
40 साल बाद भी अमर है माराडोना का 'हाथ ऑफ गॉड' और 'सदी का गोल', इंग्लैंड के खिलाफ वो ऐतिहासिक जीत
22 जून 1986 को एज़्टेका स्टेडियम में डिएगो माराडोना ने दो ऐसे गोल किए जिन्होंने फुटबॉल इतिहास को बदल दिया—एक विवादास्पद हैंडबॉल और एक अविश्वसनीय एकल प्रयास।
मेक्सिको सिटी के एज़्टेका स्टेडियम में 22 जून 1986 की वो शाम। विश्व कप क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना और इंग्लैंड आमने-सामने थे। मैच का पहला हाफ गोलरहित रहा, लेकिन दूसरे हाफ के छठे मिनट में डिएगो माराडोना ने वो कर दिखाया जो आज तक चर्चा में है। गोलकीपर पीटर शिल्टन से हवा में टकराते हुए माराडोना ने अपनी बाईं मुट्ठी से गेंद को नेट में पहुंचा दिया। रेफरी ने गोल मंजूर कर लिया, लेकिन इंग्लिश खिलाड़ियों के विरोध और स्टेडियम में बैठे दर्शकों की उलझन के बीच ये पल 'हाथ ऑफ गॉड' के नाम से अमर हो गया। बीबीसी फारसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वहां मौजूद एक मैक्सिकन किशोरी को पहले तो समझ ही नहीं आया कि इतना हंगामा क्यों हो रहा है—बाद में उसे बताया गया कि माराडोना ने हाथ से गोल किया था।
लेकिन असली जादू तो चार मिनट बाद हुआ। 55वें मिनट में माराडोना ने अपने हाफ से गेंद ली और महज 10.6 सेकंड में 60 मीटर की दूरी तय करते हुए इंग्लैंड के छह खिलाड़ियों—ग्लेन हॉडल, पीटर रीड, केनी सैनसम, टेरी बचर, टेरी फेनविक और गोलकीपर शिल्टन—को छकाते हुए गेंद को नेट में डाल दिया। उरुग्वे के कमेंटेटर विक्टर ह्यूगो मोरालेस की आवाज भर्रा गई और उन्होंने लाइव प्रसारण में कहा, 'ब्रह्मांडीय पतंग! तुम किस ग्रह से आए हो?' यही वो लम्हा था जिसे 'सदी का गोल' कहा गया। उसी मैक्सिकन दर्शक ने बाद में स्वीकार किया कि दूसरा गोल देखकर वो फुटबॉल की दीवानी हो गई—ये किसी खेल की सीमाओं को तोड़ने वाला करिश्मा था।
इस मैच की पृष्ठभूमि में चार साल पहले अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच फ़ॉकलैंड युद्ध का घाव ताज़ा था। अर्जेंटीना के खिलाड़ी जॉर्ज वाल्डानो ने क्लारीन अखबार को बताया कि टीम ने जानबूझकर राजनीतिक आयाम को छुपाने की कोशिश की, लेकिन देश के लिए ये मैच एक हारे हुए युद्ध का बदला लेने जैसा था। ब्राज़ील की शोधकर्ता एड्रियाना नोवोआ के अनुसार, माराडोना ने इस जीत को 'शोषितों का हथियार' बना दिया—अर्जेंटीना के लिए ये सिर्फ फुटबॉल नहीं, बल्कि एक तरह की मुक्ति थी। वाल्डानो ने ये भी याद किया कि मैच से एक दिन पहले मैदान की घास 10 सेंटीमीटर ऊंची थी, जिस पर खेलना मुश्किल लग रहा था, लेकिन माराडोना ने उसे बेअसर कर दिया।
इस 2-1 की जीत ने अर्जेंटीना को सेमीफाइनल में पहुंचाया और बाद में टीम ने विश्व कप जीता। अर्जेंटीना में 22 जून को 'फुटबॉलर दिवस' घोषित कर दिया गया, जो पहले 14 मई को मनाया जाता था। माराडोना ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि ये मैच 'फाइनल जैसा' था और ये जीत माल्विनास में शहीद हुए जवानों के लिए एक तरह का प्रतीकात्मक बदला थी। दुनिया भर में ये दो गोल बहस और प्रशंसा दोनों के विषय बने रहे—प्यूर्टो रिको के बैंड काये 13 ने अपने गाने 'लातिनोअमेरिका' में इसे 'माराडोना ने इंग्लैंड के खिलाफ दो गोल किए' के रूप में अमर कर दिया।
ठीक 40 साल बाद, 22 जून 2026 को अर्जेंटीना की टीम एक बार फिर विश्व कप मैच के लिए मैदान में उतर रही है—इस बार डलास में ऑस्ट्रिया के खिलाफ। ये संयोग उस ऐतिहासिक जीत की यादों को और भी जीवंत कर देता है, लेकिन अब सवाल ये है कि क्या मौजूदा टीम अपने अतीत की इस विरासत को आगे बढ़ा पाएगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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चालीस साल बाद, अर्जेंटीना का मीडिया माराडोना के इंग्लैंड के खिलाफ दो गोलों को फ़ॉकलैंड युद्ध का पौराणिक बदला मानकर जश्न मनाता है, दूसरे गोल को 'सदी का गोल' घोषित करता है और उस दिन की अमर विजय की याद को जीवित रखता है।
महाद्वीपीय यूरोपीय मीडिया गोल का मीटर दर मीटर पुनर्निर्माण करता है, मैच को फ़ुटबॉल की आज़ादी का आखिरी दिन मानता है, तकनीकी विश्लेषण और काव्यात्मक आश्चर्य का मिश्रण करता है और तटस्थ रहता है।
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