
एनएसई का ऐतिहासिक आईपीओ: दशक भर की प्रतीक्षा के बाद दाखिल हुए ड्राफ्ट पेपर, 30,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी
भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज अंततः सार्वजनिक होने की राह पर, ऑफर फॉर सेल के तहत 14.89 करोड़ शेयरों की बिक्री से जुटेगी रिकॉर्ड राशि, जबकि एलआईसी ने दीर्घकालिक भरोसे के चलते हिस्सेदारी बेचने से किया इनकार।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने बुधवार रात भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर दिया, जिससे लगभग एक दशक से अटके इस सार्वजनिक निर्गम का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) होगा, जिसमें कोई ताजा शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों—यानी एक्सचेंज की चुकता पूंजी के करीब छह फीसद—की बिक्री से अनुमानित 30,000 करोड़ रुपये (लगभग 3.3 अरब डॉलर) जुटाए जाएंगे। यह राशि अक्टूबर 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 27,859 करोड़ रुपये के आईपीओ को पीछे छोड़ते हुए भारत का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकती है। नियामकीय बाध्यताओं—खासकर को-लोकेशन विवाद—के चलते 2016 में पहली बार दाखिल ड्राफ्ट पेपर वापस लेने पड़े थे, लेकिन अब वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े डेरिवेटिव बाजार का संचालन करने वाला यह एक्सचेंज बीएसई पर सूचीबद्ध होने को तैयार है।
बिक्री करने वाले शेयरधारकों की सूची में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) सबसे आगे है, जो 2.4 करोड़ शेयर बेचेगा। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन, न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस जैसी सात सरकारी संस्थाएं मिलकर लगभग आठ करोड़ शेयर बाजार में उतारेंगी। विदेशी संस्थागत निवेशकों में कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) और अरांडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) भी अपनी हिस्सेदारी घटाएंगे। कुल 23 शेयरधारक इस ओएफएस में भाग ले रहे हैं। दूसरी ओर, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अपनी 10.7 फीसद हिस्सेदारी—जो मार्च 2025 तिमाही में उसके छह सबसे मूल्यवान निवेशों में शुमार थी—को बेचने से साफ इनकार कर दिया है। यह फैसला एक्सचेंज की दीर्घकालिक संभावनाओं पर भरोसे का संकेत है, ठीक वैसे ही जैसे मैथन एलॉयज जैसी छोटी कंपनी की 0.17 फीसद हिस्सेदारी अनलिस्टेड बाजार में 2,055 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 850 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इस खबर का बाजार पर तत्काल असर देखने को मिला। न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयर 14 फीसद उछल गए, जबकि आईएफसीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा और एसबीआई में भी तेजी दर्ज की गई। यह उत्साह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले महीनों में हाल के आईपीओ के लॉक-इन खुलने से करीब 26 अरब डॉलर के शेयर बाजार में आ सकते हैं, हालांकि एनएसई का ओएफएस इससे अलग, पूरी तरह मौजूदा निवेशकों की निकासी का माध्यम है। एलआईसी का न बेचना और सरकारी कंपनियों की बिक्री एक साथ यह तस्वीर पेश करते हैं कि संस्थागत निवेशक अलग-अलग रणनीतियों के साथ इस ऐतिहासिक पल का लाभ उठा रहे हैं।
वैश्विक और दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो किसी प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज का सार्वजनिक होना अपवाद ही है। एनएसई की सूचीबद्धता से न केवल उसकी पारदर्शिता और शासन व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार की गहराई का एक नया अध्याय भी खुलेगा। यह आईपीओ ऐसे समय में आ रहा है जब मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स भी संभवतः चार अरब डॉलर तक के निर्गम की तैयारी कर रही है, जिससे 2025 भारत के लिए मेगा आईपीओ का वर्ष बन सकता है। हालांकि इस वर्ष अब तक आईपीओ बाजार पिछले दो रिकॉर्ड वर्षों की तुलना में सुस्त रहा है, एनएसई और जियो जैसे बड़े निर्गम निवेशकों का भरोसा लौटा सकते हैं।
आगे की राह मूल्य निर्धारण और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। एलआईसी का दीर्घकालिक दांव यह बताता है कि संस्थागत निवेशक एक्सचेंज की वृद्धि क्षमता को केवल सूचीबद्धता लाभ से कहीं अधिक मान रहे हैं। यदि निर्गम सफल रहता है, तो यह भारत की वित्तीय अवसंरचना में वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी का नया प्रमाण बनेगा और दक्षिण एशिया के अन्य बाजारों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
भारतीय राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज ने अंततः लगभग 30,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल कर दिए हैं, जो देश के इतिहास में सबसे बड़ा होगा। यह पेशकश पूरी तरह से मौजूदा शेयरधारकों द्वारा बिक्री के लिए है और लगभग एक दशक की नियामक बाधाओं के बाद एक मील का पत्थर है। एसबीआई और एलआईसी जैसी प्रमुख सार्वजनिक संस्थाएं शामिल हैं, जिसमें एलआईसी दीर्घकालिक क्षमता पर दांव लगाते हुए अपनी हिस्सेदारी बनाए रख रही है।
भारतीय राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज का आईपीओ, जिसका मूल्य 3.3 बिलियन डॉलर है, को रिलायंस जियो के साथ इस वर्ष की दो मेगा पेशकशों में से एक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह मौजूदा निवेशकों द्वारा शुद्ध बिक्री पेशकश है, जिसमें कोई नई पूंजी नहीं जुटाई गई है। इस सौदे को भारतीय पूंजी बाजार में एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में तटस्थता से देखा जा रहा है।
संबंधित लेख
कनाडा की ऐतिहासिक जीत पर चोट का साया: इस्माइल कोने का पैर टूटा, साथी ने गोल समर्पित किया
12 भाषाएँ · 70 स्रोत
भू-राजनीति और राजनीतिस्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान तकनीकी वार्ता स्थगित, लेबनान में इज़रायली हमलों से युद्धविराम समझौते पर अनिश्चितता
8 भाषाएँ · 31 स्रोत
न्याय और कानूनफ्रांसीसी अदालत ने हकीमी की अपील खारिज की, बलात्कार मामले में मुकदमा चलाने का रास्ता साफ
9 भाषाएँ · 27 स्रोत