
अंतिम क्षणों में यूस्टाक्विओ का गोल, कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर रचा इतिहास
स्टीफन यूस्टाक्विओ के इंज्युरी टाइम गोल ने कनाडा को पहली बार पुरुष विश्व कप के अंतिम-16 में पहुंचाया, जबकि दक्षिण अफ्रीका की ऐतिहासिक यात्रा का अंत हुआ।
लॉस एंजिल्स स्टेडियम में रविवार रात 92वें मिनट तक स्कोरबोर्ड जड़ था, फिर स्टीफन यूस्टाक्विओ ने छाती से गेंद को नियंत्रित कर एक सटीक शॉट कोने में पहुंचा दिया। इस एक पल ने कनाडा को 1-0 से जीत दिलाकर पुरुष फीफा विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में पहली बार प्रवेश कराया, और दक्षिण अफ्रीका की पहली नॉकआउट उपस्थिति का अंत कर दिया।
दक्षिण अफ्रीका ने पूरे 90 मिनट कनाडाई आक्रमण को रोके रखा था। गोलकीपर रोनवेन विलियम्स ने पांच बचाव किए, लेकिन टीम आक्रमण में धार खोजती रही। बाफाना बाफाना के पास 58 प्रतिशत गेंद-नियंत्रण रहा, फिर भी केवल छह शॉट लगा सके, जबकि कनाडा ने 12 प्रयास किए। कप्तान विलियम्स ने बाद में स्वीकार किया, “हमें और क्लिनिकल होना होगा—इस स्तर पर जो मौके मिलें, उन्हें भुनाना ज़रूरी है।” कोच ह्यूगो ब्रूस ने हार को “दर्दनाक” बताया, लेकिन कहा कि तीसरे दौर में पहुंचना “एक छोटा चमत्कार” होता और टीम ने उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन किया। दक्षिण अफ्रीका ने ग्रुप ए में मेक्सिको से 0-2 हार, चेक गणराज्य से 1-1 ड्रॉ और दक्षिण कोरिया पर 1-0 की जीत के साथ चार अंक लेकर इतिहास रचा था।
कनाडा के लिए यह जीत प्रवासी सपनों की कहानी भी है। ओंटारियो के लीमिंगटन में जन्मे यूस्टाक्विओ के माता-पिता पुर्तगाल से आकर बसे थे। सात साल की उम्र में फुटबॉल प्रशिक्षण के लिए परिवार पुर्तगाल लौटा, लेकिन 2019 में उन्होंने कनाडा का प्रतिनिधित्व चुना। उनके पैतृक शहर के स्कूल प्रिंसिपल ने बताया कि यूस्टाक्विओ ने विश्व कप से पहले स्कूल को समर्थन का वीडियो संदेश भेजा था। लीमिंगटन माइनर सॉकर लीग के अध्यक्ष टोनी ओमर ने याद किया कि चार साल की उम्र में ही वह मैदान पर गेंद से खेलते दिखते थे। पुर्तगाली अखबार ‘अ बोला’ ने यूस्टाक्विओ को 10 में से 8 अंक देते हुए “लूसो-कनाडाई” खिलाड़ी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया।
कनाडा अब चार जुलाई को मोरक्को और नीदरलैंड के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से भिड़ेगा। दक्षिण अफ्रीकी मीडिया ने टीम की सतर्क रणनीति पर सवाल उठाए, जबकि ब्रिटिश पॉडकास्ट ‘वर्ल्ड कप डेली’ ने कहा कि कनाडा ही एकमात्र टीम थी जो जीतने की कोशिश कर रही थी। कोच ब्रूस ने स्वीकार किया कि एक-पर-एक द्वंद्वों में उनकी टीम लगभग हर बार पिछड़ी, लेकिन मानसिकता पर कोई शिकायत नहीं की।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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कनाडा ने विश्व कप में एक ऐतिहासिक पल पर कब्जा कर लिया जब स्टीफन यूस्टाक्विओ के अतिरिक्त समय के गोल ने दक्षिण अफ्रीका की प्रतिरोधकता को तोड़ दिया। यह कहानी कनाडाई फुटबॉल के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित सफलता का जश्न मनाती है, जो खिलाड़ी की ओंटारियो के एक छोटे से शहर से राष्ट्रीय नायक बनने तक की यात्रा को दर्शाती है। इस जीत को वैश्विक मंच पर कनाडा के आगमन का प्रतीक माना जा रहा है।
दक्षिण अफ्रीका के कप्तान ने विश्व कप से बाहर होने का कारण आक्रमण में धार की कमी को बताया, और अंतिम क्षणों में गोल से तय हुए मैच में चूके हुए मौकों पर अफसोस जताया। पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचने की ऐतिहासिक उपलब्धि के बावजूद, माहौल निराशा और 'क्या हो सकता था' की भावना का है। अभियान का मूल्यांकन टीम की गोल करने की कठिनाइयों पर आलोचनात्मक नज़र से किया जा रहा है।
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