
म्यांमार में पांच साल में एक लाख से अधिक मौतें, नाइजीरिया में 79,323 नागरिक हताहत: नई रिपोर्ट
अमेरिकी संघर्ष निगरानी संस्था एक्लेड और धार्मिक स्वतंत्रता वेधशाला ओआरएफए के ताजा आंकड़े एशिया और अफ्रीका के दो सबसे घातक संघर्षों की भयावहता उजागर करते हैं।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देश म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद शुरू हुए गृह युद्ध में अब तक कम से कम 1,00,114 लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिकी गैर-सरकारी संगठन एक्लेड (आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा) के अनुसार, यह संख्या मीडिया में रिपोर्ट की गई घटनाओं पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक, 37 लाख से अधिक लोग देश के भीतर ही विस्थापित हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि 2025 में 7,000 से अधिक नागरिक मारे गए, जो तख्तापलट के बाद का सर्वाधिक वार्षिक आंकड़ा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, 2024 की तुलना में 2025 में हवाई हमलों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जिनमें स्कूल, अस्पताल और आबादी वाले इलाके निशाना बने।
पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजीरिया में धार्मिक स्वतंत्रता वेधशाला (ओआरएफए) की छह वर्षों की जांच ने हिंसा के पारंपरिक आख्यान को चुनौती दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच आतंकवाद-संबंधी हिंसा में 79,323 लोग मारे गए और 34,773 नागरिकों का अपहरण किया गया। इनमें से 42,033 मौतें आम नागरिकों की थीं। ओआरएफए ने पाया कि बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (आईएसडब्ल्यूएपी) को अक्सर मुख्य दोषी माना जाता है, लेकिन इन समूहों ने कुल नागरिक हत्याओं का केवल 12 प्रतिशत (बोको हराम 8 प्रतिशत, आईएसडब्ल्यूएपी 4 प्रतिशत) अंजाम दिया। इसके विपरीत, ‘फुलानी आतंकी समूह’ के रूप में वर्गीकृत सशस्त्र गुटों ने 44 प्रतिशत नागरिकों (18,577) की हत्या की, जो बोको हराम और आईएसडब्ल्यूएपी की संयुक्त हत्याओं का चार गुना है।
दोनों संघर्षों में नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव की प्रकृति भिन्न है। म्यांमार में सैन्य जुंटा और प्रतिरोधी बलों के बीच लड़ाई में हवाई बमबारी, जबरन श्रम, साइबर धोखाधड़ी केंद्रों में मानव तस्करी और हिरासत में यातना से मौतें दर्ज की गई हैं। वहीं, नाइजीरिया में ओआरएफए ने ‘पंथ द्वारा बंदी’ नामक एक पैटर्न की पहचान की, जिसमें ईसाई बंधकों से अधिक फिरौती मांगी जाती है, उनके साथ अधिक हिंसा होती है और फिरौती चुकाने के बाद भी उनकी हत्या का जोखिम अधिक रहता है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित राज्यों में ईसाइयों की हत्या की दर मुसलमानों की तुलना में 4.4 गुना अधिक थी।
दोनों देशों में मानवीय संकट गहरा रहा है। म्यांमार में अमेरिकी विदेशी सहायता में कटौती के कारण शरणार्थी शिविरों में अस्पताल बंद हो गए हैं और थाईलैंड सीमा पर भोजन व स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव बढ़ा है। नाइजीरिया में गैर-हिरासत दंड सेवा के तहत 1,271 अपराधी सामुदायिक सेवा, पैरोल और प्रोबेशन जैसे विकल्पों पर हैं, जो जेलों में भीड़ कम करने का प्रयास है, लेकिन हिंसा का दायरा लगातार बढ़ रहा है। विश्लेषक म्यांमार संघर्ष को एशिया का सबसे घातक सक्रिय संघर्ष मानते हैं, जबकि ओआरएफए का आकलन है कि नाइजीरिया में एक ऐसा आतंकी नेटवर्क पनप रहा है जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अभी तक स्वीकार नहीं किया है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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म्यांमार में 2021 के तख्तापलट के बाद शुरू हुए गृह युद्ध में 100,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। संघर्ष एक हज़ार से अधिक सशस्त्र समूहों में बंट गया है, और नागरिकों के खिलाफ व्यापक अत्याचार हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस गहराती मानवीय तबाही पर ध्यान देने का आग्रह किया गया है।
एक छह वर्षीय जांच से पता चला है कि 2020 से 2025 के बीच नाइजीरिया में आतंकवाद से जुड़ी हिंसा में 79,323 लोग मारे गए और 34,773 का अपहरण किया गया। रिपोर्ट 'बोको हराम' के सरलीकृत लेबल को चुनौती देती है और तर्क देती है कि दुनिया नाइजीरिया की जटिल हिंसा को गलत समझती है। यह धार्मिक और जातीय आयामों की अधिक सूक्ष्म समझ की मांग करती है।
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