
एआई से बने 15,000 फर्जी समाचार स्थलों का खुलासा, विज्ञापन से करोड़ों की कमाई; पहचान प्रशिक्षण ने दिखाई राह
फ्रांसीसी जांच में सामने आया कि जनरेटिव एआई से संचालित ये साइटें गूगल डिस्कवर के एल्गोरिदम का फायदा उठाकर विज्ञापन राजस्व कमा रही हैं, जबकि ऑस्ट्रेलियाई शोध ने लोगों को डीपफेक चेहरे पहचानने में सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया है।
फ्रांस में एक खोजी पत्रकार द्वारा किए गए अध्ययन ने 15,000 से अधिक ऐसे फर्जी वेबसाइटों की पहचान की है जो पूरी तरह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार सामग्री प्रकाशित कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश साइटें दुष्प्रचार के बजाय डिजिटल विज्ञापन से मुनाफा कमाने के लिए बनाई गई हैं, और जांच में दो संचालकों का पता चला जिन्होंने केवल तीन महीनों में 20 लाख डॉलर (लगभग 16.5 करोड़ रुपये) से अधिक की कमाई की। ये आंकड़े न्यूज़गार्ड जैसी वैश्विक निगरानी संस्थाओं के पिछले अनुमानों से कहीं अधिक हैं, जिन्होंने 2023 से अब तक 16 भाषाओं में 3,749 ऐसी साइटों की सूचना दी थी।
इन फर्जी समाचार स्थलों के पीछे मुख्य रूप से एसईओ (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन) विशेषज्ञ हैं, जो गूगल डिस्कवर और गूगल न्यूज़ जैसे प्लेटफ़ॉर्मों पर उच्च रैंकिंग पाने के लिए सामग्री तैयार करते हैं। जांच के अनुसार, 75 प्रतिशत साइटें 300 से कम ऑपरेटरों द्वारा नियंत्रित हैं, जिनमें से कुछ सैकड़ों डोमेन का जाल चलाते हैं। एक मामले में, एक फर्जी लेखक के नाम से प्रतिदिन 500 तक लेख प्रकाशित किए गए, जो अक्सर एक ही खबर के विभिन्न संस्करण होते थे। यह प्रवृत्ति पारंपरिक मीडिया कंपनियों तक भी फैल गई है, जहां लागत कटौती के बाद एआई का उपयोग करके गैर-मौजूद पत्रकारों के नाम से सामग्री प्रकाशित की जा रही है।
इस बीच, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के इमोशंस एंड फेसेस लैब के शोधकर्ताओं ने एक प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किया है जिससे लोग एआई-जनित चेहरों को पहचानने में सक्षम हो सकें। अध्ययन में प्रतिभागियों को छह अवधारणात्मक गुणों—समरूपता, आनुपातिकता, आकर्षण, विशिष्टता, अभिव्यंजना और स्मरणीयता—पर ध्यान देने को कहा गया, न कि किसी एक स्पष्ट दोष की तलाश करने को। परिणामस्वरूप सभी प्रतिभागियों की पहचान क्षमता में सुधार हुआ, और उच्च प्रदर्शन करने वाले लगभग हर बार नकली चेहरे को पकड़ने में सफल रहे। यूएनएसडब्ल्यू सिडनी के आईडीए लैब के निदेशक डॉ. जेम्स डन के अनुसार, एआई-जनित चेहरे अक्सर बहुत अधिक सममित, असामान्य रूप से आकर्षक और भावनाओं में सीमित होते हैं, जिससे समग्र प्रभाव पर ध्यान देना अधिक कारगर साबित होता है।
इटली के मराटेआ में आयोजित 'लारिपार्टेंज़ा' कार्यक्रम में एआई के प्रभाव पर हुई चर्चा ने इस बहस को और गहराई दी। एजीकॉम (इतालवी संचार नियामक) की एआई समिति के सदस्य एंड्रिया इम्पीरियाली ने कहा कि सार्वजनिक विमर्श अक्सर अति-उत्साह या अति-भय के बीच झूलता है, जबकि जरूरत एक प्रणालीगत दृष्टिकोण की है जो पेशेवर, सांस्कृतिक, नैतिक और नियामक आयामों को जोड़ सके। वहीं, अर्जेंटीना के विश्लेषकों ने अर्थशास्त्री फ्रेडरिक हायेक के 'घातक अहंकार' की अवधारणा को याद करते हुए जल्दबाजी में नियमन के प्रति आगाह किया है, और कैथोलिक चर्च ने भी तकनीकी विशेषज्ञता का दावा किए बिना नैतिक विवेक पर जोर दिया है।
फ्रांसीसी जांच अभी जारी है और शोधकर्ता स्वचालित डिटेक्टरों के बजाय ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस तकनीकों पर निर्भर हैं। ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रशिक्षण को छोटा और अधिक प्रभावी बनाने पर काम कर रही है, ताकि इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा सके। इटली में 19 जुलाई को समाप्त होने वाला यह आयोजन ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और दक्षिणी विकास जैसे विषयों पर आगे के सत्रों के साथ नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच संवाद का मंच बना रहेगा।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.10 | neutral |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.30 | aligned |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.40 | critical |
Continental Europe calls for a systemic approach to AI, balancing innovation and regulation.
It uses the authority of a university professor and regulatory committee member to lend credibility to a balanced view.
It does not mention the discovery of 15,000 fake sites or the deepfake detection research, focusing instead on a general debate.
La ricerca australiana dimostra che il pubblico può essere addestrato a riconoscere i deepfake, offrendo una soluzione pratica.
Presenta la ricerca come una risposta concreta a un problema crescente, usando la citazione di un esperto per legittimare l'ottimismo.
Non menziona l'inchiesta francese sui 15.000 siti falsi né il dibattito regolatorio europeo.
The French investigation reveals the enormous scale of AI-generated disinformation, warning of the threat.
It uses concrete numbers (15,000 sites) and the figure of the investigative journalist to create urgency and credibility.
It does not mention the Australian research on deepfake detection training or the European regulatory debate.
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