
कांगो में इबोला से 473 मौतें, WHO ने बुंडीबुग्यो वायरस के पहले आणविक परीक्षण को मंजूरी दी
पूर्वी कांगो में तेजी से फैलते बुंडीबुग्यो इबोला प्रकोप में अब तक 1500 से अधिक संक्रमित, युगांडा और फ्रांस में भी मामले, वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने गुणवत्ता-सुनिश्चित डायग्नोस्टिक को आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल किया।
4 जुलाई 2026 तक कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में बुंडीबुग्यो इबोला वायरस (BDBV) के प्रकोप ने 473 लोगों की जान ले ली है और 1,502 संक्रमणों की पुष्टि हुई है—यह इस दुर्लभ किस्म का अब तक का सबसे बड़ा प्रकोप है। युगांडा में 20 मामले और दो मौतें दर्ज हुईं, जबकि फ्रांस में कांगो के इटूरी प्रांत से लौटे एक चिकित्सक में संक्रमण की पुष्टि हुई, जो इस महामारी का पहला अंतरमहाद्वीपीय प्रसार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 15 जून को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित कर दिया था।
इसी बीच, 2 जुलाई को WHO ने बुंडीबुग्यो वायरस के लिए पहले आणविक निदान परीक्षण को आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) में शामिल किया। यह परीक्षण रक्त के नमूनों में वायरस की आनुवंशिक सामग्री की पहचान कर संक्रमण की तेजी और सटीकता से पुष्टि करता है। अभी तक BDBV के लिए कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट उपचार नहीं है, और मलेरिया जैसी बीमारियों से इसे अलग करना बिना प्रयोगशाला जांच के मुश्किल है। WHO के सहायक महानिदेशक ने कहा कि तेज़ी से फैलते प्रकोप में गुणवत्ता-सुनिश्चित डायग्नोस्टिक तक समय पर पहुँच संक्रमण की रोकथाम में निर्णायक हो सकती है।
प्रकोप का केंद्र कांगो के संघर्षग्रस्त पूर्वी प्रांत इटूरी, उत्तरी कीवू और दक्षिणी कीवू हैं, जहाँ सशस्त्र गुटों की सक्रियता और खनन क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही ने निगरानी को जटिल बना दिया है। 10,800 से अधिक संपर्कों पर नज़र रखी जा रही है, और 102 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं जिनमें 25 की मृत्यु हुई। सरकार ने राजधानी किंशासा समेत कई प्रांतों में सामूहिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिका ने कांग्रेस से 1.4 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि माँगी है जिसमें कीनिया में संगरोध केंद्र बनाना शामिल है; रूस ने युगांडा में जांच प्रणाली और मोबाइल प्रयोगशालाएँ भेजी हैं।
वैश्विक जोखिम मूल्यांकन में WHO ने कांगो में संक्रमण जोखिम को 'बहुत उच्च', पड़ोसी देशों में 'उच्च' और वैश्विक स्तर पर 'निम्न' रखा है, किंतु फ्रांस का मामला अंतरराष्ट्रीय सतर्कता की ज़रूरत को रेखांकित करता है। दक्षिण एशिया में अभी कोई मामला नहीं है, फिर भी भारत जैसे देशों में अफ्रीका से आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जाँच बढ़ा दी गई है। अगले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि क्या इस प्रकोप को सीमित किया जा सकता है—इस दिशा में आगे और डायग्नोस्टिक्स की EUL समीक्षा तथा सामुदायिक सहभागिता वाले रोकथाम उपायों की सफलता पर सबकी निगाहें होंगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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भारतीय ब्लॉक बुंडीबुग्यो वायरस के लिए पहले आणविक परीक्षण की WHO की मंजूरी को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उजागर करता है। यह तकनीकी पहलुओं और तेजी से निदान की संभावना पर ध्यान केंद्रित करता है, आसपास की महामारी की गंभीरता को कम करता है।
उप-सहारा अफ्रीकी ब्लॉक इबोला प्रकोप को तेजी से बढ़ते क्षेत्रीय संकट के रूप में चित्रित करता है, इसके युगांडा और फ्रांस में फैलने पर जोर देता है। यह संघर्षग्रस्त पूर्वी कांगो पर दबाव और व्यापक स्वास्थ्य आपातकाल की संभावना पर अलार्म बजाता है।
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