
गोवा की शादी की वो आखिरी मुस्कान: के. भाग्यराज का जाना और आम आदमी के हीरो की विदाई
तमिल सिनेमा के 'स्क्रीनप्ले किंग' के. भाग्यराज का 73 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन, उनके मेंटर भारतीराजा के निधन के मात्र सत्रह दिन बाद।
गोवा के एक होटल की सीढ़ियों पर चिरंजीवी वेंकटेश को गले लगाते हैं, फिर नज़र पड़ती है पास खड़े चश्माधारी सज्जन पर—वही गर्मजोशी से झुककर मिलते हैं। वह शख्स थे के. भाग्यराज, तमिल सिनेमा के वो कहानीकार जिन्होंने आम आदमी को हीरो बनाया। यह उनकी आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति थी, अभिनेत्री खुशबू सुंदर की बेटी की शादी का वह वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। कुछ दिनों बाद, 27 जून 2026 की सुबह, सीने में दर्द के बाद चेन्नई के अपोलो अस्पताल ले जाते समय उन्होंने अंतिम सांस ली। यह झटका तब और गहरा गया जब लोगों को याद आया कि अभी सत्रह दिन पहले ही उनके गुरु, मशहूर निर्देशक भारतीराजा का भी निधन हुआ था।
भाग्यराज ने अपने करियर की शुरुआत भारतीराजा के सहायक निर्देशक के रूप में की थी, लेकिन जल्द ही वे तमिल सिनेमा के उस 'वन-मैन स्टूडियो' बन गए जो कहानी, पटकथा, संवाद, निर्देशन, अभिनय और संगीत सब कुछ खुद करता था। उनकी फिल्मों का नायक कोई सुपरस्टार नहीं, बल्कि चश्मा लगाए, शर्मीला, गलतियां करता और आत्म-व्यंग्य करने वाला आम इंसान होता था। 'अंधा 7 नाटकल' (1981) को निर्देशक मणिरत्नम ने तमिल सिनेमा की बेहतरीन पटकथाओं में गिना, वहीं 'मुंधनई मुडिचु' और 'चिन्ना वीडु' जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के साथ स्त्री-पुरुष संबंधों और पारिवारिक तनावों को हास्य के साथ पेश किया। उनकी लेखनी में कोंगु क्षेत्र की स्थानीय बोली और 'एक गांव में एक किसान रघु ठाठा' जैसे संवाद आज भी तमिल पॉप संस्कृति का हिस्सा हैं।
भाग्यराज की कहानियों ने खासतौर पर महिला दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा—गृहिणियां घर के काम निपटाकर मैटिनी शो देखने पहुंचती थीं। उनकी नायिकाएं महज सजावट नहीं थीं, बल्कि अपनी पहचान और आवाज़ रखती थीं। संकट के क्षणों में भी हास्य ढूंढ़ लेने की उनकी कला ने मध्यवर्गीय परिवारों के रोज़मर्रा के द्वंद्वों को पर्दे पर जीवंत कर दिया। उनका प्रभाव भाषाई सीमाओं को पार कर गया—उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ 'आखिरी रास्ता' (1986) का निर्देशन किया और उनकी कई तमिल फिल्में हिंदी में 'मास्टरजी', 'बेटा' और 'राजा बाबू' जैसी सफल रीमेक बनीं।
निधन के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की घोषणा की। रजनीकांत, कमल हासन, ममूटी और वेंकटेश सहित फिल्म जगत की कई हस्तियों ने चेन्नई स्थित उनके नुंगमबक्कम आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। बेटे शांतनु भाग्यराज का रो-रोकर बुरा हाल था। बेसेंट नगर शवदाह गृह में रविवार दोपहर राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकली। इसी वर्ष जनवरी में अपने 50 साल के फिल्मी सफर का जश्न मनाते हुए भाग्यराज ने एक नई फिल्म और वेब सीरीज़ पर लौटने का ऐलान किया था—एक ऐसी वापसी जो अब अधूरी रह गई।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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के. भाग्यराज के निधन को एक ऐसे पटकथा प्रतिभा की क्षति के रूप में देखा जा रहा है जिन्होंने तमिल मध्यम वर्ग को आवाज़ दी और साबित किया कि नायक एक साधारण इंसान भी हो सकता है। सुपरस्टारों की श्रद्धांजलि और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा घोषित राजकीय सम्मान उनकी पचास वर्षों की विरासत को रेखांकित करते हैं, जिसमें रोज़मर्रा की कॉमेडी और संकट को कालजयी सिनेमा में बदला गया।
तमिल निर्देशक और अभिनेता के. भाग्यराज का 73 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया, अपने गुरु भारतीराजा के निधन के कुछ ही सप्ताह बाद। वे भारतीय सिनेमा में निर्देशक, अभिनेता और पटकथा लेखक के रूप में लगभग पाँच दशकों की विरासत छोड़ गए हैं।
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