
किफायती आवास की राह में वैश्विक प्रयोग: अर्जेंटीना से स्वीडन तक
जहां ब्यूनस आयर्स में ऊंची किराया आय के बावजूद निवेशक हिचक रहे हैं, वहीं अल्जीरिया सब्सिडी बढ़ा रहा है और स्वीडन कानूनी सुधार लागू कर रहा है।
दुनिया के कई आवास बाजारों में एक विचित्र विसंगति देखने को मिल रही है: संपत्तियों की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई से नीचे हैं और किराये से होने वाली आय आकर्षक स्तर पर है, फिर भी खरीदार आगे नहीं आ रहे। ब्यूनस आयर्स में यह स्थिति सबसे स्पष्ट है, जहां ज़ोनाप्रॉप के आंकड़ों के अनुसार औसत अपार्टमेंट की कीमत 2,467 डॉलर प्रति वर्ग मीटर है, जो अपने चरम से 12 प्रतिशत कम है, जबकि सकल वार्षिक किराया प्रतिफल 5.89 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके बावजूद, मई में संपत्ति हस्तांतरण की संख्या पिछले वर्ष की समान अवधि से 3 प्रतिशत कम रही।
इस गतिरोध की जड़ में किराया बाजार का पूर्णतः बदला हुआ ढांचा है। किराया कानून के निरस्त होने के बाद से किराये के लिए उपलब्ध इकाइयों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जो फरवरी 2023 के न्यूनतम स्तर से 3.4 गुना अधिक है। इस अधिपूर्ति ने किरायेदारों को अधिक विकल्प और सौदेबाजी की शक्ति दे दी है, जिससे संपत्ति मालिकों के लिए खालीपन की अवधि (वैकेंसी) एक बड़ा जोखिम बन गई है। स्थानीय रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक अब केवल सकल प्रतिफल नहीं देखते, बल्कि इस वैकेंसी जोखिम को अपनी गणना में शामिल करते हैं, जिससे प्रभावी आय कम हो जाती है। साथ ही, मेंडोज़ा जैसे अन्य अर्जेंटीनी शहरों में किरायेदारों के लिए आय प्रमाणन की सख्त शर्तें लागू हैं, जहां किराया आय के 35 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।
उत्तरी अफ्रीका में अल्जीरिया ने एक अलग रास्ता चुना है। 26 मई 2026 के एक संयुक्त मंत्रिस्तरीय आदेश द्वारा ‘अदल 2’ योजना के तहत राजकीय सहायता में असाधारण वृद्धि की गई है। 2013 में पंजीकृत आवेदनों के लिए सड़क और बाहरी नेटवर्क कार्यों की लागत का 100 प्रतिशत राज्य वहन करेगा, जो पहले 72 प्रतिशत था, और प्रति वर्ग मीटर सहायता राशि 5,000 दीनार से बढ़ाकर 10,000 दीनार कर दी गई है। इससे लाभार्थियों को शेष राशि का केवल 25 प्रतिशत भुगतान करना होगा, जिसे 25 वर्षों में चुकाया जा सकेगा।
यूरोप में नीतिगत हस्तक्षेप का दायरा और व्यापक है। स्वीडन में 1 जुलाई 2026 से चार सुधार प्रभावी हुए हैं: एक नया निजी किराया कानून जो उप-किराये और साझा आवास को सरल बनाता है, ‘किराया-खरीद’ (हायरकोप) का एक कानूनी मॉडल जो किरायेदारों को धीरे-धीरे स्वामित्व की ओर बढ़ने देता है, आवास भत्ते और नगरपालिका किराया गारंटी में वृद्धि, तथा निर्माण नियमों को स्थायी रूप से कार्य-आधारित बनाना। आवास मंत्री आंद्रेअस कार्लसन के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य बिना नई नियामक बाधाएं खड़ी किए आपूर्ति बढ़ाना और मांग को सशक्त करना है। जर्मनी में फ्रैंकफर्ट जैसे शहरों में निजी पहलें महिलाओं को संपत्ति निवेश के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं, इस तर्क के साथ कि संकट के समय खरीदारी बेहतर सौदेबाजी की स्थिति प्रदान करती है और उत्तोलन (लीवरेज) प्रभाव छोटी पूंजी को भी बाजार में ला सकता है।
ये विविध प्रयास एक साझा संकेत देते हैं: आवास बाजार अब केवल मांग-आपूर्ति के पारंपरिक समीकरण से नहीं चल रहे, बल्कि नीतिगत डिजाइन और जोखिम की नई परिभाषाओं से आकार ले रहे हैं। अगला ठोस पड़ाव स्वीडिश सुधारों का क्रियान्वयन है, जो अभी प्रारंभ हुआ है, जबकि अर्जेंटीना में बाजार सहभागी 2027 के चुनावी वर्ष से पहले ऋण विस्तार और स्टॉक के अवशोषण पर नज़र रखे हुए हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ब्यूनस आयर्स में संपत्ति उच्च किराये की आय देती है और कीमतें ऐतिहासिक शिखर से नीचे हैं, फिर भी निवेशक हिचकिचा रहे हैं। बाजार आकर्षक रिटर्न और विश्वास की कमी के बीच फंसा है जो सुधार को टाल रहा है।
जर्मनी में किराए पर देने के लिए खरीदारी को प्रबंधनीय जोखिम और सही समय का अवसर माना जाता है, खासकर महिला निवेशकों के लिए। सावधानीपूर्वक जांच के साथ, संपत्ति अनिश्चित समय में भी स्थिर रिटर्न दे सकती है।
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