Edition of 20:00 CETसोमवार, 29 जून 2026
311 स्रोत · 17 भाषाएँआज 108 ब्रीफिंग
ताज़ा खबर
एलिसी पैलेस में धूप के चश्मे और सुल्तान: मैक्रों की आँखों के पीछे छिपी कहानीहवाई कार्गो मांग में 6% वृद्धि, लेकिन मध्य पूर्व में गिरावट; लैटिन अमेरिकी निर्यात रिकॉर्ड परनायब बुकेले ने तीसरे कार्यकाल के लिए पूर्व-उम्मीदवारी दर्ज की, 2033 तक सत्ता में रहने का मार्ग प्रशस्तनाटो शिखर सम्मेलन से पहले तुर्की ने यूरोपीय रक्षा ढांचे में शामिल होने की मांग कीडेवी चेस: 'द रिंग' की समारा और 'लिलो एंड स्टिच' की आवाज़ का दुखद अंतइराक ने ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों को 30 सितंबर तक हथियार सौंपने की समय-सीमा दीगोलरहित ड्रॉ के बाद पुर्तगाल अंतिम-16 में, रोनाल्डो की मां का भावुक संदेश और जॉर्जीना की समुद्र तट पर चमकलुइगी मैंगियोन का संघीय मुकदमा जनवरी 2026 तक स्थगित, राज्य स्तरीय सुनवाई सितंबर में यथावतएलिसी पैलेस में धूप के चश्मे और सुल्तान: मैक्रों की आँखों के पीछे छिपी कहानीहवाई कार्गो मांग में 6% वृद्धि, लेकिन मध्य पूर्व में गिरावट; लैटिन अमेरिकी निर्यात रिकॉर्ड परनायब बुकेले ने तीसरे कार्यकाल के लिए पूर्व-उम्मीदवारी दर्ज की, 2033 तक सत्ता में रहने का मार्ग प्रशस्तनाटो शिखर सम्मेलन से पहले तुर्की ने यूरोपीय रक्षा ढांचे में शामिल होने की मांग कीडेवी चेस: 'द रिंग' की समारा और 'लिलो एंड स्टिच' की आवाज़ का दुखद अंतइराक ने ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों को 30 सितंबर तक हथियार सौंपने की समय-सीमा दीगोलरहित ड्रॉ के बाद पुर्तगाल अंतिम-16 में, रोनाल्डो की मां का भावुक संदेश और जॉर्जीना की समुद्र तट पर चमकलुइगी मैंगियोन का संघीय मुकदमा जनवरी 2026 तक स्थगित, राज्य स्तरीय सुनवाई सितंबर में यथावत
विज्ञान और स्वास्थ्यसोमवार, 29 जून 2026

तनाव की चुपचाप बढ़ती लहर: कैसे रोज़मर्रा की आदतें दिमाग़ और शरीर को नुकसान पहुँचा रही हैं

अर्जेंटीना में 49% वयस्क खुद को तनावग्रस्त मानते हैं, और वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि सुबह फ़ोन चेक करने से लेकर लगातार माफ़ी माँगने तक की छोटी आदतें क्रॉनिक स्ट्रेस को जन्म देकर दिल की बीमारी, याददाश्त की कमज़ोरी और रिश्तों में दरार का कारण बन रही हैं।

दुनिया भर में तनाव अब सिर्फ़ एक मनोवैज्ञानिक परेशानी नहीं, बल्कि दिल की बीमारी के बराबर एक जोखिम कारक बन चुका है। अर्जेंटीना के हृदय रोग विशेषज्ञ मारियो बोस्किस के अनुसार, क्रॉनिक स्ट्रेस से लगातार कॉर्टिसोल हार्मोन रिसता है, जो रक्तचाप बढ़ाता है, शुगर लेवल बिगाड़ता है और धमनियों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुँचाकर हार्ट अटैक का ख़तरा लगभग दोगुना कर देता है। यह प्रक्रिया इतनी ख़ामोश होती है कि व्यक्ति को पता ही नहीं चलता—अक्सर परिवार वाले या डॉक्टर पहले पहचानते हैं।

यह जैविक तंत्र रोज़मर्रा की उन आदतों से शुरू होता है जिन्हें हम मामूली समझते हैं। ईरानी और इंडोनेशियाई मीडिया में प्रकाशित मनोवैज्ञानिक विश्लेषण बताते हैं कि सुबह उठते ही फ़ोन चेक करना दिमाग़ को रिएक्टिव मोड में डाल देता है, जिससे ध्यान भटकता है और चिंता बढ़ती है। इसी तरह, बार-बार माफ़ी माँगना, हर छोटी बात पर गुस्सा आना, या बिना सोचे-समझे साँस रोक लेना—ये सब नर्वस सिस्टम के हाइपर-अलर्ट रहने के संकेत हैं। रूसी चिकित्सक डेविड वाइनस्टीन ने चेतावनी दी है कि सुबह खाली पेट कॉफ़ी पीने से हल्का डिहाइड्रेशन और सिरदर्द होता है, जबकि नाश्ता छोड़ने से दिनभर ज़्यादा खाने की संभावना बनती है।

इस तनाव का असर सिर्फ़ शरीर पर नहीं, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता और रिश्तों पर भी पड़ता है। भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नेहा पंडिता के हवाले से बताया गया है कि लगातार तनाव हिप्पोकैम्पस को प्रभावित करता है, जो सीखने और याददाश्त का केंद्र है। नतीजा, 20-30 साल के युवाओं में ‘ब्रेन फ़ॉग’ यानी ध्यान लगाने में दिक्कत और भूलने की शिकायतें बढ़ रही हैं, हालाँकि यह ज़रूरी नहीं कि यह समय से पहले बुढ़ापे का संकेत हो। स्पेन के नींद विशेषज्ञ अल्फ़्रेदो रोद्रिगेज़-मुन्योज़ के अनुसार, हमने एक ऐसा समाज बना लिया है जो जागने को पुरस्कृत करता है और आराम को शक की निगाह से देखता है। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल दिमाग़ को यह संकेत देता है कि दिन ख़त्म नहीं हुआ, जिससे मेलाटोनिन बनने में देरी होती है और नींद की गुणवत्ता गिरती है।

इस सबके बीच, समाधान की दिशा भी साफ़ हो रही है। अर्जेंटीना के ही कार्डियोलॉजिस्ट डेनियल लोपेज़ रोसेट्टी ज़ोर देते हैं कि तनाव से निपटने के लिए दवा से ज़्यादा जीवन-दर्शन की ज़रूरत है—एक स्टोइक नज़रिया जो रोज़मर्रा की निराशाओं को फ़िल्टर करना सिखाता है। वे कहते हैं, “दिन मछली पकड़ने की डोर है जिसमें कई काँटे लगे हैं; तनावग्रस्त व्यक्ति उन काँटों को निगलने में माहिर होता है, जबकि तनाव को मैनेज करने वाला उनसे बचता है।” विशेषज्ञ सुबह 20-30 मिनट बिना फ़ोन के बिताने, नियमित व्यायाम (हफ़्ते में 150 मिनट) और सोने-जागने का समय तय करने की सलाह देते हैं। अगला क़दम यह देखना है कि कैसे ‘कैल्म टेक्नोलॉजी’—जो बिना नोटिफिकेशन के कमरे की रोशनी और तापमान को अपने आप नियंत्रित करती है—इस तनाव को कम करने में मदद कर सकती है, बशर्ते हम पहले अपनी आदतों पर लगाम लगाएँ।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

47%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
चेतावनीसंरक्षणवाद

लगातार फ़ोन चेक करना और डिजिटल डूबना केवल आदतें नहीं, बल्कि गहरी चिंता के लक्षण हैं। यह व्यवहार, अक्सर असहजता से बचने का रास्ता, तनाव को और बढ़ाता है और आंतरिक शांति को भंग करता है। विशेषज्ञ अत्यधिक स्क्रीन उपयोग को बढ़े हुए कोर्टिसोल से जोड़ते हैं, जो वैश्विक स्वास्थ्य को चुपचाप नष्ट कर रहा है।

लैटिन अमेरिकी प्रेस/ बाज़ार
चेतावनीव्यावहारिकता

हाइपरकनेक्टिविटी से प्रेरित दीर्घकालिक तनाव, कोर्टिसोल रिलीज को ट्रिगर करता है जिसके गंभीर हृदय संबंधी परिणाम होते हैं, संभावित रूप से दिल के दौरे का खतरा दोगुना हो जाता है। प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ दैनिक निराशाओं के प्रति एक स्टोइक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करते हैं, इस बात पर जोर देते हुए कि अपनी आंतरिक प्रतिक्रिया को प्रबंधित करना दीर्घायु की कुंजी है। इस बीच, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि नींद के बारे में अधिक जानने के बावजूद, आधुनिक जीवन आराम को तेजी से मायावी बना रहा है।

अपना नज़रिया बढ़ाएँ

और पढ़ें
अंतिम समाचार
एलिसी पैलेस में धूप के चश्मे और सुल्तान: मैक्रों की आँखों के पीछे छिपी कहानी·हवाई कार्गो मांग में 6% वृद्धि, लेकिन मध्य पूर्व में गिरावट; लैटिन अमेरिकी निर्यात रिकॉर्ड पर·नायब बुकेले ने तीसरे कार्यकाल के लिए पूर्व-उम्मीदवारी दर्ज की, 2033 तक सत्ता में रहने का मार्ग प्रशस्त·नाटो शिखर सम्मेलन से पहले तुर्की ने यूरोपीय रक्षा ढांचे में शामिल होने की मांग की·डेवी चेस: 'द रिंग' की समारा और 'लिलो एंड स्टिच' की आवाज़ का दुखद अंत·इराक ने ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों को 30 सितंबर तक हथियार सौंपने की समय-सीमा दी·गोलरहित ड्रॉ के बाद पुर्तगाल अंतिम-16 में, रोनाल्डो की मां का भावुक संदेश और जॉर्जीना की समुद्र तट पर चमक·लुइगी मैंगियोन का संघीय मुकदमा जनवरी 2026 तक स्थगित, राज्य स्तरीय सुनवाई सितंबर में यथावत·एलिसी पैलेस में धूप के चश्मे और सुल्तान: मैक्रों की आँखों के पीछे छिपी कहानी·हवाई कार्गो मांग में 6% वृद्धि, लेकिन मध्य पूर्व में गिरावट; लैटिन अमेरिकी निर्यात रिकॉर्ड पर·नायब बुकेले ने तीसरे कार्यकाल के लिए पूर्व-उम्मीदवारी दर्ज की, 2033 तक सत्ता में रहने का मार्ग प्रशस्त·नाटो शिखर सम्मेलन से पहले तुर्की ने यूरोपीय रक्षा ढांचे में शामिल होने की मांग की·डेवी चेस: 'द रिंग' की समारा और 'लिलो एंड स्टिच' की आवाज़ का दुखद अंत·इराक ने ईरान समर्थित सशस्त्र गुटों को 30 सितंबर तक हथियार सौंपने की समय-सीमा दी·गोलरहित ड्रॉ के बाद पुर्तगाल अंतिम-16 में, रोनाल्डो की मां का भावुक संदेश और जॉर्जीना की समुद्र तट पर चमक·लुइगी मैंगियोन का संघीय मुकदमा जनवरी 2026 तक स्थगित, राज्य स्तरीय सुनवाई सितंबर में यथावत·
अपडेट 01:25 pm2 भाषाएँ · 3 स्रोत
पिछलाविज्ञान और स्वास्थ्यअगला
3 स्रोत|2 भाषाएँ|3 मिनट पढ़ना
सोमवार, 29 जून 2026

तनाव की चुपचाप बढ़ती लहर: कैसे रोज़मर्रा की आदतें दिमाग़ और शरीर को नुकसान पहुँचा रही हैं

अर्जेंटीना में 49% वयस्क खुद को तनावग्रस्त मानते हैं, और वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि सुबह फ़ोन चेक करने से लेकर लगातार माफ़ी माँगने तक की छोटी आदतें क्रॉनिक स्ट्रेस को जन्म देकर दिल की बीमारी, याददाश्त की कमज़ोरी और रिश्तों में दरार का कारण बन रही हैं।

दुनिया भर में तनाव अब सिर्फ़ एक मनोवैज्ञानिक परेशानी नहीं, बल्कि दिल की बीमारी के बराबर एक जोखिम कारक बन चुका है। अर्जेंटीना के हृदय रोग विशेषज्ञ मारियो बोस्किस के अनुसार, क्रॉनिक स्ट्रेस से लगातार कॉर्टिसोल हार्मोन रिसता है, जो रक्तचाप बढ़ाता है, शुगर लेवल बिगाड़ता है और धमनियों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुँचाकर हार्ट अटैक का ख़तरा लगभग दोगुना कर देता है। यह प्रक्रिया इतनी ख़ामोश होती है कि व्यक्ति को पता ही नहीं चलता—अक्सर परिवार वाले या डॉक्टर पहले पहचानते हैं।

यह जैविक तंत्र रोज़मर्रा की उन आदतों से शुरू होता है जिन्हें हम मामूली समझते हैं। ईरानी और इंडोनेशियाई मीडिया में प्रकाशित मनोवैज्ञानिक विश्लेषण बताते हैं कि सुबह उठते ही फ़ोन चेक करना दिमाग़ को रिएक्टिव मोड में डाल देता है, जिससे ध्यान भटकता है और चिंता बढ़ती है। इसी तरह, बार-बार माफ़ी माँगना, हर छोटी बात पर गुस्सा आना, या बिना सोचे-समझे साँस रोक लेना—ये सब नर्वस सिस्टम के हाइपर-अलर्ट रहने के संकेत हैं। रूसी चिकित्सक डेविड वाइनस्टीन ने चेतावनी दी है कि सुबह खाली पेट कॉफ़ी पीने से हल्का डिहाइड्रेशन और सिरदर्द होता है, जबकि नाश्ता छोड़ने से दिनभर ज़्यादा खाने की संभावना बनती है।

इस तनाव का असर सिर्फ़ शरीर पर नहीं, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता और रिश्तों पर भी पड़ता है। भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नेहा पंडिता के हवाले से बताया गया है कि लगातार तनाव हिप्पोकैम्पस को प्रभावित करता है, जो सीखने और याददाश्त का केंद्र है। नतीजा, 20-30 साल के युवाओं में ‘ब्रेन फ़ॉग’ यानी ध्यान लगाने में दिक्कत और भूलने की शिकायतें बढ़ रही हैं, हालाँकि यह ज़रूरी नहीं कि यह समय से पहले बुढ़ापे का संकेत हो। स्पेन के नींद विशेषज्ञ अल्फ़्रेदो रोद्रिगेज़-मुन्योज़ के अनुसार, हमने एक ऐसा समाज बना लिया है जो जागने को पुरस्कृत करता है और आराम को शक की निगाह से देखता है। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल दिमाग़ को यह संकेत देता है कि दिन ख़त्म नहीं हुआ, जिससे मेलाटोनिन बनने में देरी होती है और नींद की गुणवत्ता गिरती है।

इस सबके बीच, समाधान की दिशा भी साफ़ हो रही है। अर्जेंटीना के ही कार्डियोलॉजिस्ट डेनियल लोपेज़ रोसेट्टी ज़ोर देते हैं कि तनाव से निपटने के लिए दवा से ज़्यादा जीवन-दर्शन की ज़रूरत है—एक स्टोइक नज़रिया जो रोज़मर्रा की निराशाओं को फ़िल्टर करना सिखाता है। वे कहते हैं, “दिन मछली पकड़ने की डोर है जिसमें कई काँटे लगे हैं; तनावग्रस्त व्यक्ति उन काँटों को निगलने में माहिर होता है, जबकि तनाव को मैनेज करने वाला उनसे बचता है।” विशेषज्ञ सुबह 20-30 मिनट बिना फ़ोन के बिताने, नियमित व्यायाम (हफ़्ते में 150 मिनट) और सोने-जागने का समय तय करने की सलाह देते हैं। अगला क़दम यह देखना है कि कैसे ‘कैल्म टेक्नोलॉजी’—जो बिना नोटिफिकेशन के कमरे की रोशनी और तापमान को अपने आप नियंत्रित करती है—इस तनाव को कम करने में मदद कर सकती है, बशर्ते हम पहले अपनी आदतों पर लगाम लगाएँ।

स्रोतों में मतभेद

विज्ञान और स्वास्थ्य · 3 स्रोत · 2 भाषाएँ

47%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र63%
निंदक37%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
चेतावनीसंरक्षणवाद

लगातार फ़ोन चेक करना और डिजिटल डूबना केवल आदतें नहीं, बल्कि गहरी चिंता के लक्षण हैं। यह व्यवहार, अक्सर असहजता से बचने का रास्ता, तनाव को और बढ़ाता है और आंतरिक शांति को भंग करता है। विशेषज्ञ अत्यधिक स्क्रीन उपयोग को बढ़े हुए कोर्टिसोल से जोड़ते हैं, जो वैश्विक स्वास्थ्य को चुपचाप नष्ट कर रहा है।

लैटिन अमेरिकी प्रेस/ बाज़ार
चेतावनीव्यावहारिकता

हाइपरकनेक्टिविटी से प्रेरित दीर्घकालिक तनाव, कोर्टिसोल रिलीज को ट्रिगर करता है जिसके गंभीर हृदय संबंधी परिणाम होते हैं, संभावित रूप से दिल के दौरे का खतरा दोगुना हो जाता है। प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ दैनिक निराशाओं के प्रति एक स्टोइक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करते हैं, इस बात पर जोर देते हुए कि अपनी आंतरिक प्रतिक्रिया को प्रबंधित करना दीर्घायु की कुंजी है। इस बीच, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि नींद के बारे में अधिक जानने के बावजूद, आधुनिक जीवन आराम को तेजी से मायावी बना रहा है।

यह समाचार यहाँ छपा

3 स्रोत · 2 भाषाएँ

अपना नज़रिया बढ़ाएँ

Geopolitics & Politics से

ट्रंप का दोहा बैठक का दावा, ईरान का इनकार: हॉर्मुज तनाव के बीच वार्ता पर असमंजस

9 भाषाएँ · 40 स्रोत

Economy & Markets से

यूरोपीय संघ और चीन के बीच व्यापार असंतुलन पर तीन महीने की बातचीत, अक्टूबर तक 'ठोस नतीजों' की समयसीमा

8 भाषाएँ · 15 स्रोत

Technology से

व्हाट्सएप का बड़ा बदलाव: अब बिना नंबर बताए चैट करें, यूजरनेम आरक्षण शुरू

7 भाषाएँ · 28 स्रोत

और पढ़ें