
UEFA ने ठुकराया 'विनी जूनियर कानून', मुंह ढकने पर सीधा लाल कार्ड नहीं
यूरोपीय फुटबॉल संघ ने विवादास्पद नियम को अपनाने से इनकार किया, जबकि विश्व कप में इसके तहत दो खिलाड़ी बाहर हो चुके हैं।
यूरोप की तीनों बड़ी क्लब प्रतियोगिताओं—चैंपियंस लीग, यूरोपा लीग और कॉन्फ्रेंस लीग—में अब मुंह ढककर बात करने पर खिलाड़ियों को सीधे लाल कार्ड नहीं दिखाया जाएगा। UEFA ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि वह फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो की उस वैकल्पिक व्यवस्था को नहीं अपनाएगी, जो इसी साल अप्रैल में IFAB से मंजूर हुई थी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब 2026 विश्व कप में यह नियम पूरी सख्ती से लागू है और पैराग्वे के मिगेल अलमिरोन तथा इक्वाडोर के पिएरो हिंकापिए इसके शिकार हो चुके हैं। दोनों को VAR समीक्षा के बाद मैदान से बाहर भेजा गया, जबकि इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम घाना के जॉर्डन अय्यू से बात करते वक्त मुंह ढकने के बावजूद बच निकले—यह विरोधाभास नियम की आलोचना की एक बड़ी वजह बना।
इस पूरे विवाद की जड़ फरवरी में चैंपियंस लीग के उस मुकाबले में है, जब बेनफिका के विंगर जियानलुका प्रेस्टियानी ने रियल मैड्रिड के विनीसियस जूनियर से बहस के दौरान अपनी जर्सी उठाकर मुंह छिपा लिया था। ब्राजीलियाई स्टार ने नस्लीय गाली का आरोप लगाया, लेकिन UEFA की जांच में प्रेस्टियानी को समलैंगिक आचरण का दोषी पाया गया और छह मैचों का प्रतिबंध लगा, जिसमें से तीन निलंबित रखे गए। यही घटना इन्फैंटिनो के लिए वह मोड़ बनी जिसके बाद उन्होंने 'डिटरेंट इफेक्ट' वाले इस नियम को विश्व कप में अनिवार्य करने की पैरवी की। लेकिन UEFA ने अपनी ही प्रतियोगिता में घटी इस घटना के बावजूद स्वचालित बर्खास्तगी की जगह भिन्न रास्ता चुना।
यूरोपीय संघ ने अपने रेफरियों को निर्देश दिया है कि वे हर स्थिति का स्वतंत्र विश्लेषण करें और अगर मुंह ढकना 'खेल भावना के विपरीत संवाद छिपाने का प्रयास' लगे तो पीला कार्ड दिखाएं। UEFA का कहना है कि इससे अनुशासनात्मक जांच या कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जो बाद में भी हो सकती है। यह रुख फीफा के उस दृष्टिकोण से बिल्कुल उलट है जिसे आलोचक 'दोषी मानकर चलने वाला' बताते हैं। दक्षिण अमेरिकी खिलाड़ियों के साथ जो हुआ, उससे यह डर और गहरा गया है कि कोई भी खिलाड़ी बिना किसी अपमानजनक शब्द के विरोधी को उकसाकर बाहर करवा सकता है। बेलिंगहम प्रकरण ने इस भ्रम को और बढ़ाया कि आखिर रेफरी कब दखल दें और कब नहीं।
UEFA ने एक और वैकल्पिक नियम को अपनाने का फैसला किया है—VAR अब गलत कॉर्नर किक को गोल-किक में बदल सकेगा, जो विश्व कप में 22 बार हो चुका है। लेकिन रेफरी के फैसले के विरोध में मैदान छोड़ने वाले खिलाड़ियों को लाल कार्ड देने वाला प्रावधान भी यूरोपीय प्रतियोगिताओं में लागू नहीं होगा। इस तरह यूरोप ने मैदानी भावनाओं पर कड़ी लगाम लगाने से इनकार करते हुए रेफरी के विवेक पर भरोसा जताया है। अब अगली चैंपियंस लीग रातों में जब कोई खिलाड़ी हाथ या जर्सी से अपने होंठ छिपाएगा, तो तुरंत लाल नहीं, बल्कि रेफरी की निगाह में छिपी संभावित सजा का पीला कार्ड ही सामने आएगा—और असली फैसला मैच के बाद अनुशासनात्मक पैनल के पास जाएगा।
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