
ईरान संघर्ष के बीच सोने में उतार-चढ़ाव, तेल उछला, फेड मिनट्स पर निगाहें
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम समाप्त करने की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में उछाल और मुद्रास्फीति की आशंकाओं ने सोने की चाल को प्रभावित किया, जबकि बाजार फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर संकेतों की प्रतीक्षा कर रहा है।
बुधवार को वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ अंतरिम शांति समझौते को 'समाप्त' घोषित करने के तुरंत बाद हाजिर सोना 1.4% से अधिक गिरकर 4,049 डॉलर प्रति औंस के एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। हालांकि, बाद में इसमें आंशिक सुधार हुआ और यह 0.5-0.6% बढ़कर 4,125 डॉलर के आसपास पहुंच गया। अमेरिकी वायदा बाजार में अगस्त डिलीवरी अनुबंध 0.4-2.3% की गिरावट के साथ 4,136-4,059 डॉलर की रेंज में कारोबार करता रहा।
इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल है। ट्रंप की घोषणा और उसके बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा बहरीन व कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की खबरों से ब्रेंट क्रूड 5-6% चढ़कर 78.77 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। ऊर्जा कीमतों में यह उछाल मुद्रास्फीति के दोबारा भड़कने की आशंका को बल देता है, जिससे केंद्रीय बैंकों, विशेषकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व, को ब्याज दरें ऊंची रखने या और बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
यूरोपीय और अमेरिकी विश्लेषकों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव का प्रीमियम पहले से ही सोने की कीमत में शामिल था, इसलिए नए तनाव से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने के बजाय पोजीशन एडजस्टमेंट का दौर चला। आईएनजी बैंक की रणनीतिकार ईवा मैंथी ने कहा कि आगे सोने की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि घटनाक्रम निवेशकों की पोजीशनिंग, बॉन्ड यील्ड और बाजार की धारणा को कैसे प्रभावित करते हैं। फरवरी के अंत में ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से सोना 20% से अधिक गिर चुका है, और हाल ही में यह 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे भी गया था।
सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार ने सितंबर में अमेरिकी ब्याज दर वृद्धि की संभावना को मंगलवार के 57-62% से बढ़ाकर 63-68% कर दिया है। मजबूत डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड ने भी गैर-प्रतिफल वाली सोने जैसी धातु पर दबाव डाला। इस बीच, चांदी 2-2.6% गिरकर 58.45-58.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम में भी 4% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
अब सभी की निगाहें भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे (1800 GMT) जारी होने वाले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की 16-17 जून की बैठक के मिनट्स पर टिकी हैं। नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के नेतृत्व में हुई इस बैठक के ब्योरे से आगे की मौद्रिक नीति की दिशा पर संकेत मिल सकते हैं, जो सोने की अल्पकालिक चाल तय करेगा।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.20 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.20 | neutral |
Russia interprets the gold drop as a mechanical reaction to the broken deal and Fed expectations, without attributing weight to military tensions.
The mechanism reduces geopolitical complexity to market factors, making the event manageable through technical analysis.
The surge in oil prices and its inflationary implications are not mentioned.
Latin America sees the return of war as an immediate threat to markets, amplifying fear of higher rates and inflation.
The mechanism is emotional escalation: starting from a military event to build a chain of economic fears, without offering contextual data.
The subsequent recovery of gold prices and the anticipation of Fed minutes are absent.
Iran observes that US attacks prevent a greater rise in gold, highlighting Washington's negative role without explicit condemnation.
The mechanism minimizes the adversary: US attacks are described as a limiting factor, not a cause of crisis, reducing their significance.
The context of the breakdown of the US-Iran peace deal is not mentioned.
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