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समाज और संस्कृतिसोमवार, 29 जून 2026

एलिसी पैलेस में धूप के चश्मे और सुल्तान: मैक्रों की आँखों के पीछे छिपी कहानी

फ्रांस के राष्ट्रपति के एविएटर सनग्लासेज़ एक बार फिर कूटनीतिक मुलाकात के केंद्र में आ गए, जहाँ शिष्टाचार, स्वास्थ्य और सोशल मीडिया की तीखी नज़रें एक साथ मिल गईं।

पेरिस के एलिसी पैलेस के प्रांगण में ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के स्वागत की तस्वीरों में एक चमकीला विवरण बार-बार आँखों को अपनी ओर खींच रहा था। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, एक सधे हुए गहरे सूट में, अपनी आँखों पर वही गहरे रंग का एविएटर चश्मा लगाए खड़े थे जो पिछले कुछ महीनों में फ्रांसीसी राजनीति का एक अनपेक्षित प्रतीक बन चुका है। दोनों नेताओं के बीच ओरमुज जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा और मध्य-पूर्व में तनाव कम करने जैसे गंभीर मुद्दों पर बातचीत होनी थी, लेकिन कैमरों की निगाहें बार-बार उन दो शीशों पर टिक जाती थीं जिनके पीछे राष्ट्रपति की आँखें छिपी थीं।

यह पहली बार नहीं था जब मैक्रों के चश्मे ने कूटनीतिक प्रोटोकॉल को पीछे छोड़ दिया हो। जनवरी में दावोस के विश्व आर्थिक मंच पर भी वे इसी तरह नज़र आए थे, और तब उनके कार्यालय ने स्पष्टीकरण दिया था कि आँख की एक रक्त-वाहिका फटने के कारण हुए धब्बे को छिपाने के लिए ऐसा किया गया। इस बार भी ले फिगारो के अनुसार राष्ट्रपति के करीबी सूत्रों ने 'आँख की समस्या' का हवाला दिया, बिना कोई और विस्तार दिए। लेकिन सोशल मीडिया पर यह स्पष्टीकरण एक हाशिये की कहानी बनकर रह गया, क्योंकि वहाँ एक पुरानी और कहीं अधिक रोचक अटकलें पहले से हवा में तैर रही थीं।

यह अटकलें एक टेलीविज़न क्लिप से जन्मी थीं जिसमें प्रथम महिला ब्रिजिट मैक्रों को राष्ट्रपति विमान से उतरते समय अपने पति को थप्पड़ मारते देखा गया था। तब से हर बार जब मैक्रों चश्मा लगाकर सार्वजनिक रूप से आते हैं, सोशल मीडिया पर एक ही सवाल गूँजने लगता है: 'क्या उन्हें फिर से ब्रिजिट से मार पड़ी?' फ्रांसीसी दक्षिणपंथी दल 'पैट्रियट्स' के नेता फ्लोरियन फिलिप्पो ने इस बार भी एक्स पर लिखकर इस भावना को धार दी: 'मैक्रों ने फिर से अपना धूप का चश्मा निकाल लिया! ब्रिजिट की ओर से एक और सज़ा या फिर से बिंदास दिखने की कोशिश?' फिलिप्पो ने यह भी याद दिलाया कि जनवरी में मैक्रों ने जिस फ्रांसीसी कंपनी के चश्मे पहने थे, वह तब से दिवालिया हो चुकी है।

यह पूरा प्रकरण एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ जहाँ शिष्टाचार विशेषज्ञों ने भी अपनी राय देना आवश्यक समझा। रूसी बिज़नेस प्रोटोकॉल विशेषज्ञ तात्याना निकोलायेवा ने लेंटा.रू से बातचीत में स्पष्ट किया कि धूप के चश्मे को आमने-सामने की बातचीत के दौरान उतार देना चाहिए, सिवाय इसके कि आँखों की कोई गंभीर चिकित्सीय स्थिति हो। उन्होंने टिप्पणी की, 'जहाँ तक हमें जानकारी है, मैक्रों इस तरह की बीमारियों से पीड़ित नहीं हैं।' यह दृष्टिकोण उन अनगिनत ऑनलाइन टिप्पणियों से मेल खाता है जो इस कृत्य को राजनैतिक जिम्मेदारी के स्तर के अनुरूप नहीं मानतीं। एक इज़राइली यूज़र ने किकर हशब्बात पर लिखा, 'मैक्रों के यहाँ सब झूठ है। इतनी बड़ी राजनैतिक जिम्मेदारी के स्तर पर आमने-सामने बात करने के लिए धूप का चश्मा नहीं पहना जाता। नज़रें मिलाना एक आधारभूत चीज़ है।'

इस सबके बीच, मैक्रों ने अपना चश्मा पूरे आयोजन के दौरान नहीं उतारा—न तो एलिसी में समझौतों पर हस्ताक्षर के समय, और न ही बाद में एक पेरिस के होटल में आयोजित फ्रांस-ओमान व्यापार मंच पर। यह दृश्य अब एक स्थायी छवि बन चुका है: एक राष्ट्रपति जो अपनी आँखों को एक गहरे शीशे के पीछे छिपाए हुए है, जबकि दुनिया उस पारदर्शिता को टटोल रही है जो कूटनीति की बुनियाद मानी जाती है। और शायद यही वह बिंदु है जहाँ एक व्यक्तिगत सहायक वस्तु सामूहिक कल्पना में एक ऐसे प्रश्न-चिह्न में बदल जाती है जिसका उत्तर न तो प्रेस विज्ञप्ति दे पाती है और न ही कोई आधिकारिक बयान।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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32%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसरूसी और सीआईएस प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
व्यंग्यपरपीड़ासुख

एलिसी पैलेस में धूप के चश्मे में मैक्रों का दिखना एक बार फिर ऑनलाइन मज़ाक बन गया है। अटकलें तेज़ हैं कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति अपनी पत्नी ब्रिजिट के एक और थप्पड़ के निशान छिपा रहे हैं, जिससे एक राजकीय अवसर व्यक्तिगत उपहास में बदल गया।

रूसी और सीआईएस प्रेस/ राजकीय
व्यंग्यपरपीड़ासुख

ओमान के सुल्तान के साथ बैठक में मैक्रों के लुक ने उपहास की एक नई लहर पैदा कर दी। राजनेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने शिष्टाचार के कथित उल्लंघन और पत्नी द्वारा थप्पड़ मारे जाने के चल रहे मज़ाक को फिर से हवा दे दी, फ्रांसीसी राष्ट्रपति को एक हास्य पात्र के रूप में पेश किया।

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जब रिकॉर्डिंग बूथ में जन्मी एक ऐसी भाषा जिसे कोई नहीं समझता, फिर भी सब समझ जाते हैं·यूरोज़ोन की बढ़ती सहनशक्ति ने ब्याज दरों पर ईसीबी को दी रणनीतिक ढील: लेगार्ड·संयुक्त राष्ट्र और इज़राइली मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट में फ़लस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप·जब एक प्रार्थना करने वाला कीड़ा मर गया: बच्चों की डिजिटल दुनिया पर लगाम की वैश्विक कोशिशें·जुलाई की सांस्कृतिक लहर: शादी के मंडप से स्क्रीन तक, स्पर्श की तलाश·वैश्विक कंपनियाँ डेटा और प्रौद्योगिकी से नेतृत्व पाइपलाइन व उत्पादकता को नया आकार दे रही हैं·AI का वास्तविक खतरा: नौकरियां नहीं, बल्कि आर्थिक बुलबुला और कृत्रिम ज्ञान का भ्रम·भावनात्मक मजबूती जन्मजात नहीं, सीखा हुआ कौशल है: नए मनोवैज्ञानिक शोध बदल रहे हैं पालन-पोषण और आत्म-विकास की समझ·जब रिकॉर्डिंग बूथ में जन्मी एक ऐसी भाषा जिसे कोई नहीं समझता, फिर भी सब समझ जाते हैं·यूरोज़ोन की बढ़ती सहनशक्ति ने ब्याज दरों पर ईसीबी को दी रणनीतिक ढील: लेगार्ड·संयुक्त राष्ट्र और इज़राइली मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट में फ़लस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप·जब एक प्रार्थना करने वाला कीड़ा मर गया: बच्चों की डिजिटल दुनिया पर लगाम की वैश्विक कोशिशें·जुलाई की सांस्कृतिक लहर: शादी के मंडप से स्क्रीन तक, स्पर्श की तलाश·वैश्विक कंपनियाँ डेटा और प्रौद्योगिकी से नेतृत्व पाइपलाइन व उत्पादकता को नया आकार दे रही हैं·AI का वास्तविक खतरा: नौकरियां नहीं, बल्कि आर्थिक बुलबुला और कृत्रिम ज्ञान का भ्रम·भावनात्मक मजबूती जन्मजात नहीं, सीखा हुआ कौशल है: नए मनोवैज्ञानिक शोध बदल रहे हैं पालन-पोषण और आत्म-विकास की समझ·
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सोमवार, 29 जून 2026

एलिसी पैलेस में धूप के चश्मे और सुल्तान: मैक्रों की आँखों के पीछे छिपी कहानी

फ्रांस के राष्ट्रपति के एविएटर सनग्लासेज़ एक बार फिर कूटनीतिक मुलाकात के केंद्र में आ गए, जहाँ शिष्टाचार, स्वास्थ्य और सोशल मीडिया की तीखी नज़रें एक साथ मिल गईं।

पेरिस के एलिसी पैलेस के प्रांगण में ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के स्वागत की तस्वीरों में एक चमकीला विवरण बार-बार आँखों को अपनी ओर खींच रहा था। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, एक सधे हुए गहरे सूट में, अपनी आँखों पर वही गहरे रंग का एविएटर चश्मा लगाए खड़े थे जो पिछले कुछ महीनों में फ्रांसीसी राजनीति का एक अनपेक्षित प्रतीक बन चुका है। दोनों नेताओं के बीच ओरमुज जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा और मध्य-पूर्व में तनाव कम करने जैसे गंभीर मुद्दों पर बातचीत होनी थी, लेकिन कैमरों की निगाहें बार-बार उन दो शीशों पर टिक जाती थीं जिनके पीछे राष्ट्रपति की आँखें छिपी थीं।

यह पहली बार नहीं था जब मैक्रों के चश्मे ने कूटनीतिक प्रोटोकॉल को पीछे छोड़ दिया हो। जनवरी में दावोस के विश्व आर्थिक मंच पर भी वे इसी तरह नज़र आए थे, और तब उनके कार्यालय ने स्पष्टीकरण दिया था कि आँख की एक रक्त-वाहिका फटने के कारण हुए धब्बे को छिपाने के लिए ऐसा किया गया। इस बार भी ले फिगारो के अनुसार राष्ट्रपति के करीबी सूत्रों ने 'आँख की समस्या' का हवाला दिया, बिना कोई और विस्तार दिए। लेकिन सोशल मीडिया पर यह स्पष्टीकरण एक हाशिये की कहानी बनकर रह गया, क्योंकि वहाँ एक पुरानी और कहीं अधिक रोचक अटकलें पहले से हवा में तैर रही थीं।

यह अटकलें एक टेलीविज़न क्लिप से जन्मी थीं जिसमें प्रथम महिला ब्रिजिट मैक्रों को राष्ट्रपति विमान से उतरते समय अपने पति को थप्पड़ मारते देखा गया था। तब से हर बार जब मैक्रों चश्मा लगाकर सार्वजनिक रूप से आते हैं, सोशल मीडिया पर एक ही सवाल गूँजने लगता है: 'क्या उन्हें फिर से ब्रिजिट से मार पड़ी?' फ्रांसीसी दक्षिणपंथी दल 'पैट्रियट्स' के नेता फ्लोरियन फिलिप्पो ने इस बार भी एक्स पर लिखकर इस भावना को धार दी: 'मैक्रों ने फिर से अपना धूप का चश्मा निकाल लिया! ब्रिजिट की ओर से एक और सज़ा या फिर से बिंदास दिखने की कोशिश?' फिलिप्पो ने यह भी याद दिलाया कि जनवरी में मैक्रों ने जिस फ्रांसीसी कंपनी के चश्मे पहने थे, वह तब से दिवालिया हो चुकी है।

यह पूरा प्रकरण एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ जहाँ शिष्टाचार विशेषज्ञों ने भी अपनी राय देना आवश्यक समझा। रूसी बिज़नेस प्रोटोकॉल विशेषज्ञ तात्याना निकोलायेवा ने लेंटा.रू से बातचीत में स्पष्ट किया कि धूप के चश्मे को आमने-सामने की बातचीत के दौरान उतार देना चाहिए, सिवाय इसके कि आँखों की कोई गंभीर चिकित्सीय स्थिति हो। उन्होंने टिप्पणी की, 'जहाँ तक हमें जानकारी है, मैक्रों इस तरह की बीमारियों से पीड़ित नहीं हैं।' यह दृष्टिकोण उन अनगिनत ऑनलाइन टिप्पणियों से मेल खाता है जो इस कृत्य को राजनैतिक जिम्मेदारी के स्तर के अनुरूप नहीं मानतीं। एक इज़राइली यूज़र ने किकर हशब्बात पर लिखा, 'मैक्रों के यहाँ सब झूठ है। इतनी बड़ी राजनैतिक जिम्मेदारी के स्तर पर आमने-सामने बात करने के लिए धूप का चश्मा नहीं पहना जाता। नज़रें मिलाना एक आधारभूत चीज़ है।'

इस सबके बीच, मैक्रों ने अपना चश्मा पूरे आयोजन के दौरान नहीं उतारा—न तो एलिसी में समझौतों पर हस्ताक्षर के समय, और न ही बाद में एक पेरिस के होटल में आयोजित फ्रांस-ओमान व्यापार मंच पर। यह दृश्य अब एक स्थायी छवि बन चुका है: एक राष्ट्रपति जो अपनी आँखों को एक गहरे शीशे के पीछे छिपाए हुए है, जबकि दुनिया उस पारदर्शिता को टटोल रही है जो कूटनीति की बुनियाद मानी जाती है। और शायद यही वह बिंदु है जहाँ एक व्यक्तिगत सहायक वस्तु सामूहिक कल्पना में एक ऐसे प्रश्न-चिह्न में बदल जाती है जिसका उत्तर न तो प्रेस विज्ञप्ति दे पाती है और न ही कोई आधिकारिक बयान।

स्रोतों में मतभेद

समाज और संस्कृति · 5 स्रोत · 4 भाषाएँ

32%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र20%
निंदक80%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसरूसी और सीआईएस प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
व्यंग्यपरपीड़ासुख

एलिसी पैलेस में धूप के चश्मे में मैक्रों का दिखना एक बार फिर ऑनलाइन मज़ाक बन गया है। अटकलें तेज़ हैं कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति अपनी पत्नी ब्रिजिट के एक और थप्पड़ के निशान छिपा रहे हैं, जिससे एक राजकीय अवसर व्यक्तिगत उपहास में बदल गया।

रूसी और सीआईएस प्रेस/ राजकीय
व्यंग्यपरपीड़ासुख

ओमान के सुल्तान के साथ बैठक में मैक्रों के लुक ने उपहास की एक नई लहर पैदा कर दी। राजनेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने शिष्टाचार के कथित उल्लंघन और पत्नी द्वारा थप्पड़ मारे जाने के चल रहे मज़ाक को फिर से हवा दे दी, फ्रांसीसी राष्ट्रपति को एक हास्य पात्र के रूप में पेश किया।

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