
मिस्र में बीजान्टिनकालीन शहर और 2,000 साल पुरानी कब्रों की खोज
दाखला ओएसिस में चौथी शताब्दी का सुनियोजित बीजान्टिन शहर और मरीना अल-अलामीन में स्वर्ण-जीभ सहित 18 कब्रें मिलीं, जो मिस्र की प्राचीन विरासत और आर्थिक-धार्मिक जीवन को उजागर करती हैं।
मिस्र के पश्चिमी रेगिस्तान में स्थित दाखला नखलिस्तान में पुरातत्वविदों ने चौथी शताब्दी ईस्वी का एक सुनियोजित बीजान्टिनकालीन आवासीय शहर खोज निकाला है। मिस्र की सर्वोच्च पुरावशेष परिषद के महासचिव हिशाम अल-लीथी के अनुसार, उत्खनित क्षेत्र में उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दिशाओं में कटी सड़कें, खुले चौराहे और सार्वजनिक स्थल हैं। बीचोबीच मध्य-चौथी शताब्दी का एक बासिलिका गिरजाघर स्थित है, जिसके पास दो प्रहरी मीनारों के अवशेष भी मिले हैं। मिशन प्रमुख महमूद मसूद ने बताया कि यहाँ मोटी रक्षात्मक दीवारों वाला किल़ाबंद ढाँचा, स्वागत-कक्षों और मेहराबदार छतों वाले कई मकान, और रोटी पकाने की भट्टियाँ, रसोईघर तथा अनाज पीसने के उपकरण भी प्राप्त हुए हैं।
इस शहर से करीब 200 ओस्ट्राका (लिखाई के लिए उपयोग किए जाने वाले मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े) मिले हैं, जिन पर कॉप्टिक और यूनानी भाषाओं में व्यावसायिक लेन-देन, पत्राचार और दैनिक जीवन का विवरण अंकित है। इस्लामी, कॉप्टिक और यहूदी पुरावशेष विभाग के प्रमुख डिया ज़हरान के अनुसार ये लेख इस दुर्गम नखलिस्तान में चौथी शताब्दी की आर्थिक और सामाजिक संरचना का दुर्लभ प्रमाण हैं। साथ ही, बीजान्टिन सम्राटों के चित्र और लैटिन अभिलेखों वाले कांसे के सिक्के तथा सम्राट कॉन्स्टैंटियस द्वितीय (337-361 ई.) के काल के स्वर्ण सिक्के भी मिले हैं। पुरातत्वविदों का मानना है कि यहाँ एक डीकन टिसूस का घर पहले गृह-गिरजाघर के रूप में इस्तेमाल होता था।
दूसरी ओर, भूमध्य सागर तट पर अलेक्जेंड्रिया से लगभग 100 किलोमीटर पश्चिम में मरीना अल-अलामीन स्थल पर 18 प्राचीन कब्रें मिली हैं। इनमें 11 चट्टान काटकर बनाई गई (औसतन 8 मीटर गहरी) और 7 सतही चूना-पत्थर से निर्मित कब्रें शामिल हैं, जिससे इस स्थल पर ज्ञात कब्रों की कुल संख्या 48 हो गई है। मिशन प्रमुख ईमान अब्देल-खालिक ने बताया कि कई शवों के मुँह में 24 स्वर्ण-जीभ रखी गई थीं, जो उस काल की मृत्युपरांत आत्मा की दिव्य संवाद क्षमता से जुड़ी मान्यता को दर्शाती है। एक 2.5 मीटर लंबा ग्रेनाइट का पाषाण-शवाधार (सार्कोफेगस), प्लास्टर की स्फिंक्स प्रतिमा, मिट्टी के बर्तन, एम्फोरा, दीपक, वेदिकाएँ और चूना-पत्थर के बेसिन भी मिले हैं। पुरातत्ववेत्ता इस स्थल की पहचान प्राचीन यूनानी-रोमन बंदरगाह शहर ल्यूकास्पिस से करते हैं, जो हेलेनिस्टिक काल से बीजान्टिन युग तक फलता-फूलता रहा।
मिस्र का पर्यटन एवं पुरावशेष मंत्रालय इन खोजों को देश की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करने और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के रूप में देखता है। स्वेज़ नहर के साथ-साथ पर्यटन मिस्र के लिए विदेशी मुद्रा का एक अहम स्रोत है, जो इस समय आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। दाखला नखलिस्तान पहले ही यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल है और जल्द ही विश्व धरोहर स्थल बन सकता है। आगामी चरणों में कब्रों से प्राप्त अस्थि-अवशेषों पर डीएनए और समस्थानिक विश्लेषण किया जाएगा ताकि प्राचीन आबादी की जनसांख्यिकी और गतिशीलता को समझा जा सके। मरीना अल-अलामीन और दाखला दोनों स्थलों पर उत्खनन एवं संरक्षण कार्य जारी रहेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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A well-preserved Byzantine-era city in Egypt's western desert, along with ancient tombs near Alexandria, are presented as key discoveries that can revitalize the country's tourism sector. The finds are framed as economic opportunities for a cash-strapped nation, with the government highlighting their potential to attract visitors.
Indonesian news reports the discovery of a lost Byzantine-era city in the Dakhla Oasis, detailing its organized streets, Christian basilica, and mud-brick houses. The narrative is purely descriptive, focusing on the archaeological findings without linking them to tourism or economic benefits.
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