
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को दी एजेंसी प्रमुखों को हटाने की व्यापक शक्ति, फेड पर रोक
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 90 साल पुरानी व्यवस्था पलटते हुए राष्ट्रपति को स्वतंत्र एजेंसियों के प्रमुखों को बिना कारण हटाने का अधिकार दिया, लेकिन केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता बरकरार रखी।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 29 जून को दो ऐतिहासिक फैसलों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अधिकांश स्वतंत्र नियामक एजेंसियों के प्रमुखों को बिना कारण बर्खास्त करने का व्यापक अधिकार प्रदान कर दिया, लेकिन फेडरल रिजर्व (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) के गवर्नरों को हटाने के मामले में रोक लगा दी। पहले फैसले में 6-3 के बहुमत से 1935 के ‘हम्फ्रीज एक्जीक्यूटर’ प्रकरण को पलटते हुए अदालत ने कहा कि कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग करने वाली संस्थाओं के अधिकारी राष्ट्रपति के प्रति जवाबदेह हैं और उन्हें किसी भी समय हटाया जा सकता है। दूसरे फैसले में 5-4 के मामूली अंतर से अदालत ने ट्रंप द्वारा फेड गवर्नर लीजा कुक को बंधक धोखाधड़ी के आरोपों में बर्खास्त करने के प्रयास को फिलहाल रोक दिया, क्योंकि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था।
राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले निर्णय को ‘बड़ी जीत’ बताते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद-2 के तहत राष्ट्रपति शक्तियों की ऐतिहासिक पुष्टि करार दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला 1930 के दशक से अमेरिकी राष्ट्रपतियों की मांग रही है। वहीं, डेमोक्रेटिक नेताओं और उदारवादी न्यायाधीशों ने इसकी तीखी आलोचना की। सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि इससे ट्रंप को स्वतंत्र एजेंसियों को अपने ‘गोल्फ पार्टनरों और सहयोगियों का निजी क्लब’ बनाने का खुला लाइसेंस मिल गया है। न्यायमूर्ति सोनिया सोतोमायोर ने बहुमत के तर्क को ‘असंतुलित’ बताया। दूसरी ओर, फेड गवर्नर कुक ने अपने पक्ष में आए फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह ‘पीढ़ियों से सुदृढ़ आर्थिक प्रशासन के उस सिद्धांत की पुष्टि करता है जिसके तहत मौद्रिक नीति के सभी निर्णय साक्ष्य और स्वतंत्र विवेक के आधार पर, राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर रहकर लिए जाने चाहिए।’
इस फैसले का दायरा अमेरिका की दो दर्जन से अधिक स्वतंत्र नियामक एजेंसियों—जैसे प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी), राष्ट्रीय श्रम संबंध बोर्ड (एनएलआरबी) और उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा आयोग—तक फैला हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे इन संस्थाओं में नीतिगत अस्थिरता आ सकती है और प्रशासन बदलने पर नेतृत्व पूरी तरह बदल सकता है। यह निर्णय रूढ़िवादी खेमे द्वारा दशकों से समर्थित ‘एकात्मक कार्यपालिका सिद्धांत’ की बड़ी जीत है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी स्वतंत्रता ‘अद्वितीय’ है और 1913 से चली आ रही परंपरा के अनुरूप है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि फेड के गवर्नर ‘राष्ट्रपति की कृपा पर नहीं, बल्कि 14 वर्ष के क्रमबद्ध कार्यकाल के तहत काम करते हैं और उन्हें केवल कारण बताकर ही हटाया जा सकता है।’
यह मामला ट्रंप द्वारा संघीय व्यापार आयोग (एफटीसी) की डेमोक्रेटिक सदस्य रेबेका स्लॉटर और फेड गवर्नर कुक को हटाने के प्रयासों से उपजा। स्लॉटर को राजनीतिक मतभेदों के चलते बर्खास्त किया गया था, जबकि कुक पर बंधक धोखाधड़ी के आरोप ट्रंप समर्थक अधिकारी ने लगाए थे, जिन्हें कुक ने निराधार बताया। अदालत के फैसले के बाद स्लॉटर की बर्खास्तगी को मंजूरी मिल गई है, जबकि कुक का मामला निचली अदालत में लौटेगा, जहां प्रशासन को सबूत पेश करने और कुक को जवाब का अवसर देना होगा। ट्रंप ने कहा है कि वे ‘तत्काल कार्रवाई’ करेंगे ताकि ‘गलत काम करने वाला व्यक्ति अमेरिका के कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले न ले सके।’ वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर जारी यह खींचतान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों और भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी, क्योंकि फेड की मौद्रिक नीति का वैश्विक पूंजी प्रवाह पर गहरा असर पड़ता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप को एक बड़ी जीत दी, जिससे वे बिना कारण बताए स्वतंत्र एजेंसियों के प्रमुखों को हटा सकते हैं। ट्रंप ने इसे 'बड़ी जीत' बताया और इस फैसले ने दशकों पुरानी मिसाल को पलट दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने फेड गवर्नर लिसा कुक को निकालने की ट्रंप की कोशिश को रोक दिया, जो उनके लिए कानूनी हार है। न्यायाधीशों ने केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता की दो सदी पुरानी परंपरा का हवाला दिया, जो मौद्रिक नीति में विश्वास की आधारशिला है।
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