
जोड़ों के दर्द से दिल तक: व्यायाम, नींद और मानसिक सेहत पर वैश्विक शोध की नई तस्वीर
आराम की पुरानी सलाह को दरकिनार करते हुए नए अध्ययन बताते हैं कि सही व्यायाम, पर्याप्त नींद और भावनात्मक प्रबंधन उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य को कैसे बनाए रख सकते हैं।
लंबे समय तक जोड़ों के दर्द में आराम को ही उपचार माना जाता था, लेकिन यूरोपीय लीग अगेंस्ट रूमेटिज्म (यूलार) ने 2018 में ही गठिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस के मानक उपचार में शारीरिक गतिविधि को शामिल कर लिया था, और 2025 के अद्यतन ने इस सिफारिश को और मजबूत किया। यह बदलाव सिर्फ जोड़ों तक सीमित नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) के एक अध्ययन में पाया गया कि तीन महीने के जलीय व्यायाम कार्यक्रम से वृद्ध महिलाओं में चपलता, ताकत और संतुलन में सुधार हुआ, जिससे गिरने का जोखिम घटा। लैटिन अमेरिकी प्रशिक्षकों के अनुसार, पानी में चलना या फोम डंबल का उपयोग जोड़ों पर बिना दबाव डाले मांसपेशियों को मजबूत करता है, जो 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए योग या पिलाटेस से अधिक सुरक्षित विकल्प बन सकता है।
व्यायाम का लाभ केवल चलने-फिरने तक नहीं रुकता। ब्रिटेन के सेंटर फॉर कार्डियोवैस्कुलर रिसर्च की प्रोफेसर मिशेल विलियम्स के अनुसार, छाती और पीठ की मजबूत मांसपेशियां हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकती हैं, क्योंकि उच्च मांसपेशी घनत्व वाले लोगों में दिल के दौरे की आशंका कम पाई गई। यह संबंध उम्र और अन्य जोखिम कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी बना रहा। वहीं, इंडोनेशिया की प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीना मार्टिनी सोमद के अनुसार, 30 वर्ष से ऊपर की महिलाओं के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूरी है, क्योंकि इस उम्र के बाद मांसपेशियों का द्रव्यमान धीरे-धीरे घटने लगता है, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा होता है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ता है।
नींद की भूमिका भी उतनी ही अहम है। नेचर एजिंग में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन ने यूके बायोबैंक के सैकड़ों हजारों प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण कर पाया कि प्रतिदिन साढ़े छह से लगभग आठ घंटे की नींद लेने वालों के मस्तिष्क, यकृत और अग्न्याशय जैसे अंगों की जैविक आयु सबसे कम थी। छह घंटे से कम या आठ घंटे से अधिक सोने पर जैविक घड़ी तेज होती दिखी, और छह घंटे से कम नींद लेने वालों में सभी कारणों से मृत्यु का जोखिम लगभग 50 प्रतिशत अधिक रहा। इतालवी मीडिया में छपी रिपोर्टों के अनुसार, यह अध्ययन नींद की अवधि और अंग-विशिष्ट आयु के बीच सीधा संबंध स्थापित करने वाला अब तक का सबसे व्यापक शोध है।
मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी पुरानी धारणाएं टूट रही हैं। ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर फुशिया सिरोइस बताती हैं कि काम टालने की आदत कोरी आलस्य नहीं, बल्कि नकारात्मक भावनाओं से निपटने का एक तरीका है। वहीं, मनोविज्ञान की नजर से लगातार थकान और प्रेरणा की कमी को अक्सर भावनात्मक खिंचाव का संकेत माना जाना चाहिए, न कि आलस्य। यह समझ भारत जैसे देशों में कार्यस्थल संस्कृति के लिए अहम है, जहां लंबे समय तक काम करने को समर्पण का प्रतीक माना जाता है, जबकि स्टैनफोर्ड के शोधकर्ता एलेक्स सूजुंग-किम पैंग के अनुसार, सप्ताह में 20 घंटे काम करने वाले वैज्ञानिक 35 या 60 घंटे काम करने वालों से अधिक उत्पादक पाए गए।
इन सबके बीच, घर पर रक्तचाप मापने की सही विधि भी उतनी ही अहम है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और मेयो क्लीनिक ऊपरी बांह वाले स्वचालित उपकरणों की सिफारिश करते हैं, और एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया कि घरेलू निगरानी से रक्तचाप के आंकड़ों में सुधार हुआ और हृदय संबंधी घटनाएं कम हुईं। अगला ठोस कदम इन निष्कर्षों को सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों में शामिल करना है, ताकि व्यायाम, नींद और मानसिक स्वास्थ्य के बीच के इस जटिल संतुलन को व्यक्तिगत देखभाल का हिस्सा बनाया जा सके।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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नेचर एजिंग में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन से पता चलता है कि बहुत कम या बहुत अधिक नींद जैविक उम्र बढ़ने को तेज करती है। इसलिए एकीकृत रोकथाम के लिए नियमित, संतुलित नींद ज़रूरी है, अति से बचना चाहिए।
एक ब्रिटिश प्रोफेसर के अध्ययन से पता चला है कि मजबूत छाती और पीठ की मांसपेशियां दिल के दौरे के जोखिम को कम करती हैं, चाहे अन्य कारक कुछ भी हों। इसलिए एकीकृत रोकथाम में लक्षित मांसपेशी मजबूती शामिल है।
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