
केन्या, मेक्सिको, फिलीपींस और नाइजीरिया में पुलिस कार्रवाई और बाल शोषण के मामलों की जांच
विभिन्न देशों में हाल के दिनों में पुलिस हिंसा, प्रताड़ना और बच्चों के शोषण से जुड़ी घटनाओं ने मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय प्रशासन को जांच के लिए प्रेरित किया है।
केन्या के नाकुरू में पुलिस ने बैसाखी के सहारे चलने वाले जेम्स थुकू को हिंसक ढंग से गिरफ्तार किया। सीनेटर क्रिस्टल असीगे के अनुसार, थुकू पर हिंसा भड़काने का आरोप है और उन्हें नाकुरू सेंट्रल पुलिस स्टेशन में रखा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अधिकारी उन्हें सड़क पर घसीटते और पुलिस वाहन में फेंकते दिखे। सीनेटर ने राष्ट्रीय पुलिस सेवा से स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि स्थानीय मानवाधिकार समूहों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।
मेक्सिको के कोलिमा राज्य में कोकीमात्लान नगर पुलिस के सदस्यों पर एक बंदी को प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। 17 सेकंड के एक वीडियो में हथकड़ी लगाए व्यक्ति के चेहरे पर कपड़ा रखकर पानी डाला जाता दिखा। राज्य मानवाधिकार आयोग (सीडीएचई) ने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि करते हुए जांच शुरू की और नगर प्रशासन को 24 घंटे में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। पीड़ित की पहचान गैब्रियल एन. के रूप में हुई है। नगर सरकार ने कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई आरंभ करने की बात कही है, और यातना-रोधी विशेष अभियोजक भी मामले की जांच कर रहा है।
फिलीपींस में ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस और फिलीपीन राष्ट्रीय पुलिस के संयुक्त प्रयास से छह बच्चों को कथित यौन शोषण से बचाया गया। यह कार्रवाई पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के 53 वर्षीय एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद हुई, जिस पर बच्चों से यौन गतिविधि कराने की तैयारी और बाल शोषण सामग्री रखने के आरोप हैं। पर्थ हवाई अड्डे पर उसके फोन से मिली सूचनाओं के आधार पर स्थानीय अधिकारियों ने बचाव अभियान चलाया।
नाइजीरिया के अनाम्ब्रा राज्य में पुलिस ने एक दंपति को 10 वर्षीय बालक के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में रिमांड पर भेजा है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने बच्चे को चिकित्सा सहायता दिलाई और आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसी राज्य के ओबोसी क्षेत्र में एक अस्पताल से नर्स के वेश में नवजात शिशुओं की गुप्त वीडियो रिकॉर्डिंग करती 37 वर्षीय महिला को भीड़ से बचाकर हिरासत में लिया गया; उससे पूछताछ जारी है।
सभी मामलों में संबंधित प्रशासनिक और न्यायिक प्राधिकारियों ने जांच जारी रखने और दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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नाकुरू में एक विकलांग व्यक्ति की हिंसक गिरफ्तारी और अनाम्ब्रा में बाल शोषण के आरोप में एक दंपति की न्यायिक हिरासत ने व्यापक जनाक्रोश पैदा कर दिया है। ये मामले सबसे कमज़ोर लोगों की रक्षा करने वाली संस्थाओं की प्रणालीगत विफलताओं को उजागर करते हैं, जिससे गहरा अविश्वास और जवाबदेही की माँगें बढ़ रही हैं।
कोलिमा के कोकीमातलान में नगर पुलिस द्वारा एक बंदी को वाटरबोर्डिंग से प्रताड़ित करते हुए एक वीडियो सामने आने के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने आधिकारिक जाँच शुरू कर दी है। यह घटना पुलिस की दण्डमुक्ति और यातना के इस्तेमाल पर चिंता को फिर से बढ़ा देती है, भले ही स्थानीय अधिकारी त्वरित कानूनी कार्रवाई का वादा कर रहे हों।
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