
रूस ने अमेरिकी चुनाव में दखल के आरोपों को 'बेनाम सूचना' करार दिया, चीन ने भी ट्रंप के दावे खारिज किए
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी जिसमें रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया को अमेरिकी चुनावी प्रणाली के लिए खतरा बताया गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया को अमेरिकी चुनावी बुनियादी ढांचे के लिए मुख्य खतरा बताए जाने के एक दिन बाद मॉस्को ने इन आरोपों को “बेनाम, बिना सबूत वाली सूचना” करार दिया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि रूस ने कभी दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया और वह उम्मीद करता है कि कोई भी उसके आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा। पेस्कोव ने जोर देकर कहा कि अमेरिका में हुई संसदीय समितियों और अभियोजन पक्ष की जांचों ने इस निष्कर्ष की पुष्टि की है कि रूस का चुनावों पर कोई प्रभाव नहीं था।
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान के अनुसार, ट्रंप ने खुफिया एजेंसियों के पहले अप्रकाशित आकलनों का हवाला देते हुए कहा कि इन देशों और गैर-राज्य समूहों के पास अमेरिकी चुनावी प्रणाली को प्रभावित करने की क्षमता है। अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (ओडीएनआई) ने इससे पहले 2024 में भी रूस को चुनावों के लिए “प्रमुख खतरा” बताया था और उस पर प्रचार फैलाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पेस्कोव ने इस बात पर बल दिया कि ट्रंप जिस सूचना का उल्लेख कर रहे हैं वह अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की “बेनाम” जानकारी है, जबकि अमेरिका में हुई औपचारिक जांचों में रूसी हस्तक्षेप के दावे सिद्ध नहीं हुए।
बीजिंग ने भी ट्रंप के आरोपों को सिरे से खारिज किया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे “मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बदनामी” हैं। उन्होंने दोहराया कि चीन हमेशा दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत का पालन करता है। यह प्रतिक्रिया उस संदर्भ में आई जब ट्रंप ने चीन पर 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं के व्यक्तिगत डेटा की अवैध चोरी का भी आरोप लगाया था।
रूसी हस्तक्षेप के आरोपों का इतिहास 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत के बाद से लगातार उठता रहा है। कुछ अमेरिकी विश्लेषकों और राजनेताओं, जिनमें राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड भी शामिल हैं, का मानना है कि हस्तक्षेप के आंकड़े गढ़े गए थे और यह ट्रंप के खिलाफ अभियान का हिस्सा थे। इसी कड़ी में 2025 में अमेरिकी न्याय विभाग ने 2016 के चुनाव में रूसी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच शुरू की है, साथ ही पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी और पूर्व सीआईए प्रमुख जॉन ब्रेनन के खिलाफ प्रक्रियात्मक अनियमितताओं की भी समीक्षा हो रही है।
वर्तमान में यह प्रकरण अमेरिकी घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच एक जटिल मोड़ पर खड़ा है। एक ओर व्हाइट हाउस खुफिया रिपोर्टों के आधार पर विदेशी खतरों की चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी संस्थाएं ही पुराने आरोपों की सत्यता की पुनर्परीक्षा कर रही हैं। मॉस्को और बीजिंग ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन इस बात के कोई संकेत नहीं हैं कि वाशिंगटन जल्द ही इन आरोपों से पीछे हटने वाला है। आगामी दिनों में अमेरिकी कांग्रेस में इन खुफिया आकलनों पर और सुनवाई होने की संभावना है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | 0.00 | neutral |
The Kremlin forcefully rejects the accusations, stating that Russia has never interfered and that US investigations confirm this.
The repetition of the 'never interfered' formula and the reference to US investigations create a narrative of absolute innocence, leaving no room for doubt.
Russian outlets omit mentioning the persistent accusations from US officials and the broad bipartisan consensus in the US regarding Russian interference.
The Kremlin rejects the accusations, while Trump warns of electoral threats; the news is presented in a balanced manner.
The article juxtaposes the two opposing statements, leaving evaluation to the reader without emphasizing either.
The Kremlin categorically denies any interference, as reported by the Iranian agency.
The choice to report only the Russian statement, without context, presents Moscow's position as the only relevant one.
Iranian press omits reporting Trump's statements and the context of US accusations.
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