
कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की आशंका, ट्रंप और माइली का खुला समर्थन
21 जून को होने वाले दूसरे दौर के मतदान से पहले दक्षिणपंथी उम्मीदवार को अमेरिकी और अर्जेंटीना के राष्ट्रपतियों का समर्थन मिला है, जबकि वामपंथी खेमे ने इसे चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताया है।
कोलंबिया में राष्ट्रपति पद के लिए 21 जून को होने वाले दूसरे दौर के चुनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस छेड़ दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई बार दक्षिणपंथी उम्मीदवार अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएला को "एल टाइग्रे" कहकर समर्थन दिया और कोलंबियाई मतदाताओं से उन्हें वोट देने की अपील की। वहीं अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली ने भी फोन पर बातचीत के बाद खुलेआम एस्प्रिएला का पक्ष लेते हुए कहा कि "स्वतंत्रता की ताकतें" इस चुनाव पर नजर रख रही हैं। इसके जवाब में कोलंबिया के वर्तमान राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो ने माइली पर आरोप लगाया कि वे नशा तस्करों और इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के धन से कोलंबिया में प्रगतिवाद को "खून और आग" से नष्ट करना चाहते हैं। अमेरिकी कांग्रेस के 11 डेमोक्रेटिक सदस्यों ने भी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर इस खुले समर्थन को चुनावी प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप बताया और एस्प्रिएला के विवादास्पद रिकॉर्ड की ओर ध्यान दिलाया।
पहले दौर में एस्प्रिएला को 43.74 प्रतिशत और वामपंथी पाक्तो हिस्तोरिको के उम्मीदवार इवान सेपेदा को 40.90 प्रतिशत मत मिले थे, दोनों के बीच सात लाख से भी कम वोटों का अंतर है। राजधानी बोगोता में ऐतिहासिक मतदान की उम्मीद है, जो अक्सर राष्ट्रीय रुझान तय करता है। एस्प्रिएला ने अल साल्वाडोर के राष्ट्रपति नायिब बुकेले की तर्ज पर दस पृथक कारागार बनाने का वादा किया है, जहां संचार सुविधा नहीं होगी ताकि अपराधी बाहर से नेटवर्क न चला सकें। उनके उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और पूर्व वित्त मंत्री होसे मानुएल रेस्त्रेपो ने अर्थव्यवस्था को "गंभीर संकट" में बताया, जबकि पेत्रो ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में देश में कंपनियों की संख्या ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंची है। दोनों उम्मीदवारों ने किसी सार्वजनिक बहस में भाग नहीं लिया, जिससे मतदाताओं के लिए नीतियों की तुलना कठिन हो गई है।
चुनाव की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार महासंघ (एफआईडीएच) ने चेतावनी दी कि एस्प्रिएला के प्रस्ताव सामाजिक कानूनी राज्य और लोकतांत्रिक गारंटियों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। वहीं पहले चरण में सशस्त्र समूहों के प्रभाव वाले इलाकों की 218 मतदान मेजों पर शत-प्रतिशत मत सेपेदा के पक्ष में पड़े, जिससे जबरदस्ती की आशंका गहराई है। कोलंबिया के प्रमुख स्तंभकारों और विचारकों में भी गहरा विभाजन है—कुछ ने सेपेदा का समर्थन किया, कुछ एस्प्रिएला का, जबकि कई ने विरोध में खाली मतपत्र डालने की घोषणा की है।
यह चुनाव दक्षिण अमेरिका की राजनीतिक दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। ट्रंप प्रशासन क्षेत्र के देशों को अपनी नीतियों से जोड़ने के लिए दबाव बना रहा है, और एस्प्रिएला की जीत उस रुझान को मजबूत करेगी। दूसरी ओर, सेपेदा की सफलता पेत्रो के प्रगतिवादी गठबंधन को नई ऊर्जा देगी। ताजा सर्वेक्षणों में कांटे की टक्कर है, और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के आरोपों के बीच नतीजे की वैधता पर भी असर पड़ सकता है। कोलंबिया के मतदाता रविवार को जो फैसला करेंगे, वह न केवल उनके देश का भविष्य लिखेगा बल्कि पूरे महाद्वीप के शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा।
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