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भू-राजनीति और राजनीतिगुरुवार, 2 जुलाई 2026

सोशल मीडिया पर नाबालिगों की पहुंच रोकने का वैश्विक रुझान, यूरोपीय संघ सितंबर में ला सकता है प्रस्ताव

ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और खाड़ी देशों के बाद अब यूरोपीय आयोग पूरे संघ में एक समान आयु सीमा तय करने की तैयारी में है, जबकि भारत और इंडोनेशिया जैसे देश प्लेटफ़ॉर्म प्रशासन पर ज़ोर दे रहे हैं।

दुनिया भर की सरकारें नाबालिगों की सोशल मीडिया तक पहुंच को कानूनी रूप से सीमित करने की दिशा में तेज़ी से क़दम बढ़ा रही हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेर लेयन 16 सितंबर को अपने वार्षिक अभिभाषण में पूरे यूरोपीय संघ के लिए एक समान आयु सीमा लागू करने की योजना की घोषणा कर सकती हैं। यूरोपीय आयोग के सूत्रों के अनुसार, इस पहल के तहत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों को तय उम्र से कम के उपयोगकर्ताओं का अकाउंट बनाने से रोकना अनिवार्य किया जाएगा, हालांकि न्यूनतम आयु और सत्यापन की विधि पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन चुका है, और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भी इसी तरह के प्रतिबंध की घोषणा कर चुके हैं।

खाड़ी क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात ने बाल डिजिटल सुरक्षा परिषद के माध्यम से सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष निर्धारित कर दी है, और प्लेटफ़ॉर्मों को अनुपालन के लिए 12 महीने की संक्रमण अवधि दी गई है। सऊदी अरब की शूरा परिषद ने संचार, अंतरिक्ष एवं प्रौद्योगिकी आयोग से 16 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए आयु सत्यापन नियम और उपयोग प्रतिबंध विकसित करने का आह्वान किया है। इसी कड़ी में यूट्यूब ने मध्य पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका में अभिभावकों को बच्चों की देखरेख वाले अकाउंट की सुविधा देना शुरू किया है, जिसमें शॉर्ट्स स्क्रॉलिंग की दैनिक सीमा तय करने और कंटेंट स्तर चुनने का विकल्प शामिल है।

दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रतिक्रिया भिन्न रही है। भारत में ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के क़दमों के बाद राज्य स्तर पर बहस छिड़ गई है, लेकिन विशेषज्ञ पूर्ण प्रतिबंध की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं। भारतीय विमर्श में यह तर्क दिया जा रहा है कि आयु सत्यापन के मौजूदा कमज़ोर तंत्र और तकनीकी उपायों से बच निकलने की प्रवृत्ति प्रतिबंध को निष्प्रभावी बना सकती है, साथ ही इससे प्लेटफ़ॉर्मों को नाबालिगों का संवेदनशील पहचान डेटा एकत्र करने का अवसर मिल सकता है। इंडोनेशिया ने प्रतिबंध के बजाय प्लेटफ़ॉर्म प्रशासन और डिजिटल साक्षरता का रास्ता चुना है। वहां संचार एवं डिजिटल मंत्रालय ने ‘फ़ोरम सहाबत तुनास’ के ज़रिए सैकड़ों शिक्षकों को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया है और पीपी तुनास नामक विनियमन के तहत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम प्रदाताओं को बच्चों के अनुकूल सेवाएं देने के लिए बाध्य किया है।

लैटिन अमेरिका में अर्जेंटीना की संसद में कई विधेयक प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें न्यूनतम आयु 13 से 14 वर्ष के बीच रखने और माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इन पहलों में आयु सत्यापन के लिए बायोमीट्रिक या राष्ट्रीय डिजिटल पहचान प्रणाली के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया है, और प्लेटफ़ॉर्मों को समय-समय पर पुनः सत्यापन करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती आयु सत्यापन की विश्वसनीयता और डेटा गोपनीयता बनी हुई है। ऑस्ट्रेलिया के अनुभव से यह भी सामने आया है कि प्रतिबंध के बाद किशोर कम विनियमित प्लेटफ़ॉर्मों की ओर पलायन कर सकते हैं, जिनकी सुरक्षा स्थिति अज्ञात है।

यूरोपीय आयोग की विशेषज्ञ समिति 13 जुलाई तक अपनी सिफ़ारिशें प्रस्तुत करेगी, जो भावी विधायी प्रस्ताव का आधार बनेंगी। इस बीच फ़्रांस, स्पेन, जर्मनी और ग्रीस जैसे सदस्य देश अपने राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधों की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं, जिससे पूरे संघ में नियमों के बिखराव की आशंका को देखते हुए आयोग तेज़ी से साझा मानक लाना चाहता है। कनाडा की संसद में भी 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अकाउंट पर रोक लगाने वाला विधेयक पेश किया जा चुका है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या वैश्विक रुझान पूर्ण प्रतिबंध की ओर बढ़ेगा या प्लेटफ़ॉर्म डिज़ाइन और अभिभावकीय नियंत्रण जैसे वैकल्पिक उपायों को प्राथमिकता मिलेगी।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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44%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेसअरब खाड़ी प्रेस
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस/ सुरक्षा
संदेहचेतावनी

अमेरिका में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर बहस तेज़ हो गई है। माता-पिता प्रतिबंध को सख्त करने में देरी से चिंतित हैं, जबकि एक सर्वेक्षण में बहुमत का समर्थन दिखा लेकिन विरोध और अनिश्चितता भी बनी हुई है।

अरब खाड़ी प्रेस
व्यावहारिकतासंरक्षणवाद

संयुक्त अरब अमीरात ने नए बाल डिजिटल सुरक्षा नियमों के तहत सोशल मीडिया तक पहुंच के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष निर्धारित की है। बाल डिजिटल सुरक्षा परिषद द्वारा प्रस्तुत इस पहल का उद्देश्य युवाओं को हानिकारक सामग्री से बचाना है।

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वीआईपी लाउंज से मेटलाइफ स्टेडियम तक: जस्टिन बीबर के विश्व कप शो की गूंज·अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन: यूक्रेन को 140 अरब यूरो की सैन्य प्रतिबद्धता, ट्रंप के दबाव में यूरोपीय रणनीति·तेल की गिरावट से अमेरिकी दर वृद्धि की आशंकाएँ: फेड और ईसीबी में बढ़ता विचलन·वैश्विक राजकोषीय परिदृश्य: जापान और ब्राजील में रिकॉर्ड मुनाफा, जर्मनी और मिस्र में बढ़ता कर्ज·अमेरिकी पोप का स्वतंत्रता पदक भाषण: प्रवासियों की भूमिका पर जोर, लैम्पेडुसा यात्रा से ट्रंप प्रशासन को संकेत·ब्राजील: बोल्सोनारो की नजरबंदी बरकरार, हथियार सौंपने का आदेश·52,000 करोड़ की रक्षा खरीद को मंजूरी, भारत-जापान सहयोग पर चीन की आपत्ति·250वीं वर्षगांठ पर न्यूयॉर्क मेयर का ट्रंप की आव्रजन नीति को परोक्ष जवाब·वीआईपी लाउंज से मेटलाइफ स्टेडियम तक: जस्टिन बीबर के विश्व कप शो की गूंज·अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन: यूक्रेन को 140 अरब यूरो की सैन्य प्रतिबद्धता, ट्रंप के दबाव में यूरोपीय रणनीति·तेल की गिरावट से अमेरिकी दर वृद्धि की आशंकाएँ: फेड और ईसीबी में बढ़ता विचलन·वैश्विक राजकोषीय परिदृश्य: जापान और ब्राजील में रिकॉर्ड मुनाफा, जर्मनी और मिस्र में बढ़ता कर्ज·अमेरिकी पोप का स्वतंत्रता पदक भाषण: प्रवासियों की भूमिका पर जोर, लैम्पेडुसा यात्रा से ट्रंप प्रशासन को संकेत·ब्राजील: बोल्सोनारो की नजरबंदी बरकरार, हथियार सौंपने का आदेश·52,000 करोड़ की रक्षा खरीद को मंजूरी, भारत-जापान सहयोग पर चीन की आपत्ति·250वीं वर्षगांठ पर न्यूयॉर्क मेयर का ट्रंप की आव्रजन नीति को परोक्ष जवाब·
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गुरुवार, 2 जुलाई 2026

सोशल मीडिया पर नाबालिगों की पहुंच रोकने का वैश्विक रुझान, यूरोपीय संघ सितंबर में ला सकता है प्रस्ताव

ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और खाड़ी देशों के बाद अब यूरोपीय आयोग पूरे संघ में एक समान आयु सीमा तय करने की तैयारी में है, जबकि भारत और इंडोनेशिया जैसे देश प्लेटफ़ॉर्म प्रशासन पर ज़ोर दे रहे हैं।

दुनिया भर की सरकारें नाबालिगों की सोशल मीडिया तक पहुंच को कानूनी रूप से सीमित करने की दिशा में तेज़ी से क़दम बढ़ा रही हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेर लेयन 16 सितंबर को अपने वार्षिक अभिभाषण में पूरे यूरोपीय संघ के लिए एक समान आयु सीमा लागू करने की योजना की घोषणा कर सकती हैं। यूरोपीय आयोग के सूत्रों के अनुसार, इस पहल के तहत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों को तय उम्र से कम के उपयोगकर्ताओं का अकाउंट बनाने से रोकना अनिवार्य किया जाएगा, हालांकि न्यूनतम आयु और सत्यापन की विधि पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन चुका है, और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भी इसी तरह के प्रतिबंध की घोषणा कर चुके हैं।

खाड़ी क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात ने बाल डिजिटल सुरक्षा परिषद के माध्यम से सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष निर्धारित कर दी है, और प्लेटफ़ॉर्मों को अनुपालन के लिए 12 महीने की संक्रमण अवधि दी गई है। सऊदी अरब की शूरा परिषद ने संचार, अंतरिक्ष एवं प्रौद्योगिकी आयोग से 16 वर्ष से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए आयु सत्यापन नियम और उपयोग प्रतिबंध विकसित करने का आह्वान किया है। इसी कड़ी में यूट्यूब ने मध्य पूर्व और उत्तरी अफ़्रीका में अभिभावकों को बच्चों की देखरेख वाले अकाउंट की सुविधा देना शुरू किया है, जिसमें शॉर्ट्स स्क्रॉलिंग की दैनिक सीमा तय करने और कंटेंट स्तर चुनने का विकल्प शामिल है।

दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रतिक्रिया भिन्न रही है। भारत में ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के क़दमों के बाद राज्य स्तर पर बहस छिड़ गई है, लेकिन विशेषज्ञ पूर्ण प्रतिबंध की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं। भारतीय विमर्श में यह तर्क दिया जा रहा है कि आयु सत्यापन के मौजूदा कमज़ोर तंत्र और तकनीकी उपायों से बच निकलने की प्रवृत्ति प्रतिबंध को निष्प्रभावी बना सकती है, साथ ही इससे प्लेटफ़ॉर्मों को नाबालिगों का संवेदनशील पहचान डेटा एकत्र करने का अवसर मिल सकता है। इंडोनेशिया ने प्रतिबंध के बजाय प्लेटफ़ॉर्म प्रशासन और डिजिटल साक्षरता का रास्ता चुना है। वहां संचार एवं डिजिटल मंत्रालय ने ‘फ़ोरम सहाबत तुनास’ के ज़रिए सैकड़ों शिक्षकों को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया है और पीपी तुनास नामक विनियमन के तहत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम प्रदाताओं को बच्चों के अनुकूल सेवाएं देने के लिए बाध्य किया है।

लैटिन अमेरिका में अर्जेंटीना की संसद में कई विधेयक प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें न्यूनतम आयु 13 से 14 वर्ष के बीच रखने और माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इन पहलों में आयु सत्यापन के लिए बायोमीट्रिक या राष्ट्रीय डिजिटल पहचान प्रणाली के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया है, और प्लेटफ़ॉर्मों को समय-समय पर पुनः सत्यापन करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती आयु सत्यापन की विश्वसनीयता और डेटा गोपनीयता बनी हुई है। ऑस्ट्रेलिया के अनुभव से यह भी सामने आया है कि प्रतिबंध के बाद किशोर कम विनियमित प्लेटफ़ॉर्मों की ओर पलायन कर सकते हैं, जिनकी सुरक्षा स्थिति अज्ञात है।

यूरोपीय आयोग की विशेषज्ञ समिति 13 जुलाई तक अपनी सिफ़ारिशें प्रस्तुत करेगी, जो भावी विधायी प्रस्ताव का आधार बनेंगी। इस बीच फ़्रांस, स्पेन, जर्मनी और ग्रीस जैसे सदस्य देश अपने राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधों की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं, जिससे पूरे संघ में नियमों के बिखराव की आशंका को देखते हुए आयोग तेज़ी से साझा मानक लाना चाहता है। कनाडा की संसद में भी 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अकाउंट पर रोक लगाने वाला विधेयक पेश किया जा चुका है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या वैश्विक रुझान पूर्ण प्रतिबंध की ओर बढ़ेगा या प्लेटफ़ॉर्म डिज़ाइन और अभिभावकीय नियंत्रण जैसे वैकल्पिक उपायों को प्राथमिकता मिलेगी।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 4 स्रोत · 2 भाषाएँ

44%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक67%
निंदक33%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेसअरब खाड़ी प्रेस
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस/ सुरक्षा
संदेहचेतावनी

अमेरिका में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर बहस तेज़ हो गई है। माता-पिता प्रतिबंध को सख्त करने में देरी से चिंतित हैं, जबकि एक सर्वेक्षण में बहुमत का समर्थन दिखा लेकिन विरोध और अनिश्चितता भी बनी हुई है।

अरब खाड़ी प्रेस
व्यावहारिकतासंरक्षणवाद

संयुक्त अरब अमीरात ने नए बाल डिजिटल सुरक्षा नियमों के तहत सोशल मीडिया तक पहुंच के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष निर्धारित की है। बाल डिजिटल सुरक्षा परिषद द्वारा प्रस्तुत इस पहल का उद्देश्य युवाओं को हानिकारक सामग्री से बचाना है।

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