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समाज और संस्कृतिशुक्रवार, 19 जून 2026

पितृत्व का बदलता चेहरा: देखभाल, फ़ैशन और एक नई मर्दानगी की कहानी

ब्यूनस आयर्स के एक प्लाज़ा से लेकर मेक्सिको सिटी के दफ़्तरों और जकार्ता के पॉडकास्ट स्टूडियो तक, पिता होने का अर्थ देखभाल, भावनात्मक उपलब्धता और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी क्रांतियों के ज़रिए नए सिरे से लिखा जा रहा है।

ब्यूनस आयर्स के एक पार्क में रविवार की दोपहर, एक महिला झूले के पास खड़े एक पिता को देखती है। वह अपने बच्चे के साथ हँस रहा है, उसे हवा में उछाल रहा है, और उसकी आँखों में एक ऐसी मौजूदगी है जो सिर्फ़ 'प्रोवाइडर' की नहीं, बल्कि साथी की है। अर्जेंटीना के दैनिक क्लारीन की एक लेखिका ने स्वीकार किया कि ऐसे 'अच्छे पिता' उन्हें अनिवार्य रूप से आकर्षित करते हैं — यह कोई नई बात नहीं, बल्कि पितृत्व की परिभाषा में आए उस बदलाव की गवाही है जो पिछले सौ सालों में धीरे-धीरे आकार ले रहा है। ठीक एक सदी पहले, अमेरिका में सोनोरा स्मार्ट डॉड नामक एक महिला ने अपने विधुर पिता, जिन्होंने अकेले छह बच्चों की परवरिश की थी, के सम्मान में फ़ादर्स डे की शुरुआत की थी। तब पिता का अर्थ मुख्यतः अनुशासन, उत्तराधिकार और आर्थिक सुरक्षा था। आज, लैटिन अमेरिकी, यूरोपीय, एशियाई और अफ़्रीकी समाजों में पिता की भूमिका एक गहरे पुनर्निर्धारण के दौर से गुज़र रही है।

मेक्सिको के अख़बार एल फ़िनानसिएरो ने हाल ही में लिखा कि एक नई पीढ़ी के पुरुष देखभाल को अपनी पहचान का केंद्र बना रहे हैं — वे दफ़्तर से जल्दी छुट्टी माँगते हैं, नवजात को गोद में लेने का सही तरीक़ा पूछते हैं, और घर के ख़र्चों की योजना बनाने में बराबर के हिस्सेदार बनते हैं। यह कोई अचानक आया तूफ़ान नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के छोटे-छोटे इशारों की एक ख़ामोश लहर है। इंडोनेशिया के एक पॉडकास्ट में बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. इख़सान ने ज़ोर देकर कहा कि पिता की मौजूदगी भरोसे पर टिकी होनी चाहिए, ज़बरदस्ती पर नहीं — चाहे वह सौतेला पिता ही क्यों न हो। जर्मनी के फ़्रैंकफ़ुर्टर आलगेमाइने ज़ाइटुंग ने माता-पिता को सलाह दी कि बच्चे से ग़लती मान लेना, 'मुझे अफ़सोस है' कह देना, रिश्ते को कमज़ोर नहीं करता बल्कि सुरक्षित बनाता है। शोध बताते हैं कि पिता की सक्रिय भागीदारी बच्चों के संज्ञानात्मक और भावनात्मक विकास को मज़बूत करती है, और ख़ुद पिता भी अपने जीवन से अधिक संतुष्टि की रिपोर्ट करते हैं।

लेकिन यह बदलाव बिना प्रतिरोध के नहीं आ रहा। अमेरिकी कंज़र्वेटिव टिप्पणीकार एलेक्स बेरेनसन ने फ़ॉक्स न्यूज़ पर लिखा कि 'सौम्य पेरेंटिंग' (जेंटल पेरेंटिंग) का चलन पिताओं को बुनियादी अनुशासन से भी हतोत्साहित करता है, और सांस्कृतिक अभिजात वर्ग पितृत्व का लगातार मज़ाक उड़ा रहा है। उन्होंने एक 'पितृत्व घोषणापत्र' जारी किया जिसमें स्टोइक मर्दानगी और आत्म-अनुशासन की वकालत की गई। वहीं, घाना की एक स्तंभकार ब्रिजेट मेन्साह ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि नारीवाद पुरुषों से नफ़रत नहीं है; यह उसी पितृसत्तात्मक व्यवस्था के ख़िलाफ़ है जो पुरुषों को भी रोने, मदद माँगने या कमाने में पत्नी से पीछे रहने पर असफल महसूस कराती है। उन्होंने आँकड़े दिए कि वैश्विक लैंगिक अंतर को पूरी तरह पाटने में अभी 123 साल लग सकते हैं। इसी अख़बार ने एक 'मज़बूत महिला' के साथ रिश्ते के फ़ायदे गिनाए और एक 'बहुत अच्छी लड़की' की संवेदनशीलता की कहानी छापी — दोनों ही इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आधुनिक रिश्तों में पारंपरिक भूमिकाएँ लगातार पुनर्परिभाषित हो रही हैं।

यह पुनर्परिभाषा अब कपड़ों और शरीर की छवि तक पहुँच गई है। दुबई के गल्फ़ न्यूज़ ने 2026 के आधुनिक पिता की अलमारी का ख़ाका खींचा: आरामदायक लेकिन सुव्यवस्थित ओवरशर्ट, सीधी-ढीली चीनो पैंट, और ऐसे स्नीकर्स जो दिन भर बच्चे के पीछे दौड़ने और शाम की मीटिंग दोनों में चल सकें। यह कोई अलग 'डैड वॉर्डरोब' नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रणाली है जो ज़िंदगी की अप्रत्याशित लय के साथ बहती है। क्लारीन की लेखिका ने भी माना कि जिम में घंटों बिताकर बनाई गई सुडौल काया से ज़्यादा आकर्षक वह 'डैड बॉड' है — थोड़ी तोंद, थोड़ी ढील, जो यह बताती है कि इस आदमी के पास वक़्त बच्चे की परवरिश में लगा है, आईने के सामने नहीं।

ला नासियोन अख़बार ने पितृत्व को 'एक अपूर्ण और बिना स्कूल का पेशा' कहा, जो न कभी रिटायर होता है और न ही कभी पूरी तरह सीखा जा सकता है। शायद यही वजह है कि ब्यूनस आयर्स के उस पार्क में खड़ी महिला की निगाहें उस पिता पर ठहर जाती हैं — न सिर्फ़ इसलिए कि वह एक 'अच्छा पिता' है, बल्कि इसलिए कि वह एक ऐसे भविष्य का चेहरा है जो अभी आकार ले रहा है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

49%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
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allarmerevanscismo

जकार्ता का पॉडकास्ट जो नई पितृत्व को बढ़ावा देता है, वह कोमल पालन-पोषण के उस चलन का एक और उदाहरण है जो पारंपरिक ताकत को कमज़ोर करता है। दशकों से मीडिया और शैक्षिक अभिजात वर्ग ने पिताओं का उपहास किया है, लेकिन बच्चों को अनुशासन और लचीलेपन की ज़रूरत होती है जो केवल एक मज़बूत पिता ही दे सकता है। अब समय है पुरुषत्व पर हमले के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का।

Stampa latinoamericana
trionfopragmatismo

जकार्ता का पॉडकास्ट एक शांत लेकिन गहन बदलाव का हिस्सा है: पुरुषों की एक नई पीढ़ी जो देखभाल को अपनी पहचान का केंद्र बना रही है। पितृत्व अब केवल विरासत और अधिकार के बारे में नहीं है, बल्कि उपस्थिति, भावनात्मक जुड़ाव और रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कामों के बारे में है। यह परिवर्तन पिता होने के अर्थ को फिर से परिभाषित कर रहा है।

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अपडेट 03:08 pm2 भाषाएँ · 4 स्रोत
पिछलासमाज और संस्कृतिअगला
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शुक्रवार, 19 जून 2026

पितृत्व का बदलता चेहरा: देखभाल, फ़ैशन और एक नई मर्दानगी की कहानी

ब्यूनस आयर्स के एक प्लाज़ा से लेकर मेक्सिको सिटी के दफ़्तरों और जकार्ता के पॉडकास्ट स्टूडियो तक, पिता होने का अर्थ देखभाल, भावनात्मक उपलब्धता और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी क्रांतियों के ज़रिए नए सिरे से लिखा जा रहा है।

ब्यूनस आयर्स के एक पार्क में रविवार की दोपहर, एक महिला झूले के पास खड़े एक पिता को देखती है। वह अपने बच्चे के साथ हँस रहा है, उसे हवा में उछाल रहा है, और उसकी आँखों में एक ऐसी मौजूदगी है जो सिर्फ़ 'प्रोवाइडर' की नहीं, बल्कि साथी की है। अर्जेंटीना के दैनिक क्लारीन की एक लेखिका ने स्वीकार किया कि ऐसे 'अच्छे पिता' उन्हें अनिवार्य रूप से आकर्षित करते हैं — यह कोई नई बात नहीं, बल्कि पितृत्व की परिभाषा में आए उस बदलाव की गवाही है जो पिछले सौ सालों में धीरे-धीरे आकार ले रहा है। ठीक एक सदी पहले, अमेरिका में सोनोरा स्मार्ट डॉड नामक एक महिला ने अपने विधुर पिता, जिन्होंने अकेले छह बच्चों की परवरिश की थी, के सम्मान में फ़ादर्स डे की शुरुआत की थी। तब पिता का अर्थ मुख्यतः अनुशासन, उत्तराधिकार और आर्थिक सुरक्षा था। आज, लैटिन अमेरिकी, यूरोपीय, एशियाई और अफ़्रीकी समाजों में पिता की भूमिका एक गहरे पुनर्निर्धारण के दौर से गुज़र रही है।

मेक्सिको के अख़बार एल फ़िनानसिएरो ने हाल ही में लिखा कि एक नई पीढ़ी के पुरुष देखभाल को अपनी पहचान का केंद्र बना रहे हैं — वे दफ़्तर से जल्दी छुट्टी माँगते हैं, नवजात को गोद में लेने का सही तरीक़ा पूछते हैं, और घर के ख़र्चों की योजना बनाने में बराबर के हिस्सेदार बनते हैं। यह कोई अचानक आया तूफ़ान नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के छोटे-छोटे इशारों की एक ख़ामोश लहर है। इंडोनेशिया के एक पॉडकास्ट में बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. इख़सान ने ज़ोर देकर कहा कि पिता की मौजूदगी भरोसे पर टिकी होनी चाहिए, ज़बरदस्ती पर नहीं — चाहे वह सौतेला पिता ही क्यों न हो। जर्मनी के फ़्रैंकफ़ुर्टर आलगेमाइने ज़ाइटुंग ने माता-पिता को सलाह दी कि बच्चे से ग़लती मान लेना, 'मुझे अफ़सोस है' कह देना, रिश्ते को कमज़ोर नहीं करता बल्कि सुरक्षित बनाता है। शोध बताते हैं कि पिता की सक्रिय भागीदारी बच्चों के संज्ञानात्मक और भावनात्मक विकास को मज़बूत करती है, और ख़ुद पिता भी अपने जीवन से अधिक संतुष्टि की रिपोर्ट करते हैं।

लेकिन यह बदलाव बिना प्रतिरोध के नहीं आ रहा। अमेरिकी कंज़र्वेटिव टिप्पणीकार एलेक्स बेरेनसन ने फ़ॉक्स न्यूज़ पर लिखा कि 'सौम्य पेरेंटिंग' (जेंटल पेरेंटिंग) का चलन पिताओं को बुनियादी अनुशासन से भी हतोत्साहित करता है, और सांस्कृतिक अभिजात वर्ग पितृत्व का लगातार मज़ाक उड़ा रहा है। उन्होंने एक 'पितृत्व घोषणापत्र' जारी किया जिसमें स्टोइक मर्दानगी और आत्म-अनुशासन की वकालत की गई। वहीं, घाना की एक स्तंभकार ब्रिजेट मेन्साह ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि नारीवाद पुरुषों से नफ़रत नहीं है; यह उसी पितृसत्तात्मक व्यवस्था के ख़िलाफ़ है जो पुरुषों को भी रोने, मदद माँगने या कमाने में पत्नी से पीछे रहने पर असफल महसूस कराती है। उन्होंने आँकड़े दिए कि वैश्विक लैंगिक अंतर को पूरी तरह पाटने में अभी 123 साल लग सकते हैं। इसी अख़बार ने एक 'मज़बूत महिला' के साथ रिश्ते के फ़ायदे गिनाए और एक 'बहुत अच्छी लड़की' की संवेदनशीलता की कहानी छापी — दोनों ही इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आधुनिक रिश्तों में पारंपरिक भूमिकाएँ लगातार पुनर्परिभाषित हो रही हैं।

यह पुनर्परिभाषा अब कपड़ों और शरीर की छवि तक पहुँच गई है। दुबई के गल्फ़ न्यूज़ ने 2026 के आधुनिक पिता की अलमारी का ख़ाका खींचा: आरामदायक लेकिन सुव्यवस्थित ओवरशर्ट, सीधी-ढीली चीनो पैंट, और ऐसे स्नीकर्स जो दिन भर बच्चे के पीछे दौड़ने और शाम की मीटिंग दोनों में चल सकें। यह कोई अलग 'डैड वॉर्डरोब' नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रणाली है जो ज़िंदगी की अप्रत्याशित लय के साथ बहती है। क्लारीन की लेखिका ने भी माना कि जिम में घंटों बिताकर बनाई गई सुडौल काया से ज़्यादा आकर्षक वह 'डैड बॉड' है — थोड़ी तोंद, थोड़ी ढील, जो यह बताती है कि इस आदमी के पास वक़्त बच्चे की परवरिश में लगा है, आईने के सामने नहीं।

ला नासियोन अख़बार ने पितृत्व को 'एक अपूर्ण और बिना स्कूल का पेशा' कहा, जो न कभी रिटायर होता है और न ही कभी पूरी तरह सीखा जा सकता है। शायद यही वजह है कि ब्यूनस आयर्स के उस पार्क में खड़ी महिला की निगाहें उस पिता पर ठहर जाती हैं — न सिर्फ़ इसलिए कि वह एक 'अच्छा पिता' है, बल्कि इसलिए कि वह एक ऐसे भविष्य का चेहरा है जो अभी आकार ले रहा है।

स्रोतों में मतभेद

समाज और संस्कृति · 4 स्रोत · 2 भाषाएँ

49%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक57%
निंदक43%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
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Stampa atlantica / anglosfera
allarmerevanscismo

जकार्ता का पॉडकास्ट जो नई पितृत्व को बढ़ावा देता है, वह कोमल पालन-पोषण के उस चलन का एक और उदाहरण है जो पारंपरिक ताकत को कमज़ोर करता है। दशकों से मीडिया और शैक्षिक अभिजात वर्ग ने पिताओं का उपहास किया है, लेकिन बच्चों को अनुशासन और लचीलेपन की ज़रूरत होती है जो केवल एक मज़बूत पिता ही दे सकता है। अब समय है पुरुषत्व पर हमले के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का।

Stampa latinoamericana
trionfopragmatismo

जकार्ता का पॉडकास्ट एक शांत लेकिन गहन बदलाव का हिस्सा है: पुरुषों की एक नई पीढ़ी जो देखभाल को अपनी पहचान का केंद्र बना रही है। पितृत्व अब केवल विरासत और अधिकार के बारे में नहीं है, बल्कि उपस्थिति, भावनात्मक जुड़ाव और रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कामों के बारे में है। यह परिवर्तन पिता होने के अर्थ को फिर से परिभाषित कर रहा है।

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