
पुतिन ने ईंधन आपूर्ति संकट के बीच कर संशोधन विधेयक को मंजूरी दी
नए कानून में सम्मिश्रण से उत्पादन को मान्यता, आयातित पेट्रोल पर डैम्पर भुगतान का प्रावधान और रिफाइनरी आधुनिकीकरण की समय-सीमा में ढील दी गई है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घरेलू ईंधन बाजार को स्थिर करने के उद्देश्य से कर संहिता में संशोधन पर हस्ताक्षर किए, जो 4 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे और कुछ प्रावधान 1 जून से पूर्वव्यापी रूप से लागू होंगे। यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब मई अंत से क्रीमिया, सेवास्तोपोल, मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग सहित दर्जनों क्षेत्रों में पेट्रोल-डीज़ल की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए गए और जून अंत तक लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र आपूर्ति बाधाओं की सूचना दे रहे थे।
कानून का केंद्रीय तंत्र तीन स्तंभों पर टिका है। पहला, सीधे आसवित पेट्रोल (स्ट्रेट-रन गैसोलीन) को अन्य घटकों के साथ मिलाकर उच्च-ऑक्टेन ईंधन बनाने को उत्पादन माना जाएगा और उस पर उत्पाद शुल्क लगेगा, लेकिन तेल शोधन प्रमाणपत्र धारक इस उत्पाद शुल्क की कटौती का दावा कर सकेंगे। दूसरा, विदेशों से आयातित पेट्रोल को रूसी बाजार में बेचने वाली अधिकृत कंपनियों के लिए डैम्पर भुगतान प्रणाली का विस्तार किया गया है। यूरेशियाई आर्थिक संघ (EAEU) देशों से आयात पर डैम्पर गुणांक 0.68 से बढ़ाकर 0.9 कर दिया गया, जबकि अन्य देशों से आयात के लिए क्षतिपूर्ति की गणना भारतीय बाजार में AI-92 पेट्रोल के सांकेतिक मूल्य और भारतीय बंदरगाहों से रूस तक परिवहन लागत के योग के आधार पर होगी।
इन उपायों का प्रभाव कई स्तरों पर दिखेगा। सरकार को यह अधिकार भी मिल गया है कि वह रूस में प्रचलन के लिए अनुमत ईंधन के प्रकार निर्धारित करे, जिससे आपूर्ति का दायरा लचीला बनाया जा सके। तेल कंपनियों के लिए आधुनिकीकरण समझौतों की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी गई और न्यूनतम निवेश सीमा 60 अरब से बढ़ाकर 100 अरब रूबल कर दी गई, जिससे बड़ी रिफाइनरियों को राहत मिलेगी। उप-प्रधानमंत्री अलेक्ज़ांडर नोवाक ने 3 जुलाई को तेल कंपनियों को घरेलू मांग पूरी करने के लिए अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, विशेषकर इरकुत्स्क और ज़बायकाल्स्की क्षेत्रों में जहाँ स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
दक्षिण एशिया के संदर्भ में, भारतीय AI-92 मूल्य को आयात समता के बेंचमार्क के रूप में अपनाना वैश्विक ऊर्जा व्यापार में एक उल्लेखनीय संदर्भ बिंदु बन गया है। इससे रूस के लिए भारत से पेट्रोल आयात का आर्थिक आकर्षण बढ़ेगा, हालांकि वास्तविक आयात मात्रा परिवहन अवसंरचना और मूल्य अंतर पर निर्भर करेगी। अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव 31 दिसंबर 2026 की समय-सीमा है, जब तक रिफाइनरी आधुनिकीकरण की शर्तें पूरी करनी होंगी, और 1 जून 2026 से लागू प्रावधानों के तहत पहली कर अवधि की रिपोर्टिंग होगी।
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