
एआई बुलबुले और कर्ज के जाल से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा खतरा: बीआईएस
बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स की वार्षिक रिपोर्ट ने एआई निवेश, बढ़ते सार्वजनिक ऋण, मुद्रास्फीति और हेज फंडों के दबदबे को प्रमुख जोखिम बताया है।
केंद्रीय बैंकों के बैंक के रूप में ख्यात बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) ने रविवार को जारी अपनी वार्षिक आर्थिक रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चार प्रमुख दबाव बिंदुओं की चेतावनी दी है — एआई निवेश में संभावित बुलबुला, रिकॉर्ड स्तर पर सार्वजनिक ऋण, आपूर्ति झटकों से मुद्रास्फीति की वापसी और सरकारी बॉन्ड बाजारों में अत्यधिक लीवरेज वाले हेज फंडों की बढ़ती भूमिका। बीआईएस ने 2007 में सब-प्राइम संकट की आहट पहले ही भाँप ली थी, इसलिए इसकी चेतावनी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट के अनुसार, एआई क्षेत्र में अंधाधुंध निवेश तेजी से बढ़ रहा है, जो ऐतिहासिक रूप से तकनीकी क्रांतियों के बुलबुले जैसा पैटर्न दिखाता है। पाँच बड़ी क्लाउड कंपनियाँ (अमेज़न, अल्फाबेट, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और ओरेकल) 2025-26 में अपने मुनाफे और नकदी से अधिक, एक ट्रिलियन डॉलर से ऊपर का निवेश करने जा रही हैं। कंपनियाँ कर्ज लेकर इस होड़ में शामिल हैं; हाल ही में स्पेसएक्स ने 86 अरब डॉलर की इक्विटी के बाद 25 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी किए। बीआईएस ने चिप निर्माताओं, क्लाउड प्रदाताओं और एआई फर्मों के बीच चक्रीय वित्तपोषण व्यवस्था को खतरनाक बताया है, जहाँ एक-दूसरे के शेयर खरीदकर और दीर्घकालिक खरीद अनुबंधों से जटिल अंतर्निर्भरता पैदा हो गई है। अगर प्रत्याशित मुनाफा नहीं मिला तो यह संरचना भारी गिरावट का कारण बन सकती है।
दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने जैसे आपूर्ति झटकों से वैश्विक मुद्रास्फीति फिर सिर उठा सकती है। बीआईएस के अनुसार, यदि कंपनियाँ और परिवार ऊँची कीमतों की उम्मीद करने लगे तो मजदूरी-मूल्य सर्पिल का जोखिम है। इस बीच, विकसित और उभरती दोनों अर्थव्यवस्थाओं में सार्वजनिक ऋण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के उच्चतम स्तर के करीब है। सरकारें संकट के समय खर्च तो बढ़ाती हैं लेकिन अच्छे दिनों में वित्तीय गुंजाइश नहीं बनातीं। बीआईएस ने आगाह किया कि बड़े हेज फंड अब सरकारी बॉन्ड बाजारों पर हावी हो रहे हैं, जिससे सार्वजनिक ऋण और वित्तीय स्थिरता के बीच एक नया और खतरनाक संबंध बन गया है।
बीआईएस ने नीतिगत अनुशासन पर जोर देते हुए केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं के सख्त नियमन और सरकारों द्वारा आर्थिक सुधार के दौर में ऋण घटाने की सिफारिश की है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए ये वैश्विक जोखिम पूँजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव और वित्तीय स्थितियों के सख्त होने का कारण बन सकते हैं। अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव जी20 और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठकें हैं, जहाँ इन मुद्दों पर समन्वित कार्रवाई की संभावना तलाशी जाएगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ
The Bank for International Settlements warns that a confluence of an AI bubble, high public debt, and persistent inflation threatens global stability. It calls for disciplined and coordinated policies to avert a crisis.
The BIS sounds the alarm on the 'exuberance' in AI investments, warning that weak returns could trigger a lengthy investment bust with broad economic consequences. The report highlights risks of a sharp correction in equity markets spilling over into the real economy.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
पेरू में केइको फुजीमोरी की जीत: 50,000 से कम वोटों के अंतर से राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा तय
6 भाषाएँ · 22 स्रोत
Technology सेWhatsApp में अब बिना नंबर चैट: यूज़रनेम रिज़र्वेशन शुरू, भारतीय सीईओ ने दी जानकारी
9 भाषाएँ · 23 स्रोत
Science & Health सेकांगो में इबोला का चौथे प्रांत में विस्तार, फ्रांस में पहला मामला; बुंदिबुग्यो स्ट्रेन पर नियंत्रण की चुनौती
4 भाषाएँ · 6 स्रोत