
ट्रंप बृहस्पतिवार को चुनावी सुरक्षा पर राष्ट्रीय संबोधन देंगे, खुफिया दस्तावेज जारी करने की योजना
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2020 के चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप और वोटिंग मशीनों की कमजोरियों पर केंद्रित भाषण देंगे, जिसे मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी प्रक्रिया को चुनौती देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बृहस्पतिवार रात राष्ट्रीय टेलीविजन पर एक प्राइमटाइम संबोधन देंगे, जिसमें वह 2020 के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े अवर्गीकृत खुफिया दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की कथित खामियों पर बात करेंगे। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस भाषण के दौरान सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ, कार्यवाहक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक बिल पल्टे और एफबीआई निदेशक काश पटेल सहित शीर्ष खुफिया अधिकारी मौजूद रहेंगे। प्रशासन ने हाल ही में एक विशेष कार्यबल गठित किया है जो चुनाव सुरक्षा से जुड़े हजारों दस्तावेजों की समीक्षा कर रहा है, और आने वाले सप्ताहों में इन्हें सार्वजनिक करने की योजना है। इस घोषणा से ठीक पहले, व्हाइट हाउस ने अमेरिकी चुनाव सहायता आयोग (ईएसी) के अंतिम तीन सदस्यों को हटा दिया, जिससे यह संघीय निगरानी संस्था पूरी तरह निष्क्रिय हो गई है।
ट्रंप प्रशासन का पक्ष यह है कि 2020 के चुनाव में विदेशी शक्तियों ने हस्तक्षेप किया और वोटिंग मशीनों में सेंध लगाने की कोशिशें हुईं, हालांकि मार्च 2021 में जारी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय (ओडीएनआई) की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया था कि किसी भी विदेशी विरोधी ने मतदान प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं से छेड़छाड़ या हैकिंग का प्रयास नहीं किया। उस रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने जो बाइडन की उम्मीदवारी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार अभियान चलाया, जबकि ईरान ने ट्रंप के पुनर्निर्वाचन की संभावनाओं को कमजोर करने के लिए गुप्त प्रभाव अभियान चलाया। डेमोक्रेटिक सांसदों और चुनाव सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन बिना किसी नए सबूत के पुराने आरोपों को दोहरा रहा है, और यह नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के नतीजों को चुनौती देने की जमीन तैयार करने का प्रयास है।
इस भाषण के व्यापक राजनीतिक निहितार्थ हैं। रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस के एक या दोनों सदनों में बहुमत खोने की आशंका के बीच, ट्रंप ने 'सेव अमेरिका एक्ट' नामक विधेयक को आगे बढ़ाया है, जो मतदान के लिए नागरिकता प्रमाण अनिवार्य करता है, लेकिन सीनेट में यह 60 वोटों की बाधा पार नहीं कर सका है। विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव आयोग को खत्म करना और खुफिया दस्तावेजों का चुनिंदा विमोचन, मध्यावधि परिणामों को अवैध ठहराने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। साथ ही, यह भाषण ईरान के साथ पुनः शुरू हुए सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जिससे प्रशासन एक साथ विदेश नीति और घरेलू चुनावी मोर्चे पर सक्रिय नजर आ रहा है।
यह विवाद केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत जैसे लोकतंत्रों में, जहां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की सुरक्षा को लेकर लगातार राजनीतिक बहस होती रही है, अमेरिकी घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। भारतीय चुनाव आयोग ने बार-बार ईवीएम की विश्वसनीयता पर जोर दिया है, लेकिन विपक्षी दल हैकिंग की आशंकाएं जताते रहे हैं। अमेरिकी खुफिया समुदाय के निष्कर्ष और ट्रंप प्रशासन की वर्तमान कार्रवाइयां, वैश्विक स्तर पर चुनावी अखंडता की बहस को नया आयाम दे सकती हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार, बृहस्पतिवार का भाषण रात 9 बजे (पूर्वी समय) प्रसारित होगा, और इसके बाद कार्यबल आने वाले सप्ताहों में अतिरिक्त दस्तावेज जारी करेगा। मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को निर्धारित हैं, और यदि डेमोक्रेट्स ने सदन में बहुमत हासिल किया तो ट्रंप के खिलाफ तीसरी बार महाभियोग की कार्यवाही शुरू हो सकती है। इस बीच, सीनेट में 'सेव अमेरिका एक्ट' का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.80 | critical |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.20 | neutral |
The Atlantic community denounces Trump's attempt to revive debunked election fraud lies, using loyalist intelligence to legitimize falsehoods.
By repeatedly referencing the Capitol riot and the debunked nature of the claims, the bloc frames the speech as a dangerous repetition of past lies, making its position plausible through factual recall and moral condemnation.
The Atlantic bloc omits that Trump will base his speech on recently declassified intelligence documents, which could give a semblance of foundation to his allegations.
Continental Europe denounces Trump's dangerous move to revive the election conspiracy theory, with alarmist and accusatory tones.
By using disruptive language ('bombshell', 'disruptive') and linking the speech to the threat to democracy, the bloc creates a sense of urgency and legitimizes its critical stance.
Continental Europe omits any reference to the January 6 Capitol riot, which would undermine Trump's credibility but is not mentioned.
Latin America reports with detachment Trump's intentions, underlining that his claims have already been debunked.
By presenting the facts neutrally but including the note that the allegations are false, the bloc adopts a stance of skepticism without alarmism.
Latin America omits the context of the Capitol riot and the history of Trump's lies, presenting the news in a more neutral way.
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