
चार जीवाश्म अध्ययनों ने खोले प्राचीन जीवन के नए रहस्य: बिच्छू, पक्षी, डायनासोर और होबिट
जर्मनी, ब्रिटेन, चीन और थाईलैंड की टीमों ने हाल के सप्ताहों में प्री-केम्ब्रियन बिच्छू से लेकर होमो फ्लोरेसिएंसिस तक ऐसे चार अध्ययन प्रस्तुत किए जो विकास और व्यवहार की पुरानी मान्यताओं को चुनौती देते हैं।
पृथ्वी पर जीवन के इतिहास के अलग-अलग अध्यायों को एक साथ खोलते हुए चार नए जीवाश्म अध्ययनों ने पुराजीव वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। इनमें 41.5 करोड़ साल पुराने विशाल बिच्छू की पुनर्वर्गीकरण, चीन से जुरासिक काल की सबसे छोटी लंबी-पूंछ वाली चिड़िया, थाईलैंड में मिला 11.3 करोड़ साल पुराना विशालकाय सॉरोपॉड डायनासोर, और इंडोनेशिया की गुफा से होमो फ्लोरेसिएंसिस के मांसाहारी व्यवहार पर नई रोशनी डालने वाला अध्ययन शामिल हैं।
सबसे पुराने अवशेषों की बात करें तो ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने 1870 में मिले जीवाश्मों की दोबारा जाँच कर एक नई प्रजाति प्रीआर्कट्यूरस गाइगस की पहचान की है। कंप्यूटेड टोमोग्राफी जैसी आधुनिक तकनीक की मदद से यह स्पष्ट हुआ कि यह एक विशाल बिच्छू था, जिसके पंजे 16 सेंटीमीटर और कुल लंबाई एक मीटर तक थी। डेवोनियन काल का यह अर्ध-जलीय शिकारी, उस दौर का शीर्ष शिकारी माना जा रहा है जब जीवन समुद्र से ज़मीन की ओर बढ़ रहा था। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह शायद ज़मीन पर केवल केंचुली बदलने या शिकार ढूँढने आता था।
चीन के फ़ुज़ियान प्रांत से मिले जुरासिक पक्षी झेंगहेओर्निस बुयू का केवल एक ही जीवाश्म है, लेकिन साइंस एडवांसेस में प्रकाशित अध्ययन बताता है कि केवल 20 सेंटीमीटर लंबे और 74-163 ग्राम भारी इस पंछी में 15 छोटी पूँछ की कशेरुकाएँ थीं, जो आधुनिक पक्षियों की तरह पिगोस्टाइल (जुड़ी हुई हड्डी) में नहीं बदली थीं। यह पहला ठोस सबूत है कि पूँछ का छोटा होना और कशेरुकाओं की संख्या घटना, हड्डियों के जुड़ने से पहले विकसित हुआ। वहीं, थाईलैंड के चैइयाफूम प्रांत में 2016 में मिले नागाटाइटन चैइयाफूमेंसिस के 11.3 करोड़ साल पुराने अवशेषों से पता चला कि 27 मीटर लंबा और 30 टन भारी यह सॉरोपॉड, एशिया में स्वतंत्र रूप से विशालता तक पहुँचने वाली एक नई शाखा का प्रतिनिधि है। उस समय का गर्म और खुला वातावरण ऐसे जीवों के लिए अनुकूल था।
सबसे हाल के भूगर्भीय कालखंड का उदाहरण इंडोनेशिया के फ़्लोरेस द्वीप की लियांग बुआ गुफा से जुड़ा है। जर्मन पुरामानवविज्ञानी एलिजाबेथ ग्रेस वीच के नेतृत्व में साइंस एडवांसेस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, स्टेगोडोन हड्डियों पर कटाव के निशानों की तुलना कोमोडो ड्रैगन के दाँतों के निशानों से करने पर पता चला कि होमो फ्लोरेसिएंसिस मुख्यतः मृतजीवी (मांसाहार छोड़े हुए) थे, न कि बड़े शिकार करने वाले सक्रिय शिकारी। अध्ययन ने आग के उपयोग के दावों को भी खारिज किया क्योंकि अंगारों वाली परतें बाद के आधुनिक मानव काल की निकलीं। फिर भी, लगभग दस लाख साल तक एकांत द्वीप पर विशाल छिपकलियों के बीच जीवित रह पाना अपने आप में अनुकूलन की अद्भुत मिसाल है।
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