
पढ़ने से दिमाग पर व्यायाम और नींद से ज्यादा असर: नए शोध में खुलासा
मैक्स प्लांक संस्थान के अनुसार साक्षरता स्मृति, ध्यान और तर्क को मजबूत करती है, जबकि छोटे वीडियो किशोर मस्तिष्क को तत्काल संतुष्टि का आदी बना रहे हैं।
जर्मनी के मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर साइकोलिंग्विस्टिक्स के एक समीक्षा अध्ययन में सामने आया है कि पढ़ने-लिखने की क्षमता मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को व्यायाम, नींद या कैफीन से कहीं अधिक मजबूत करती है। शोधकर्ता फॉक ह्यूटिग के अनुसार, साक्षरता केवल पाठ समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्मृति, ध्यान, भाषा प्रसंस्करण, तर्क और चेहरे की पहचान जैसी मानसिक क्षमताओं को पुनर्गठित करती है। यह निष्कर्ष मनोविज्ञान, तंत्रिका विज्ञान और शिक्षा के कई अध्ययनों के विश्लेषण पर आधारित है, जो बताते हैं कि जटिल पाठों का नियमित अभ्यास जीवनभर संज्ञानात्मक लाभ देता रहता है।
मस्तिष्क की इस लचीलेपन की झलक सामाजिक तालमेल और संगीत के प्रभावों में भी मिलती है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और गेंट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने लगभग एक दशक तक हज़ारों लोगों के पोर्टेबल ईईजी डेटा का अध्ययन किया और पाया कि आमने-सामने बातचीत के दौरान व्यक्तियों की मस्तिष्क तरंगें समकालिक हो सकती हैं। यह 'सामाजिक समकालिकता' बेहतर संबंधों और सीखने की प्रक्रिया से जुड़ी पाई गई। वहीं, किशोरावस्था में सुना गया संगीत मस्तिष्क के इनाम तंत्र और स्मृति से गहराई से जुड़ जाता है, जिसे वैज्ञानिक 'रेमिनिसेंस बंप' कहते हैं—10 से 30 वर्ष की आयु के बीच बनी यादें सबसे स्थायी होती हैं और संगीत उन्हें तुरंत ताज़ा कर सकता है।
इसके विपरीत, मेक्सिको की राष्ट्रीय स्वायत्त विश्वविद्यालय (यूएनएएम) के शोधकर्ताओं ने चेताया है कि टिकटॉक जैसे प्लेटफ़ॉर्म के अत्यंत छोटे वीडियो किशोर मस्तिष्क को तत्काल संतुष्टि का आदी बना रहे हैं। किशोरावस्था में प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पूरी तरह विकसित नहीं होता, जबकि इनाम प्रणाली अधिक सक्रिय रहती है। लगातार नोटिफिकेशन और नवीनता का दबाव संज्ञानात्मक थकान पैदा करता है, जिससे ध्यान अवधि वर्ष 2003 के 150 सेकंड से घटकर अब 47 सेकंड रह गई है। अध्ययन बताते हैं कि स्मार्टफोन की मौजूदगी मात्र से संज्ञानात्मक क्षमता घट सकती है, क्योंकि मस्तिष्क का एक हिस्सा उसे जाँचने के प्रलोभन को रोकने में लगा रहता है।
भारतीय और दक्षिण एशियाई संदर्भ में, जहाँ युवाओं में स्मार्टफोन की पहुँच तेज़ी से बढ़ रही है, यह चेतावनी महत्वपूर्ण है। साथ ही, आहार भी संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है—अखरोट और बेरीज़ जैसे खाद्य पदार्थ ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से मस्तिष्क की कार्यक्षमता को सहारा देते हैं। फिर भी, शोधकर्ता इस बात पर ज़ोर देते हैं कि गहन पठन, आमने-सामने की बातचीत और संगीत जैसी गतिविधियाँ ही दीर्घकालिक संज्ञानात्मक भंडार बनाती हैं, जबकि निष्क्रिय लघु-सामग्री का अत्यधिक उपभोग इसे क्षीण कर सकता है।
अगला ठोस कदम अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग की एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी फॉर हेल्थ (एआरपीए-एच) द्वारा स्वीकृत 4 मिलियन डॉलर की परियोजना है, जिसके तहत सामाजिक समकालिकता को चिकित्सीय संदर्भों में परखा जाएगा। साथ ही, मैक्स प्लांक के शोधकर्ताओं ने साक्षरता स्तर में गिरावट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर आगाह किया है, जिससे संज्ञानात्मक क्षमताओं पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Reading produces deeper changes in the brain than physical exercise or a good night's sleep, according to a new study. Literacy strengthens memory, attention, reasoning and language processing with an impact that surpasses other habits commonly associated with mental performance. The findings reframe reading as a fundamental pillar of long-term cognitive health.
New research suggests that reading can synchronize brain activity in ways comparable to direct social interaction. The study indicates that literacy not only enhances individual cognitive functions but may also foster a measurable neural alignment between people. This opens perspectives for therapeutic applications and for strengthening social cohesion through shared reading practices.
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