
ईरान और ब्राज़ील में किराया संकट: मुद्रास्फीति की मार और नीतिगत खींचतान
तेहरान में सालाना मुद्रास्फीति 88.6% पहुंचने और साओ पाउलो में किराए में उछाल से दोनों देशों में किफायती आवास का संकट गहराया है, जिससे किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच तनाव बढ़ रहा है।
ईरान में आवास की लागत ने एक नया रिकॉर्ड छूआ है: सांख्यिकी केंद्र के अनुसार, 21 जून को समाप्त माह में वार्षिक उपभोक्ता मुद्रास्फीति 88.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि युद्ध की शुरुआत के बाद से मकानों की कीमतों में लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। तेहरान की रियल एस्टेट यूनियन के अनुसार, बैंकों द्वारा बिचौलियों के माध्यम से बाजार में नकदी डाले जाने से कीमतों को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं, ब्राज़ील के साओ पाउलो में इस वर्ष के पहले पांच महीनों में किराया अनुबंधों में 4.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो 3.20 प्रतिशत की आधिकारिक मुद्रास्फीति दर से अधिक है, लेकिन ईरानी संकट की तुलना में यह स्थिति अभी भी नियंत्रित है।
दोनों देशों में संकट का तंत्र अलग-अलग है। ईरान में अमेरिकी प्रतिबंधों की वापसी और इजरायल तथा अमेरिका के साथ संघर्ष ने रियाल के मूल्य को लगभग आधा कर दिया है, जबकि निर्माण सामग्री की कीमतें पिछली सर्दियों में 97 प्रतिशत तक उछल गईं। इसके विपरीत, ब्राज़ील में मांग-आपूर्ति का असंतुलन प्रमुख कारण है: कार्यालयों की रिक्तता दर ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर के करीब है और ऊंची ब्याज दरों के बावजूद आवासीय मांग मजबूत बनी हुई है।
नीतिगत प्रतिक्रिया भी भिन्न रही है। ईरान में सरकार के तीनों अंगों के प्रमुखों ने किराए में वृद्धि पर 25 प्रतिशत की अधिकतम सीमा लगा दी, लेकिन इस कदम ने तीखी बहस छेड़ दी है। किरायेदारों का कहना है कि 25 प्रतिशत की वृद्धि भी वहन करना मुश्किल है, क्योंकि मजदूरों की आय में बढ़ोतरी नहीं हुई है और आवास खर्च अब उनकी कुल आय का 50-70 प्रतिशत हिस्सा लेता है। दूसरी ओर, मकान मालिकों का तर्क है कि जब संपत्ति की कीमतें 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं और रखरखाव खर्च दोगुना हो गया है, तो सीमा अनुचित है। कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मूल्य नियंत्रण से अनौपचारिक समझौते और उल्लंघन बढ़ सकते हैं।
ब्राज़ील में सीधे मूल्य नियंत्रण की बजाय बाजार ताकतों पर निर्भरता देखी जा रही है। नॉर्ड इन्वेस्टिमेंटोस की मारिलिया फोंटेस के अनुसार, कम रिक्तता दरों के कारण किराए में बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है, लेकिन यह स्थिति रियल एस्टेट फंड निवेशकों के लिए लाभदायक हो सकती है। फिर भी, किरायेदारों पर बोझ बढ़ रहा है, क्योंकि आवास लागत सामान्य मुद्रास्फीति से तेज गति से बढ़ रही है।
ईरान के लिए अगला मोड़ आगामी माह के मुद्रास्फीति आंकड़े और 25 प्रतिशत की सीमा का कार्यान्वयन होगा, जबकि ब्राज़ील में रियल एस्टेट बाजार पर केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति का प्रभाव देखा जाएगा। दोनों ही मामलों में, किफायती आवास की चुनौती मुद्रास्फीति, आय वृद्धि और नीतिगत हस्तक्षेप के बीच संतुलन की मांग कर रही है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ब्राजील में, 2026 के पहले पाँच महीनों में किराये की कीमतें 4.4% बढ़ीं, जो 3% आईपीसीए मुद्रास्फीति से अधिक है। रिक्ति दरों में गिरावट और कुछ क्षेत्रों में उच्च माँग के कारण किफायती आवास ढूँढना कठिन होता जा रहा है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ रहा है।
ईरान में, युद्ध शुरू होने के बाद से आवास की कीमतों में 80% की वृद्धि हुई है, रियल एस्टेट अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, जबकि आधिकारिक आंकड़े केवल 35% की वृद्धि बताते हैं। आँकड़ों में हेराफेरी और बैंकों द्वारा तरलता इंजेक्शन के आरोप विश्वसनीयता संकट को बढ़ावा देते हैं, जिससे आम लोगों की आर्थिक कठिनाइयाँ और गहरी हो जाती हैं।
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