
जून में वैश्विक विनिर्माण का मिलाजुला प्रदर्शन: उत्पादन में तेजी, मांग में नरमी
अमेरिका, यूरोप और एशिया के पीएमआई आंकड़े बताते हैं कि आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के बीच कंपनियों ने स्टॉक बढ़ाया, लेकिन नए ऑर्डर की वृद्धि दर घटी।
जून 2026 में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विनिर्माण पीएमआई विस्तार के दायरे में रहे, लेकिन वृद्धि की रफ्तार में कमी आई। अमेरिका का आईएसएम सूचकांक 54.0 से गिरकर 53.3 पर और एसएंडपी ग्लोबल का पीएमआई 55.1 से घटकर 53.9 पर आ गया। यूरोजोन का संयुक्त पीएमआई 51.6 से 51.4 पर खिसका, जबकि ब्रिटेन 53.9 से 52.5 पर आ गया। इसके विपरीत, ताइवान 60.7 के साथ सबसे ऊपर रहा, हालांकि यह भी मई से 0.7 अंक नीचे था। ब्राजील का पीएमआई 49.1 से उछलकर 50.8 पर पहुंचा, परंतु उत्पादन और नए ऑर्डर अब भी संकुचन में रहे। कोलंबिया में यह 53.7 के साथ पांचवें महीने विस्तार दर्ज करता रहा।
इस मिलेजुले रुख के पीछे मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने से उपजी आपूर्ति बाधाएं प्रमुख कारण रहीं। कंपनियों ने संभावित मूल्य वृद्धि और डिलीवरी में देरी से बचने के लिए रणनीतिक रूप से इन्वेंट्री बढ़ाई, जिससे उत्पादन को बढ़ावा मिला। ब्रिटेन में फैक्ट्री उत्पादन 21 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, वहीं अमेरिका और यूरोपीय संघ में भी उत्पादन उप-सूचकांकों में सुधार दर्ज हुआ। लेकिन नए ऑर्डर की वृद्धि दर लगभग सभी क्षेत्रों में धीमी पड़ गई, जो दर्शाता है कि स्टॉक निर्माण से मिला अस्थायी सहारा अब कमजोर पड़ रहा है।
लागत मोर्चे पर राहत के संकेत मिले। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते इनपुट मूल्य मुद्रास्फीति की गति धीमी हुई, विशेषकर अमेरिका में जहां आईएसएम का मूल्य सूचकांक 82.1 से तेजी से गिरकर 73.0 पर आ गया। जर्मनी और फ्रांस में भी लागत दबाव पिछले महीनों की तुलना में कम हुआ। फिर भी, विक्रय मूल्यों में वृद्धि जारी रही, क्योंकि कंपनियों ने संचित लागतों को ग्राहकों पर डाला। रोजगार के मोर्चे पर तस्वीर धुंधली रही: अमेरिका में मई 2020 के बाद सबसे तेज नौकरी कटौती दर्ज हुई, जबकि यूरोजोन में लगातार तीसरे वर्ष रोजगार घटा। ब्राजील और कोलंबिया में मामूली भर्ती हुई।
17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, लेकिन अधिकांश सर्वेक्षण प्रतिक्रियाएं इससे पहले एकत्रित हो चुकी थीं। इसलिए आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा लागत पर इसके पूर्ण प्रभाव का आकलन जुलाई के आंकड़ों में ही संभव होगा। व्यापारिक विश्वास सतर्क बना रहा: भू-राजनीतिक अनिश्चितता और नीतिगत दिशा को लेकर चिंताओं के बीच अमेरिका और ब्रिटेन में भविष्य की उम्मीदें नरम पड़ीं, जबकि फ्रांस और कोलंबिया में आत्मविश्वास बढ़ा।
दक्षिण एशिया के लिए ये रुझान मायने रखते हैं। वैश्विक विनिर्माण की धीमी गति और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं के निर्यात और मुद्रास्फीति परिदृश्य को प्रभावित कर सकते हैं। अगला पड़ाव जुलाई के पीएमआई आंकड़े होंगे, जो युद्धविराम के बाद की स्थिति और केंद्रीय बैंकों की आगामी मौद्रिक नीति बैठकों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जून में वैश्विक विनिर्माण का प्रदर्शन मिलाजुला रहा। कई क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा, लेकिन मांग नरम पड़ी और पीएमआई आंकड़ों ने विस्तार की धीमी गति का संकेत दिया। ये आंकड़े एक जटिल तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला में कुछ राहत के बावजूद निर्यात में कमजोरी बनी रही।
ईरान युद्ध से अपेक्षित मूल्य वृद्धि और आपूर्ति व्यवधानों से पहले कंपनियों द्वारा स्टॉक जमा करने के कारण कारखाना उत्पादन 21 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। लेकिन नए ऑर्डर कमजोर पड़ गए, जिससे समग्र विनिर्माण वृद्धि धीमी हो गई। संघर्ष की छाया आपूर्ति श्रृंखलाओं पर मंडरा रही है, जिससे स्टॉक बनाने की तत्कालिक होड़ मच गई है।
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