
बैठने की आदत और कैंसर का खतरा: नई स्टडी में हर घंटे 9% अधिक जोखिम, हल्की गतिविधि से 12% कमी
यूके बायोबैंक के 91,000 प्रतिभागियों पर 12 साल के अध्ययन से पता चला कि लगातार बैठे रहने से कैंसर मृत्यु दर बढ़ती है, जबकि बीच-बीच में हलचल से यह जोखिम काफी हद तक घट जाता है।
लंबे समय तक एक ही जगह पर बिना हिले-डुले बैठे रहना कैंसर से मौत के खतरे को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो के शोधकर्ताओं ने पीएलओएस मेडिसिन में प्रकाशित एक अवलोकनात्मक अध्ययन में 91,292 ब्रिटिश नागरिकों के डेटा का विश्लेषण किया, जिन्होंने सात दिनों तक एक्सेलेरोमीटर पहना और फिर लगभग 12 वर्षों तक उनके स्वास्थ्य पर नज़र रखी गई। नतीजों के अनुसार, हर अतिरिक्त घंटे का अविरल बैठना कैंसर से मृत्यु के 9% अधिक जोखिम से जुड़ा था, और यदि यह निष्क्रियता लगातार लंबी अवधियों में जमा होती तो खतरा और बढ़ जाता। इसके विपरीत, जिन लोगों ने बैठने के बीच थोड़ी-थोड़ी देर की हलचल को शामिल किया, उनमें जोखिम कम पाया गया। यहां तक कि एक घंटे के लगातार बैठने को हल्की शारीरिक गतिविधि से बदलने पर कैंसर मृत्यु का जोखिम 12% तक कम होने का अनुमान लगाया गया।
इसी तरह का एक सकारात्मक संकेत धूम्रपान छोड़ने के प्रयासों में भी मिला है। यूनिवर्सिटी ऑफ एडिलेड के एक मेटा-विश्लेषण ने 59 यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों और 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के आंकड़ों की समीक्षा कर यह निष्कर्ष निकाला कि नियमित व्यायाम करने वालों में स्थायी रूप से धूम्रपान छोड़ने की संभावना 15% अधिक रही, और सात दिन तक सिगरेट न पीने की संभावना 21% अधिक पाई गई। एक बार का व्यायाम सत्र भी लगभग 30 मिनट तक सिगरेट की तलब को कम करने में कारगर रहा। जर्नल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस में प्रकाशित यह अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि व्यायाम परामर्श और दवा का विकल्प नहीं, बल्कि एक सुलभ और कम लागत वाला पूरक उपाय है।
हृदय रोगों के क्षेत्र में भी नए आंकड़ों ने छिपे जोखिमों की ओर ध्यान खींचा है। यूरोपियन एथेरोस्क्लेरोसिस सोसायटी की कांग्रेस में प्रस्तुत वैश्विक पोसाइडन अध्ययन में 18 देशों के 18,904 रोगियों को शामिल किया गया, जिसमें एशिया प्रशांत क्षेत्र भी शामिल था। इसमें पाया गया कि एथेरोस्क्लेरोटिक हृदय रोग और क्रोनिक किडनी रोग से पीड़ित लगभग 40% रोगियों में मानक चिकित्सा के बावजूद हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन (hsCRP) द्वारा मापी गई सूजन बनी रहती है, जो दिल के दौरे और स्ट्रोक का एक सतत जोखिम कारक है। दूसरी ओर, प्रीडायबिटीज से सामान्य शुगर स्तर पर लौटने वालों पर एक अध्ययन ने दिखाया कि ऐसे लोगों में हृदय रोग से मृत्यु या हार्ट फेलियर के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 58% कम हो जाता है, और यह लाभ दशकों तक बना रहता है।
हालांकि, जागरूकता को व्यवहार में बदलना एक चुनौती बना हुआ है। द लैंसेट में प्रकाशित एक समीक्षा ने आठ देशों में डिमेंशिया रोकथाम के लिए चलाए गए जन स्वास्थ्य अभियानों का विश्लेषण किया और पाया कि केवल जानकारी देने से आदतों में सार्थक बदलाव नहीं आता। विशेषज्ञ अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि छोटे, व्यावहारिक कदम—जैसे बैठने के बीच उठकर चलना, सीढ़ियां चढ़ना या कुछ मिनट का व्यायाम—को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने के लिए संरचनात्मक सहयोग की आवश्यकता है। अगला वैज्ञानिक पड़ाव इन निष्कर्षों को वास्तविक दुनिया के कार्यक्रमों में परखने वाले क्लिनिकल परीक्षण होंगे, ताकि व्यक्तिगत स्तर पर जोखिम घटाने की रणनीतियां विकसित की जा सकें।
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91,000 से अधिक लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि बैठने के हर अतिरिक्त घंटे से कैंसर से मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन छोटी-छोटी गतिविधि विराम इसकी भरपाई कर सकते हैं। निष्कर्ष बताते हैं कि बैठने का समय कैसे जमा होता है, यह कुल समय से अधिक मायने रखता है। विशेषज्ञ दिन भर में हल्की हलचल शामिल करने की सलाह देते हैं।
एक नए अध्ययन ने चेतावनी दी है कि एक बार में एक घंटे से अधिक बैठने से कैंसर से मरने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। छोटे 'गतिविधि स्नैक्स' भी इस खतरे को कम कर सकते हैं, इसलिए नियमित रूप से उठें और चलें। शोध स्पष्ट करता है कि लगातार आराम करना खतरनाक है और इसे तोड़ना एक सरल, जीवन रक्षक आदत है।
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