजनीतिक तूफ़ान बना
पहला ट्वीट बिना मंजूरी के पोस्ट होने की बात सामने आई, जिसके बाद मीडिया और विपक्ष ने चांसलर की वास्तविकता-बोध पर सवाल उठाए।
जर्मनी की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के 2026 विश्व कप के पहले नॉकआउट दौर में पैराग्वे से पेनल्टी पर हारकर बाहर होने के बाद चांसलर फ्रीडरिख मेर्ज़ के दो सोशल मीडिया पोस्ट ने खेल को राजनीतिक विवाद में बदल दिया। मैच के तुरंत बाद मेर्ज़ के आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक संदेश गया जिसमें टीम की तारीफ़ करते हुए कहा गया कि उसने देश को ‘उत्साहित’ किया और ‘हमें आप पर गर्व है।’ बाद में जर्मन अख़बार सूडडॉयचे ज़ाइटुंग ने चांसलर के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया कि यह पोस्ट गलती से, बिना उनकी मंज़ूरी या जानकारी के प्रकाशित हो गया था। इसके कुछ घंटों बाद एक दूसरा पोस्ट आया, जिसमें हार में एकजुटता और समर्थन की बात कही गई—जिसे मेर्ज़ की वास्तविक राय बताया गया।
जर्मन मीडिया ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सबसे अधिक बिकने वाले टैबलॉइड बिल्ड ने एक राय स्तंभ में लिखा कि मेर्ज़ और कोच यूलियन नागल्समान ‘एक समानांतर वास्तविकता’ में जी रहे हैं और हार की ज़िम्मेदारी लेने में असमर्थ हैं। बिल्ड की स्तंभकार मारियोन हॉर्न ने इस हार को जर्मनी की आर्थिक गिरावट से जोड़ते हुए देश को ‘दूसरे दर्जे’ का बताया और कहा कि टीम ने कोई जुनून नहीं दिखाया। डी वेल्ट के एक टिप्पणीकार ने लिखा कि केवल सफल जर्मनी ही रहने लायक है और चांसलर का गर्व गलत है। खेल पत्रिका किकर ने परिणाम को ‘जर्मन फुटबॉल के लिए घातक फैसला’ करार दिया। इन प्रतिक्रियाओं में एक साझा सुर यह था कि राष्ट्रीय टीम का प्रदर्शन देश की व्यापक प्रतिस्पर्धात्मकता में कथित गिरावट का प्रतीक है।
राजनीतिक हलकों से भी कड़ी आलोचना हुई। फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी की यूरोपीय संसद सदस्य मारी-आग्नेस श्ट्राक-त्सिमरमान ने व्यंग्य किया कि ‘पता नहीं क्या बुरा था: खेल या यह विश्लेषण।’ वामपंथी पार्टी के क्रिस्टियान गोएरके ने कहा कि चांसलर का वास्तविकता-बोध हकीकत से कटा हुआ है, और इसे उनके उस बयान से जोड़ा जिसमें उन्होंने जर्मनों के कम काम करने और ज़्यादा बीमार छुट्टी लेने की बात कही थी। धुर-दक्षिणपंथी एएफडी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मेर्ज़ को अपनी ही पार्टी के खराब प्रदर्शन को कम करके आंकने की आदत है। वामपंथी बीएसडब्ल्यू की सेविम दागदेलेन ने ‘चांसलर स्तर पर वास्तविकता से संपर्क खोने’ की बात कही। सत्तारूढ़ सीडीयू के एक अनाम सदस्य ने भी सवाल उठाया कि ‘कल रात का खेल ज़्यादा दर्दनाक था या चांसलर का यह आकलन।’ इन टिप्पणियों ने खेल हार को सीधे मेर्ज़ सरकार की विश्वसनीयता से जोड़ दिया।
यह विवाद जर्मन फुटबॉल के हालिया इतिहास की पृष्ठभूमि में आया है। 2014 में विश्व कप जीतने के बाद जर्मनी 2018 और 2022 में ग्रुप चरण से ही बाहर हो गया था, और अब पहले नॉकआउट में हार ने निराशा को और गहरा किया। कोच नागल्समान पर इस्तीफ़े का दबाव है, हालांकि उन्होंने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। जर्मन फुटबॉल महासंघ के समक्ष प्रदर्शन की समीक्षा का प्रश्न है। फ़िलहाल, दूसरे पोस्ट के बाद सीधी आलोचना थोड़ी मंद पड़ी है, पर यह प्रकरण दिखाता है कि किस तरह खेल की विफलता राष्ट्रीय असंतोष का प्रतीक बन सकती है। आगामी दिनों में महासंघ और सरकार दोनों स्तरों पर जवाबदेही की मांग जारी रहने की संभावना है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पराग्वे की प्रेस जीत का जश्न मनाती है और चांसलर मेर्ज़ का मज़ाक उड़ाती है, जिन्होंने जर्मन टीम की बुरी हार को एक बेसुरे पोस्ट से कम करके आंका। जर्मनी का बाहर होना फुटबॉल महाशक्ति के लिए विनम्रता का सबक बताया जा रहा है, जबकि विजयी सुर्खियाँ गुआरानी टीम के कारनामे को रेखांकित करती हैं।
जर्मन प्रेस चांसलर मेर्ज़ पर टूट पड़ी है, टीम के समर्थन वाले उनके संदेश में एक कथित गलती का खुलासा कर रही है और राजनीतिक तूफान को हवा दे रही है। इस प्रकरण को राजनीतिक वर्ग और जनभावना के बीच की दूरी का एक और सबूत माना जा रहा है, जिसमें उनकी संवादहीनता पर व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ की जा रही हैं।
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