
ट्रंप ने अपने हस्ताक्षर वाली 100 डॉलर की नई नोट की तस्वीर साझा की, विवाद गहराया
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहली बार किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर मुद्रा पर डालने की योजना के तहत यह तस्वीर पोस्ट की, जिसे लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर 100 डॉलर के एक नए नमूने की तस्वीर साझा की, जिस पर वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हस्ताक्षर के ऊपर स्वयं ट्रंप के हस्ताक्षर अंकित हैं। यह कदम मार्च में अमेरिकी वित्त विभाग की उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें देश की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर पहली बार किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर कागज़ी मुद्रा पर शामिल करने की योजना बताई गई थी। परंपरागत रूप से अमेरिकी नोटों पर केवल कोषाध्यक्ष और वित्त मंत्री के हस्ताक्षर होते थे, राष्ट्रपति के नहीं। सीएनएन ने वित्त विभाग से पूछा है कि क्या ट्रंप के हस्ताक्षर वाली ये नोटें वर्तमान में छापी जा रही हैं, लेकिन अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिकी प्रशासन ने इस पहल को आर्थिक पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। अमेरिकी कोषाध्यक्ष ब्रैंडन बीच ने मार्च में कहा था कि 'स्वर्ण युग' के वास्तुकार के रूप में ट्रंप की ऐतिहासिक छाप को नकारा नहीं जा सकता और मुद्रा पर उनके हस्ताक्षर न केवल उपयुक्त बल्कि पूरी तरह योग्य भी हैं। कांग्रेस के कुछ सदस्य इससे भी आगे बढ़कर 250 डॉलर के एक स्मारक नोट पर ट्रंप का चित्र लगाने का विधेयक लाए हैं, हालांकि अमेरिकी कानून केवल मृत व्यक्तियों के चित्र को मुद्रा पर अनुमति देता है। इसके विपरीत, ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन जैसे थिंक टैंक के नीति विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मुद्रा जैसे राष्ट्रीय प्रतीक को व्यक्तिगत प्रचार का माध्यम बनाने से वित्तीय संस्थाओं की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगता है और राष्ट्रीय पहचान व व्यक्तिगत छवि के बीच की रेखा धुंधली होती है।
यह विवाद ट्रंप के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत वे सरकारी दस्तावेज़ों और स्थलों पर अपना नाम व छवि अंकित करवा रहे हैं। उनके कार्यकाल में स्मारक पासपोर्ट, राष्ट्रीय उद्यानों के प्रवेश पास, वाशिंगटन स्थित विभिन्न एजेंसियों के बैनर, अमेरिकी शांति संस्थान जैसी सांस्कृतिक संस्थाएं और शिशुओं के लिए विशेष निवेश खातों तक पर ट्रंप का नाम या चित्र लगाया गया। फ्लोरिडा ने पाम बीच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम भी उनके सम्मान में बदल दिया। 250 डॉलर के प्रस्तावित नोट के लिए ब्यूरो ऑफ एनग्रेविंग एंड प्रिंटिंग पहले ही प्रारूप तैयार कर चुका है, परंतु इसे कानूनी मंज़ूरी के लिए सीनेट में डेमोक्रेटिक सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी, जिसकी संभावना फिलहाल कम आंकी जा रही है।
दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य से देखें तो अमेरिकी डॉलर वैश्विक आरक्षित मुद्रा होने के कारण इसके डिज़ाइन में कोई भी बदलाव अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करता है। भारत और पड़ोसी देशों में मुद्रा पर आमतौर पर मरणोपरांत ही राष्ट्रीय नायकों या प्रतीकों को स्थान दिया जाता है, ऐसे में किसी जीवित नेता के हस्ताक्षर या चित्र को शामिल करना संस्थागत मानदंडों से हटकर माना जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि इससे भविष्य में अन्य नेताओं के लिए भी ऐसी मिसाल कायम हो सकती है, हालांकि इसका प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव नगण्य ही रहेगा।
फिलहाल वित्त विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ट्रंप के हस्ताक्षर वाली 100 डॉलर की नोटों की छपाई शुरू हो चुकी है या नहीं। 250 डॉलर के स्मारक नोट का विधेयक कांग्रेस में लंबित है और डेमोक्रेटिक विरोध के चलते इसके पारित होने की राह कठिन है। आने वाले सप्ताहों में इस बहस के और तेज़ होने की उम्मीद है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन संघीय स्तर पर अनेक प्रतीकात्मक सुधारों को आगे बढ़ा रहा है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ
The news is presented as a curious episode of American political communication, without emphasis or condemnation. The symbolic dimension of the act is noted, but framed within ordinary Trumpian administration.
The image of the banknote with Trump's signature is read as a message of economic strength and national sovereignty, but with caution. The possible market reaction and impact on the dollar are highlighted.
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