
नेतन्याहू के समर्थन से विश्व कप फाइनल बना राजनीतिक अखाड़ा
इज़रायली पीएम के अर्जेंटीना समर्थन और माइली से दोस्ती ने स्पेन के खिलाफ खिताबी मुकाबले को खेल से परे राजनीतिक द्वंद्व में बदल दिया।
इजरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने शनिवार को अपने कार्यालय में अर्जेंटीना के राजदूत रब्बी शिमोन एक्सल वाहनिश से मुलाकात में अगले दिन होने वाले फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल के लिए अर्जेंटीना टीम को खुला समर्थन दिया। राजदूत ने नेतन्याहू को आधिकारिक टीम जर्सी भेंट की और राष्ट्रपति जेवियर माइली का एक ऑडियो संदेश सुनाया, जिसमें माइली ने कहा, 'आप मेरे दोस्त हैं, हमेशा हमारा समर्थन करते हैं। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि आप मेरी वजह से अर्जेंटीना का हौसला बढ़ा रहे हैं।' नेतन्याहू ने जवाब में कहा, 'जेवियर, तुम सच्चे दोस्त हो। हम तुम्हारे साथ हैं और अर्जेंटीना का कई तरीकों से समर्थन करते हैं, कल भी करेंगे। तुम्हें शुभकामनाएं।' इस मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो इज़रायली पीएम ऑफिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा किए गए।
यह गर्मजोशी हाल के वर्षों में अर्जेंटीना-इज़रायल संबंधों की असाधारण ऊंचाई को दर्शाती है। 2023 में सत्ता संभालने के बाद से ही राष्ट्रपति माइली ने इज़रायल के प्रति स्पष्ट झुकाव दिखाया है—इज़रायल के तीन दौरे, दूतावास को पश्चिमी यरुशलम स्थानांतरित करने की योजना और अप्रैल 2026 में आतंकवाद विरोधी सहयोग पर हस्ताक्षरित ‘आइज़क एकॉर्ड’ इसके गवाह हैं। दूसरी ओर, स्पेन ने मई 2024 में आधिकारिक रूप से फिलिस्तीन को मान्यता दी और प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ गाज़ा में इज़रायली सैन्य कार्रवाइयों की लगातार आलोचना करते रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में मेटलाइफ स्टेडियम में होने वाला खिताबी मुकाबला महज़ एक खेल प्रतियोगिता नहीं रह गया, बल्कि सोशल मीडिया पर इसे ‘इज़रायल बनाम फिलिस्तीन’ की प्रतीकात्मक लड़ाई के तौर पर देखा जाने लगा।
अर्जेंटीना के आम नागरिकों और प्रशंसकों ने नेतन्याहू के समर्थन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूज़र्स ने लिखा, ‘हम, आर्जेन्टीनावासी, इज़रायल के समर्थन की परवाह नहीं करते। हमारे दूर रहो।’ एक अन्य ने कहा, ‘हम इज़रायल का समर्थन नहीं करते; हम आज़ाद फिलिस्तीन चाहते हैं।’ कुछ ने तो जर्सी तक को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर की: ‘उस जर्सी से अपना हाथ हटाओ, हत्यारे। जिसने तुम्हें यह दी, वह हमारा प्रतिनिधित्व नहीं करता।’ यह आक्रोश इस बात का संकेत है कि माइली की शासन-शैली से समाज का बड़ा तबका असहज है और उनकी विदेश नीति को अर्जेंटीना की परंपरागत संतुलित कूटनीति से विचलन मानता है।
राजनीतिक तल्ख़ी के बावजूद मैदानी हकीकत यह है कि रविवार, 19 जुलाई (भारतीय समयानुसार सुबह) को अर्जेंटीना और स्पेन की टीमें 82,000 दर्शकों की क्षमता वाले न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में विश्व कप ट्रॉफी के लिए भिड़ेंगी। लियोनेल मेसी की अगुआई में अर्जेंटीना अपने पिछले खिताब की रक्षा के इरादे से उतरेगी, जबकि स्पेन 2010 के बाद पहली बार चैम्पियन बनने का सपना साकार करना चाहेगा। माइली ने अंधविश्वास का हवाला देते हुए फाइनल में शामिल न होने का फैसला किया है—उनका कहना है कि 1990 के बाद से अर्जेंटीनी राष्ट्रपतियों की मैच देखने जाने की आदत टीम के लिए मनहूस साबित हुई है।
इस प्रकार, 2026 विश्व कप का फाइनल अपने साथ खेल से इतर एक गहरा राजनयिक-सा रंग लिए हुए है। चाहे ट्रॉफी जो भी उठाए, यह मुकाबला आने वाले वर्षों में खेल और कूटनीति के आपस में गुंथे होने की मिसाल के तौर पर याद किया जाएगा।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.70 | critical |
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| लैटिन अमेरिकी प्रेस | +0.60 | aligned |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
लोकप्रिय विरोध नेतन्याहू के इशारे के खिलाफ उठता है, उन पर खेल का राजनीतिक उपयोग करने का आरोप लगाता है। यह फिलिस्तीनी कारण का पक्ष लेता है, इजरायली समर्थन की किसी भी वैधता को अस्वीकार करता है।
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