
अर्जेंटीना, कोलंबिया और ब्राजील में नाबालिगों से यौन शोषण के मामलों में भरोसे का दुरुपयोग उजागर
पड़ोसी, पूर्व गवर्नर और पादरी दंपत्ति पर आरोप; पीड़ितों में 8 से 17 वर्ष के बच्चे शामिल, जाँच जारी।
लैटिन अमेरिका के तीन देशों में हाल के दिनों में नाबालिगों के यौन शोषण के अलग-अलग मामलों ने समाज में भरोसे और सत्ता के दुरुपयोग के सवाल खड़े किए हैं। अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स प्रांत में एक पड़ोसी, कोलंबिया में एक पूर्व गवर्नर और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार, और ब्राजील के रोराइमा राज्य में एक इवेंजेलिकल पादरी दंपत्ति पर बच्चों के साथ दुष्कर्म और शोषण के आरोप लगे हैं। तीनों ही मामलों में आरोपियों ने पीड़ितों और उनके परिवारों के विश्वास का फायदा उठाया।
अर्जेंटीना के मेर्लो इलाके में 42 वर्षीय परागुआई नागरिक कार्लोस अल्बर्टो आवालोस वायेहो को पुलिस ने गिरफ्तार किया। स्थानीय अभियोजक के अनुसार, उसने 2014 से 2024 के बीच छह लड़कों के साथ यौन शोषण किया, जिनमें एक मानसिक रूप से कमजोर बच्चा भी शामिल था। आरोप है कि वह बच्चों को टॉफी देकर अपने घर बुलाता था और फिर चाकू व राइफल की धमकी देकर चुप रहने को मजबूर करता था। एक पीड़ित में सीखने की अक्षमता के लक्षण दिखने पर मनोवैज्ञानिक जाँच के बाद मामला सामने आया। गुस्साए परिजनों ने आरोपी का घर जला दिया, लेकिन वह भाग गया था; बाद में उसे उसके भतीजे के घर से गिरफ्तार किया गया।
कोलंबिया में पूर्व माग्दालेना गवर्नर और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार कार्लोस काइसीदो पर एक 8 वर्षीय बच्ची के यौन शोषण का आरोप है। माँ की शिकायत के अनुसार, 2023 में एक मुलाकात के दौरान उन्होंने काइसीदो को बच्ची के साथ अकेले पाया और उसकी पायजामा अस्त-व्यस्त थी तथा काइसीदो के कपड़े अनुचित स्थिति में थे। माँ का कहना है कि इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकियाँ मिलीं और काइसीदो ने व्हाट्सएप पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया। मामला अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है क्योंकि घटना के समय काइसीदो गवर्नर थे। बचाव पक्ष के वकील ने पीड़िता की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
ब्राजील के बोआ विस्टा शहर में एक पादरी दंपत्ति, वेंडरसन लीमा डि सूजा (32) और एरिएली कामिला मोराइस डि सूजा (24) पर 12 से 17 साल की कम से कम छह किशोरियों के साथ दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के आरोप हैं। पुलिस के अनुसार, यह दंपत्ति बाइबल की आयतों को तोड़-मरोड़कर पेश करता था और यौन कृत्यों को ‘ईश्वरीय मिशन’ बताता था। पीड़िताओं को चुप रखने के लिए पैसे और चर्च में पद देने का लालच दिया जाता था। आरोपी फरार हैं और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी है। पुलिस ने बताया कि दंपत्ति ने सबूत मिटाने के लिए मोबाइल फोन तुड़वा दिया और ईमेल अकाउंट डिलीट करवा दिए।
तीनों मामलों में एक समानता यह है कि आरोपियों ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा या धार्मिक हैसियत का दुरुपयोग कर पीड़ितों को चुप रहने पर मजबूर किया। अर्जेंटीना में आरोपी गिरफ्तार है और न्यायिक प्रक्रिया जारी है; कोलंबिया में जाँच प्रारंभिक चरण में है और आरोपी की ओर से अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है; ब्राजील में आरोपी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। तीनों देशों की कानूनी प्रणालियाँ अब इन मामलों में साक्ष्यों की पुष्टि और पीड़ितों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
हमास ने खलील अल-हय्या को चुना नया प्रमुख, ईरान समर्थित कट्टरपंथी धड़े की जीत
9 भाषाएँ · 27 स्रोत
Economy & Markets सेहोर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से तेल 90 डॉलर के पार, वैश्विक आपूर्ति पर संकट
8 भाषाएँ · 21 स्रोत
Technology सेचीन के किमी K3 ने AI बाज़ार में मचाई हलचल, कंप्यूट संकट से नए सब्सक्रिप्शन रोके
5 भाषाएँ · 8 स्रोत