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भू-राजनीति और राजनीतिशुक्रवार, 17 जुलाई 2026

इज़राइल में कारागारों की सुरक्षा हेतु मगरमच्छों को कानूनी मंज़ूरी, केरल ने वन्यजीव स्थानांतरण के लिए वायुसेना की मदद मांगी

इज़राइल की पर्यावरण मंत्री ने नील मगरमच्छ को 'पालतू वन्यजीव' घोषित कर जेलों के चारों ओर इनकी तैनाती का रास्ता साफ़ किया, जबकि केरल वन विभाग ने संघर्षरत बाघ-तेंदुओं को हेलीकॉप्टर से स्थानांतरित करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है।

इज़राइल की पर्यावरण संरक्षण मंत्री इदित सिलमान ने नील मगरमच्छ को 'पालतू वन्यजीव' घोषित कर दिया है, जिससे कारागार सेवा को सुरक्षा कारणों से इन सरीसृपों को जेल परिसरों के आसपास तैनात करने की अनुमति मिल सकेगी। यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर की उस योजना को साकार करने की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसके तहत नेगेव रेगिस्तान स्थित कत्ज़ियोत उच्च-सुरक्षा कारागार जैसे संस्थानों में फ़िलिस्तीनी बंदियों की निगरानी के लिए मगरमच्छों से भरी खाइयाँ बनाई जानी हैं। मंत्रालय की विधिक सलाहकार नेता द्रोरी और इज़राइल प्रकृति एवं उद्यान प्राधिकरण ने इस क़दम का विरोध करते हुए कहा कि आधुनिक कारागारों में मगरमच्छों के सुरक्षा उपयोग का कोई पेशेवर उदाहरण नहीं है और न ही क़ानूनी आधार पूरे होते हैं।

विधिक सलाहकार के अनुसार, अमेरिका में एक संक्षिप्त प्रयोग को छोड़ दें तो ऐसा कोई मॉडल मौजूद नहीं है, और कारागार सेवा के पास कुत्तों के अनुभव के बावजूद मगरमच्छ जैसे ख़तरनाक वन्यजीवों के पालन की विशेषज्ञता नहीं है। प्राधिकरण ने चेतावनी दी कि एक भी मगरमच्छ के भागने पर वह नालों, जलाशयों या मछली तालाबों में वर्षों तक जीवित रह सकता है, स्थानीय जीवों का शिकार कर सकता है और जनता के लिए ख़तरा बन सकता है। इसके बावजूद, सिलमान ने विधिक राय को दरकिनार करते हुए यह तर्क दिया कि एक सुरक्षा एजेंसी द्वारा संचालित होने पर स्थिति भिन्न होगी। इज़राइली मीडिया के अनुसार, कारागार सेवा ने चिड़ियाघरों का दौरा कर व्यवहार्यता का आकलन शुरू कर दिया है, हालाँकि एक मगरमच्छ की क़ीमत 8,000 से 20,000 डॉलर तक होने के कारण यह परियोजना भारी वित्तीय निवेश की माँग करती है।

इस बीच, भारत के केरल राज्य ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए एक भिन्न किंतु समानांतर असामान्य उपाय प्रस्तावित किया है। केरल वन विभाग ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के ज़रिए बाघ, तेंदुआ और अन्य बड़े स्तनधारियों को संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाए। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक पी. पुगाझेंदी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर हवाई स्थानांतरण एक स्थापित संरक्षण उपकरण है, जैसा कि अफ़्रीका से चीतों के पुनर्स्थापन में देखा गया। राज्य के वन मंत्री शिबू बेबी जॉन ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस अनुरोध पर सकारात्मक रुख़ दिखाया है और वायुसेना ने संकेत दिया है कि छोटे जानवरों को एयरलिफ़्ट किया जा सकता है, जबकि हाथियों के लिए चिनूक हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता होगी।

हालाँकि, वन्यजीव पारिस्थितिकीविद् पी.एस. ईसा जैसे विशेषज्ञों ने इस विचार की पारिस्थितिक और आर्थिक व्यवहार्यता पर प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि अफ़्रीका के विशाल भू-दृश्यों वाले मॉडल को केरल के सघन मानव बसाव और सीमित वन क्षेत्र में दोहराना कठिन है, और स्थानांतरित पशुओं के लिए उपयुक्त स्थल खोजना एक चुनौती बनी रहेगी। दोनों ही प्रकरणों में पर्यावरणीय संगठनों और विशेषज्ञों का विरोध सामने आया है। इज़राइल में 'मतनो लेचायोत लेचायोत' और 'एनिमल्स' जैसे समूहों ने मगरमच्छों के प्रयोग को पशु क्रूरता बताते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने की चेतावनी दी है, जबकि केरल में वैज्ञानिक आधार के बिना हस्तक्षेप को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। फ़िलहाल, इज़राइल की योजना को अभी भी अतिरिक्त विधायी मंज़ूरी और सार्वजनिक टिप्पणी प्रक्रिया की आवश्यकता है, वहीं केरल का प्रस्ताव भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारतीय वन प्रबंधन संस्थान से वहन क्षमता अध्ययनों की रिपोर्ट आने तक लंबित रहेगा।

विचलन — कौन इसे कैसे बताता है
40%मध्यम
4 ब्लॉक · स्थिति −0.90 से +0.10 तक
आलोचनात्मकसमर्थक
EURINDISRSEA
प्रेस ब्लॉकों के बीच विचलन
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस−0.20neutral
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस+0.10neutral
इज़राइली प्रेस−0.70critical
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस−0.90critical
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस−0.20
स्वर

इज़राइल जेल सुरक्षा के लिए मगरमच्छों की कानूनी स्थिति बदलता है, एक व्यावहारिक लेकिन विवादास्पद कदम।

तंत्रneutralizzazione

तकनीक निर्णय को एक तकनीकी-प्रशासनिक मामले के रूप में प्रस्तुत करना है, दक्षिणपंथी संदर्भ का उल्लेख करते हुए लेकिन नैतिक निहितार्थों में गहराई से जाने बिना।

चूक

फिलिस्तीनी कैदियों के संदर्भ या इज़राइली पर्यावरण अधिकारियों के विरोध का उल्लेख नहीं करता।

संदेहउदासीनता
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस+0.10
स्वर

भारत मानव-वन्यजीव संघर्ष को जानवरों के हवाई स्थानांतरण जैसे व्यावहारिक समाधानों से निपटता है।

तंत्रlocalizzazione

तकनीक मुद्दे को एक तकनीकी-प्रबंधन समस्या के रूप में प्रस्तुत करना है, राजनीतिक या अंतर्राष्ट्रीय आयाम के किसी भी संदर्भ से बचना।

चूक

इज़राइली मगरमच्छ कहानी को पूरी तरह से छोड़ देता है, केवल स्थानीय भारतीय चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करता है।

व्यावहारिकताउदासीनता
इज़राइली प्रेस−0.70
स्वर

इज़राइली सरकार एक खतरनाक और विवादास्पद योजना को लागू करने के लिए पेशेवर विरोध को दरकिनार करती है।

तंत्रdenuncia interna

तकनीक आंतरिक असहमति और पेशेवर आधार की कमी को उजागर करना है, जिससे निर्णय को अवैध ठहराया जा सके।

चूक

फिलिस्तीनी कैदियों के दृष्टिकोण या अंतर्राष्ट्रीय आलोचना का उल्लेख नहीं करता, आंतरिक नौकरशाही संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करता है।

आक्रोशचेतावनीसंदेह
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस−0.90
स्वर

इज़राइल फिलिस्तीनी कैदियों के खिलाफ एक बर्बर योजना लागू करता है, मगरमच्छों को यातना के उपकरण के रूप में उपयोग करता है।

तंत्रvittimizzazione

तकनीक अत्यधिक भावनात्मक और आरोप लगाने वाली भाषा का उपयोग करना है, इस उपाय को इज़राइली अमानवीयता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करना।

चूक

आंतरिक इज़राइली आपत्तियों या सुरक्षा संदर्भ का उल्लेख नहीं करता, निर्णय को एक पूर्ण और सर्वसम्मत तथ्य के रूप में प्रस्तुत करता है।

आक्रोशचेतावनीपीड़ितभाव

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नेतन्याहू ने विश्व कप फाइनल से पहले अर्जेंटीना को समर्थन दिया, मिलेई से दोस्ती का दिया हवाला·नाइजीरिया के बजट में 210 अरब नायरा की दोहरी प्रविष्टियाँ, विपक्ष ने सरकार को 'इतिहास की सबसे लापरवाह' बताया·कोपेनहेगन की बेकरी से वैश्विक सूचकांकों तक: नॉर्डिक शहरों की जीवनशैली का विरोधाभास·अर्जेंटीना, कोलंबिया और ब्राजील में नाबालिगों से यौन शोषण के मामलों में भरोसे का दुरुपयोग उजागर·जब पारा 50 डिग्री छूने लगा: खुज़ेस्तान के खेतों से स्पेन की सड़कों तक गर्मी की कहानी·मेक्सिको से इंडोनेशिया तक: पर्यावरण, बच्चों और पीड़ितों के अधिकारों पर न्यायिक व विधायी कार्रवाई·बुज़ुर्ग होती दुनिया: देखभाल की बढ़ती लागत और तकनीकी समाधानों की दौड़·रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों से कीव में जान-माल का नुकसान, यूक्रेन ने रूसी लॉजिस्टिक ठिकानों पर ड्रोन से किया पलटवार·नेतन्याहू ने विश्व कप फाइनल से पहले अर्जेंटीना को समर्थन दिया, मिलेई से दोस्ती का दिया हवाला·नाइजीरिया के बजट में 210 अरब नायरा की दोहरी प्रविष्टियाँ, विपक्ष ने सरकार को 'इतिहास की सबसे लापरवाह' बताया·कोपेनहेगन की बेकरी से वैश्विक सूचकांकों तक: नॉर्डिक शहरों की जीवनशैली का विरोधाभास·अर्जेंटीना, कोलंबिया और ब्राजील में नाबालिगों से यौन शोषण के मामलों में भरोसे का दुरुपयोग उजागर·जब पारा 50 डिग्री छूने लगा: खुज़ेस्तान के खेतों से स्पेन की सड़कों तक गर्मी की कहानी·मेक्सिको से इंडोनेशिया तक: पर्यावरण, बच्चों और पीड़ितों के अधिकारों पर न्यायिक व विधायी कार्रवाई·बुज़ुर्ग होती दुनिया: देखभाल की बढ़ती लागत और तकनीकी समाधानों की दौड़·रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों से कीव में जान-माल का नुकसान, यूक्रेन ने रूसी लॉजिस्टिक ठिकानों पर ड्रोन से किया पलटवार·
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शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

इज़राइल में कारागारों की सुरक्षा हेतु मगरमच्छों को कानूनी मंज़ूरी, केरल ने वन्यजीव स्थानांतरण के लिए वायुसेना की मदद मांगी

इज़राइल की पर्यावरण मंत्री ने नील मगरमच्छ को 'पालतू वन्यजीव' घोषित कर जेलों के चारों ओर इनकी तैनाती का रास्ता साफ़ किया, जबकि केरल वन विभाग ने संघर्षरत बाघ-तेंदुओं को हेलीकॉप्टर से स्थानांतरित करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है।

इज़राइल की पर्यावरण संरक्षण मंत्री इदित सिलमान ने नील मगरमच्छ को 'पालतू वन्यजीव' घोषित कर दिया है, जिससे कारागार सेवा को सुरक्षा कारणों से इन सरीसृपों को जेल परिसरों के आसपास तैनात करने की अनुमति मिल सकेगी। यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर की उस योजना को साकार करने की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसके तहत नेगेव रेगिस्तान स्थित कत्ज़ियोत उच्च-सुरक्षा कारागार जैसे संस्थानों में फ़िलिस्तीनी बंदियों की निगरानी के लिए मगरमच्छों से भरी खाइयाँ बनाई जानी हैं। मंत्रालय की विधिक सलाहकार नेता द्रोरी और इज़राइल प्रकृति एवं उद्यान प्राधिकरण ने इस क़दम का विरोध करते हुए कहा कि आधुनिक कारागारों में मगरमच्छों के सुरक्षा उपयोग का कोई पेशेवर उदाहरण नहीं है और न ही क़ानूनी आधार पूरे होते हैं।

विधिक सलाहकार के अनुसार, अमेरिका में एक संक्षिप्त प्रयोग को छोड़ दें तो ऐसा कोई मॉडल मौजूद नहीं है, और कारागार सेवा के पास कुत्तों के अनुभव के बावजूद मगरमच्छ जैसे ख़तरनाक वन्यजीवों के पालन की विशेषज्ञता नहीं है। प्राधिकरण ने चेतावनी दी कि एक भी मगरमच्छ के भागने पर वह नालों, जलाशयों या मछली तालाबों में वर्षों तक जीवित रह सकता है, स्थानीय जीवों का शिकार कर सकता है और जनता के लिए ख़तरा बन सकता है। इसके बावजूद, सिलमान ने विधिक राय को दरकिनार करते हुए यह तर्क दिया कि एक सुरक्षा एजेंसी द्वारा संचालित होने पर स्थिति भिन्न होगी। इज़राइली मीडिया के अनुसार, कारागार सेवा ने चिड़ियाघरों का दौरा कर व्यवहार्यता का आकलन शुरू कर दिया है, हालाँकि एक मगरमच्छ की क़ीमत 8,000 से 20,000 डॉलर तक होने के कारण यह परियोजना भारी वित्तीय निवेश की माँग करती है।

इस बीच, भारत के केरल राज्य ने मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए एक भिन्न किंतु समानांतर असामान्य उपाय प्रस्तावित किया है। केरल वन विभाग ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के ज़रिए बाघ, तेंदुआ और अन्य बड़े स्तनधारियों को संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाए। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक पी. पुगाझेंदी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर हवाई स्थानांतरण एक स्थापित संरक्षण उपकरण है, जैसा कि अफ़्रीका से चीतों के पुनर्स्थापन में देखा गया। राज्य के वन मंत्री शिबू बेबी जॉन ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस अनुरोध पर सकारात्मक रुख़ दिखाया है और वायुसेना ने संकेत दिया है कि छोटे जानवरों को एयरलिफ़्ट किया जा सकता है, जबकि हाथियों के लिए चिनूक हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता होगी।

हालाँकि, वन्यजीव पारिस्थितिकीविद् पी.एस. ईसा जैसे विशेषज्ञों ने इस विचार की पारिस्थितिक और आर्थिक व्यवहार्यता पर प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि अफ़्रीका के विशाल भू-दृश्यों वाले मॉडल को केरल के सघन मानव बसाव और सीमित वन क्षेत्र में दोहराना कठिन है, और स्थानांतरित पशुओं के लिए उपयुक्त स्थल खोजना एक चुनौती बनी रहेगी। दोनों ही प्रकरणों में पर्यावरणीय संगठनों और विशेषज्ञों का विरोध सामने आया है। इज़राइल में 'मतनो लेचायोत लेचायोत' और 'एनिमल्स' जैसे समूहों ने मगरमच्छों के प्रयोग को पशु क्रूरता बताते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने की चेतावनी दी है, जबकि केरल में वैज्ञानिक आधार के बिना हस्तक्षेप को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। फ़िलहाल, इज़राइल की योजना को अभी भी अतिरिक्त विधायी मंज़ूरी और सार्वजनिक टिप्पणी प्रक्रिया की आवश्यकता है, वहीं केरल का प्रस्ताव भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारतीय वन प्रबंधन संस्थान से वहन क्षमता अध्ययनों की रिपोर्ट आने तक लंबित रहेगा।

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इज़राइल जेल सुरक्षा के लिए मगरमच्छों की कानूनी स्थिति बदलता है, एक व्यावहारिक लेकिन विवादास्पद कदम।

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तकनीक निर्णय को एक तकनीकी-प्रशासनिक मामले के रूप में प्रस्तुत करना है, दक्षिणपंथी संदर्भ का उल्लेख करते हुए लेकिन नैतिक निहितार्थों में गहराई से जाने बिना।

चूक

फिलिस्तीनी कैदियों के संदर्भ या इज़राइली पर्यावरण अधिकारियों के विरोध का उल्लेख नहीं करता।

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भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस+0.10
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भारत मानव-वन्यजीव संघर्ष को जानवरों के हवाई स्थानांतरण जैसे व्यावहारिक समाधानों से निपटता है।

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तकनीक मुद्दे को एक तकनीकी-प्रबंधन समस्या के रूप में प्रस्तुत करना है, राजनीतिक या अंतर्राष्ट्रीय आयाम के किसी भी संदर्भ से बचना।

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इज़राइली मगरमच्छ कहानी को पूरी तरह से छोड़ देता है, केवल स्थानीय भारतीय चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करता है।

व्यावहारिकताउदासीनता
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इज़राइली सरकार एक खतरनाक और विवादास्पद योजना को लागू करने के लिए पेशेवर विरोध को दरकिनार करती है।

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तकनीक आंतरिक असहमति और पेशेवर आधार की कमी को उजागर करना है, जिससे निर्णय को अवैध ठहराया जा सके।

चूक

फिलिस्तीनी कैदियों के दृष्टिकोण या अंतर्राष्ट्रीय आलोचना का उल्लेख नहीं करता, आंतरिक नौकरशाही संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करता है।

आक्रोशचेतावनीसंदेह
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस−0.90
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इज़राइल फिलिस्तीनी कैदियों के खिलाफ एक बर्बर योजना लागू करता है, मगरमच्छों को यातना के उपकरण के रूप में उपयोग करता है।

तंत्रvittimizzazione

तकनीक अत्यधिक भावनात्मक और आरोप लगाने वाली भाषा का उपयोग करना है, इस उपाय को इज़राइली अमानवीयता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करना।

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