
ट्रंप ने जन्म-नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की मांग की, 'अमेरिकी नागरिकता बिकाऊ नहीं'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्म-आधारित नागरिकता पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की घोषणा की है, हालांकि ऐसी याचिकाएं स्वीकार होने की संभावना अत्यंत कम है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि वह जन्म-आधारित नागरिकता (बर्थराइट सिटिज़नशिप) पर सर्वोच्च न्यायालय के 30 जून 2026 के फैसले के खिलाफ तुरंत पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे। ट्रंप ने इस फैसले को 'न्याय की विफलता' और 'पागलपन' करार देते हुए कहा कि यदि इसे नहीं बदला गया तो यह 'अमेरिका को नष्ट कर देगा।' उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि मेक्सिको सीमा के पास '4,000 डॉलर में प्रसव' जैसे विज्ञापनों के माध्यम से अमेरिकी नागरिकता बेची जा रही है, और कहा कि 'अमेरिकी नागरिकता बिकाऊ नहीं है।'
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में 'अधिकार क्षेत्र के अधीन' वाक्यांश अवैध रूप से या अस्थायी रूप से उपस्थित माता-पिता के बच्चों पर लागू नहीं होता। इसके विपरीत, मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के नेतृत्व में सर्वोच्च न्यायालय के 6-3 के बहुमत ने कहा कि संशोधन के निर्माताओं ने इस भूमि में जन्मे प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को नागरिकता का वादा किया था, और 1898 के वोंग किम आर्क मामले की मिसाल विदेशी माता-पिता के बच्चों को भी जन्म-नागरिकता का अधिकार देती है। तीन असहमत न्यायाधीशों ने ट्रंप के पक्ष में राय दी। अमेरिकी नागरिक अधिकार समूहों ने इस फैसले का स्वागत किया, जबकि ट्रंप ने इसे 'चीन की जीत' बताया, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह जन्म-पर्यटन को एक भू-राजनीतिक मुद्दे के रूप में देखते हैं।
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के नियमों के अनुसार, पुनर्विचार याचिका फैसले के 25 दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिए और नौ न्यायाधीशों में से बहुमत को इसे स्वीकार करना होगा। न्यायालय के इतिहास में ऐसी याचिकाएं लगभग कभी स्वीकार नहीं की गईं; अंतिम बार किसी निर्णीत मामले पर पुनर्विचार लगभग 60 वर्ष पहले हुआ था। अमेरिकी संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की याचिका की सफलता की संभावना अत्यंत क्षीण है। 14वां संशोधन 1868 में गृहयुद्ध के बाद पूर्व दासों को नागरिकता सुनिश्चित करने के लिए अपनाया गया था और तब से यह अमेरिकी पहचान का आधार रहा है। ट्रंप ने जनवरी 2025 में पदभार ग्रहण करते ही इस नागरिकता को सीमित करने वाला कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसके बाद 2025 के एक अंतरिम आदेश ने देश में कानूनी विखंडन पैदा कर दिया था, जिसे जून 2026 के अंतिम निर्णय ने समाप्त किया।
ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस से भी जन्म-नागरिकता समाप्त करने के लिए कानून बनाने का आग्रह किया है, हालांकि इसके लिए संविधान संशोधन या ऐसे कानून की आवश्यकता होगी जो न्यायिक समीक्षा का सामना कर सके। दक्षिण एशिया के लिए यह बहस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे भारतीय और अन्य दक्षिण एशियाई परिवार सीधे प्रभावित हो सकते हैं। भारतीय विदेश नीति विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बना हुआ है, और नागरिकता नियमों की स्थिरता प्रवासन निर्णयों को प्रभावित करती है। सर्वोच्च न्यायालय को आने वाले सप्ताहों में ट्रंप की औपचारिक याचिका प्राप्त होने की उम्मीद है, जिसके बाद वह पुनर्विचार पर निर्णय लेगा।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.10 | neutral |
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| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
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