
इज़राइल-लेबनान समझौते पर हिज़्बुल्लाह का विरोध, अमेरिकी मध्यस्थता के बावजूद तनाव बरकरार
अमेरिका की मध्यस्थता में हुए ढांचागत समझौते को हिज़्बुल्लाह ने 'आत्मसमर्पण' बताया, जबकि इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखी।
26 जून को वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्रालय में इज़राइल और लेबनान के राजदूतों ने एक ढांचागत समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दक्षिणी लेबनान में गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के निरस्त्रीकरण के बदले इज़राइली सेना की चरणबद्ध वापसी का मार्ग प्रशस्त किया गया। समझौते के तुरंत बाद हिज़्बुल्लाह ने इसे 'शून्य और अमान्य' घोषित कर दिया, जबकि इज़राइली सेना ने रविवार रात दक्षिणी लेबनान में 200 मीटर लंबी सुरंग को नष्ट करने और नबातियेह समेत कई स्थानों पर हवाई हमले करने की पुष्टि की।
लेबनानी सरकार ने इस समझौते को संप्रभुता की बहाली की दिशा में पहला कदम बताया। राष्ट्रपति जोसेफ आऊन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर उम्मीद जताई कि वाशिंगटन इज़राइल पर वापसी का दबाव बनाएगा, जबकि रक्षा मंत्री मिशेल मेनासा ने कहा कि सेना सभी मिलिशिया को निरस्त्र करने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे 'ऐतिहासिक उपलब्धि' और ईरान-हिज़्बुल्लाह के लिए झटका करार दिया, और रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने स्पष्ट किया कि जब तक हिज़्बुल्लाह निरस्त्र नहीं होता, सेना विस्तारित सुरक्षा क्षेत्र में बनी रहेगी।
हिज़्बुल्लाह और उसके सहयोगी संसद अध्यक्ष नबीह बेरी ने समझौते को 'हुक्मनामा' बताते हुए चेतावनी दी कि यह लेबनानी समाज में आंतरिक टकराव को भड़का सकता है। बेरी ने अल-अखबार अखबार से कहा कि इज़राइली कब्जे को समाप्त करने का एकमात्र यथार्थवादी रास्ता ईरान-अमेरिका वार्ता है, और लेबनान को इस ट्रैक से अलग करने का कोई भी प्रयास कब्जे को लम्बा खींचेगा। हिज़्बुल्लाह ने एक बयान में कहा कि वह अब तक युद्धविराम का पालन करता रहा है, लेकिन इज़राइली उल्लंघनों पर नज़र रख रहा है और 'अपनी मातृभूमि और लोगों की रक्षा का अधिकार सुरक्षित रखता है'।
विश्लेषकों के अनुसार, समझौते का ढांचा ही असंभव शर्त पर टिका है—हिज़्बुल्लाह का सत्यापन योग्य निरस्त्रीकरण—जिसे लेबनानी सेना लागू करने में सक्षम नहीं है। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के फवाज़ गेर्गेस ने इसे 'जन्म से मृत' बताया, जबकि बेरूत स्थित विश्लेषक माइकल यंग ने कहा कि यह समझौता सारा बोझ लेबनान पर डालता है और इज़राइल को अनिश्चितकाल तक दक्षिणी लेबनान में बने रहने की राजनीतिक वैधता दे सकता है। अमेरिकी मध्यस्थों ने वार्ता के दौरान ईरान के साथ एक 'डीकॉन्फ्लिक्शन सेल' बनाने पर सहमति जताई, जिसे इज़राइली और लेबनानी दोनों अधिकारियों ने ईरान के प्रभाव को वैधता देने वाला कदम माना।
यह संघर्ष 2 मार्च को तब शुरू हुआ जब हिज़्बुल्लाह ने ईरान पर अमेरिकी-इज़राइली हमले के विरोध में इज़राइल पर रॉकेट दागे। अब तक लेबनान में 4,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और दस लाख से अधिक विस्थापित हुए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि इज़राइल-लेबनान वार्ता मंगलवार सुबह फिर शुरू होगी, जिसमें सुरक्षा अनुबंध और पायलट ज़ोन से इज़राइली वापसी जैसे विवरणों पर बातचीत होगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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दक्षिणी लेबनान में एक सटीक ऑपरेशन ने हिजबुल्लाह की सुरंग को नष्ट कर दिया, जिससे इजरायल की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा समाप्त हो गया। अमेरिका को पहले से सूचित किया गया था, जो एक समन्वित और वैध प्रयास को रेखांकित करता है। यह हमला राजनयिक वार्ता जारी रहने के बावजूद आतंकी बुनियादी ढांचे को बेअसर करने के संकल्प को दर्शाता है।
इजरायली सेना ने अमेरिका की मध्यस्थता वाले त्रिपक्षीय शांति समझौते के कुछ ही दिनों बाद दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया। इस समय-सीमा से राजनयिक ढांचे की व्यवहार्यता पर सवाल उठते हैं। हमला, भले ही एक सुरंग को निशाना बनाकर किया गया हो, नाजुक युद्धविराम को कमजोर करने का जोखिम पैदा करता है।
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