
दक्षिण कोरिया का विश्व कप सपना टूटा, कोच को जान से मारने की धमकी और केएफए पर भाई-भतीजावाद के आरोप
2026 विश्व कप के ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद दक्षिण कोरियाई फुटबॉल में भूचाल, कोच होंग म्युंग-बो को देश छोड़ना पड़ा और संघ ने मांगी माफी।
दक्षिण कोरिया की टीम 2026 विश्व कप के ग्रुप चरण में ही सफर खत्म कर बैठी। चेक गणराज्य के खिलाफ पहले मैच में जीत के बाद मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका से हार ने ताएगुक वॉरियर्स को तीन अंकों के साथ बाहर कर दिया। इंचियोन हवाई अड्डे पर टीम की वापसी पर प्रशंसकों ने ‘दक्षिण कोरियाई फुटबॉल मर चुकी है’ जैसे बैनर लहराए और कोच होंग म्युंग-बो के इस्तीफे की मांग की।
होंग म्युंग-बो, जो 2002 विश्व कप के सेमीफाइनल के नायक रहे थे, पर दबाव इतना बढ़ा कि उन्होंने पद छोड़ दिया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। दक्षिण कोरियाई मीडिया के अनुसार, लगातार जान से मारने की धमकियों और तीखे जनाक्रोश के बीच वे देश लौटने के मात्र दो दिन बाद अमेरिका के लॉस एंजेलिस रवाना हो गए। हवाई अड्डे पर पत्रकारों से उन्होंने टीम के अंदर किसी आंतरिक कलह से इनकार किया, लेकिन धमकियों पर चुप्पी साध ली।
यह विफलता सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रही। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने सोशल मीडिया पर लिखा, “जब योग्यता की जगह गठबंधन को तरजीह दी जाती है और एक अक्षम व्यक्ति को कमांडर चुन लिया जाता है, तो परिणाम स्पष्ट होता है।” दक्षिण कोरियाई खेल विश्लेषकों ने कोरिया फुटबॉल एसोसिएशन (केएफए) पर पारदर्शिता की कमी और भाई-भतीजावाद का आरोप लगाया। पूर्व खिलाड़ी पार्क जू-हो ने खुलासा किया कि होंग की नियुक्ति उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना हुई, जबकि जेसी मार्श जैसे मजबूत उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर दिया गया।
केएफए ने एक आधिकारिक बयान में प्रशंसकों से माफी मांगी और कहा कि वह इस विफलता को आत्मचिंतन का अवसर बनाएगी। साथ ही, संघ ने हाल की कई मीडिया रिपोर्टों को “पूरी तरह गलत” बताया। केएफए की संबंधित समिति ने 3 जुलाई को बैठक कर नए मुख्य कोच के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार करने का निर्णय लिया, ताकि आगामी एशियाई कप और लीग ए के दूसरे हाफ के मैचों की तैयारी बाधित न हो।
इस पूरे प्रकरण ने दक्षिण कोरिया की फीफा रैंकिंग को 32वें स्थान पर गिरा दिया, जो चार वर्षों में सबसे निचला स्तर है, जबकि चिर-प्रतिद्वंद्वी जापान 17वें स्थान पर पहुंच गया। सोन ह्युंग-मिन, ली कांग-इन और किम मिन-जे जैसे यूरोपीय क्लबों में चमकने वाले सितारों से सजी इस ‘स्वर्णिम पीढ़ी’ के लिए यह नतीजा एक करारा झटका है। अब केएफए के सामने 60 दिनों के भीतर नए अध्यक्ष का चुनाव कराने की चुनौती भी है, जिसे फीफा और कोरियाई ओलंपिक समिति के नियमों के अनुरूप पूरा करना होगा।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.10 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | +0.30 | aligned |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.10 | neutral |
South Korea's crisis proves that success built on rhetoric does not hold. The collapse is deserved, and the Russian football school—which builds character and discipline—emerges stronger.
It attributes the failure to internal moral and structural flaws (arrogance, lack of discipline), thereby re-projecting its own sporting superiority without explicitly mentioning it.
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South Korea is out. Expected result, little surprise. Other tournaments matter here.
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