
अंकारा नाटो शिखर: खर्च व ईरान पर दरार, कनाडा का रक्षा बैंक प्रस्ताव
अमेरिकी दबाव और यूरोपीय स्वायत्तता की कोशिशों के बीच कनाडा दस देशों के साथ वैश्विक रक्षा बैंक की घोषणा कर सकता है।
तुर्की की राजधानी अंकारा में 7-8 जुलाई को होने वाला नाटो शिखर सम्मेलन गठबंधन के भविष्य के लिए निर्णायक मोड़ बनता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगियों से रक्षा खर्च सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम 5 प्रतिशत करने की मांग दोहराई है और होर्मुज जलडमरूमध्य में नाटो के समुद्री मिशन पर जोर दिया है, जबकि कई यूरोपीय देश ईरान के साथ अमेरिकी सशस्त्र संघर्ष की औपचारिक समाप्ति से पहले ऐसा करने से हिचक रहे हैं। इसी बीच, इटली द्वारा ईरान अभियान के दौरान सिसिली स्थित ठिकानों से अमेरिकी विमानों को ईंधन देने से इनकार करने और ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर सार्वजनिक हमलों ने कूटनीतिक दरार को गहरा दिया है।
यूरोपीय पक्ष ने सुरक्षा की अधिक जिम्मेदारी लेने की बात कही है। यूरोपीय संसद अध्यक्ष रोबर्टा मेत्सोला के अनुसार, “यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ी जिम्मेदारी उठानी होगी” और इटली साझा रक्षा औद्योगिक आधार का स्तंभ है। वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि यदि सहयोगी खर्च लक्ष्य पूरे नहीं करते तो नाटो बजट में अमेरिकी योगदान घटेगा। इस अनिश्चितता के माहौल में कनाडा ने एक समानांतर पहल करते हुए ‘रक्षा, सुरक्षा और प्रत्यास्थता बैंक’ (डीएसआरबी) की स्थापना का प्रस्ताव रखा है। कनाडा की मुख्य वार्ताकार इसाबेल हुदों ने बताया कि करीब दस संस्थापक देशों—मुख्यतः यूरोपीय—के साथ इस बैंक की घोषणा शिखर सम्मेलन में की जा सकती है, जो सहयोगी राष्ट्रों को 100 अरब पाउंड तक का सस्ता वित्तपोषण उपलब्ध कराएगा।
इन घटनाक्रमों के बीच, यूरोपीय सहयोगी पहले ही अमेरिकी कटौतियों से उपजी कमियों को पाटने लगे हैं। नाटो में अमेरिकी वायुसेना के उप कमांडर जनरल एलेक्सस ग्रिंकेविच के अनुसार, “कुछ ही हफ्तों में यूरोपीय सहयोगियों ने नाटो रक्षा बल मॉडल में अमेरिकी कटौतियों से पैदा अंतराल भर दिए।” यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है जब रूस ने शिखर सम्मेलन से ठीक पहले कीव पर बड़े ड्रोन और मिसाइल हमले में 21 नागरिकों की जान ले ली, और नाटो महासचिव मार्क रूते ने आगाह किया कि मॉस्को पांच साल के भीतर गठबंधन के खिलाफ सैन्य बल प्रयोग को तैयार हो सकता है।
इटली ने एक ओर जहां होर्मुज मिशन पर सतर्क रुख अपनाया है, वहीं रक्षा मंत्री गुइदो क्रोसेतो ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान (यूनिफिल) की जगह एक नए ‘शांति प्रवर्तन’ मिशन में भाग लेने की पेशकश की है, जिसका उद्देश्य हिजबुल्लाह को निशस्त्र करना है। अंकारा शिखर सम्मेलन में इन सभी मुद्दों पर ठोस निर्णय अपेक्षित हैं, हालांकि कनाडाई रक्षा बैंक के लिए पूंजीगत प्रतिबद्धताओं पर अंतिम सहमति अभी बाकी है। यह बैठक तय करेगी कि गठबंधन अमेरिकी दबाव और यूरोपीय स्वायत्तता की आकांक्षाओं के बीच कैसे संतुलन साधता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ
The NATO summit in Ankara is marked by uncertainty: Europe seeks strategic autonomy while Trump issues ultimatums. The article highlights the risk of a unilateral US disengagement and the need for Europe to speak with a united voice, especially on Ukraine.
The NATO summit in Ankara is seen as a threat to Russia, with the alliance seeking to strengthen under US pressure. Russian media emphasize Ukrainian attacks and the need for defense, portraying NATO as the aggressor.
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