
टेक्सास आव्रजन केंद्र हमले में आठ दोषियों को 30 से 100 वर्ष की सज़ा, एंटीफा पर प्रशासन की कार्रवाई तेज़
अमेरिकी न्याय विभाग ने मामले को आतंकवाद करार दिया, जबकि बचाव पक्ष ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा किया; सज़ाएँ 6 जनवरी के कैपिटल दंगों से भी अधिक लंबी हैं।
अमेरिका के टेक्सास राज्य में एक संघीय अदालत ने 4 जुलाई 2025 को प्रेयरीलैंड आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) बंदी केंद्र पर हुए हमले के आठ दोषियों को 30 से लेकर 100 वर्ष तक के कारावास की सज़ा सुनाई है। पूर्व मरीन रिज़र्विस्ट बेंजामिन सॉन्ग, जिसे पुलिस अधिकारी पर गोली चलाकर हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया गया, को अधिकतम 100 वर्ष की सज़ा मिली। शेष सात प्रतिवादियों को 30 से 70 वर्ष के बीच की सज़ाएँ दी गईं, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे लेकिन जाँच में बाधा डालने के दोषी पाए गए।
अमेरिकी न्याय विभाग और अभियोजन पक्ष के अनुसार, ये सभी व्यक्ति विकेंद्रीकृत वामपंथी समूह ‘एंटीफा’ की उत्तरी टेक्सास इकाई के सदस्य हैं और इन्होंने आतंकवादियों को भौतिक सहायता देने, दंगा करने तथा विस्फोटकों के इस्तेमाल की साजिश रची। अभियोजक फ्रैंक गैटो ने अदालत से कहा कि इनके चरमपंथी विश्वासों के कारण अतिरिक्त कठोर दंड आवश्यक है। दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों और परिवारों ने एंटीफा से किसी भी संबद्धता से इनकार किया और तर्क दिया कि प्रदर्शनकारी केवल बंदी प्रवासियों के समर्थन में शोर-शराबा करने आए थे, न कि हिंसा के इरादे से। सॉन्ग के वकील फिलिप हेस ने कहा कि उनके मुवक्किल ने केवल ‘दमनात्मक गोलीबारी’ की और पुलिस अधिकारी को गोली रिकोशे से लगी।
न्यायाधीश रीड ओ’कॉनर और मार्क पिटमैन ने सज़ा सुनाते हुए इस घटना को ‘लोकतंत्र पर हमला’ बताया और कहा कि ऐसे आचरण के प्रति निवारक संदेश देना आवश्यक है। इन सज़ाओं की लंबाई ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में तुलनात्मक बहस छेड़ दी है: 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हमले के दोषियों को मिली सज़ाओं से ये कहीं अधिक कठोर हैं। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन एंटीफा को घरेलू आतंकवादी संगठन घोषित करने के बाद इस मामले को वामपंथी सक्रियता के विरुद्ध एक साँचे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
यह मामला अमेरिका में आव्रजन प्रवर्तन को लेकर बढ़ते सामाजिक ध्रुवीकरण की पृष्ठभूमि में सामने आया है। आईसीई की गतिविधियाँ—जैसे सामूहिक छापे और निर्वासन—2017 से ही बड़े विरोध प्रदर्शनों का कारण बनती रही हैं। हाल के महीनों में वाशिंगटन राज्य में एक 80 वर्षीय पूर्व सैनिक को आईसीई समर्थक पोस्टर लेकर खड़े होने पर प्रदर्शनकारियों ने घेरकर ज़मीन पर गिरा दिया, जबकि न्यू जर्सी में एक प्रदर्शनकारी को कार ने टक्कर मारी। ये घटनाएँ आव्रजन नीति पर गहराते तनाव को रेखांकित करती हैं।
इस मामले में एक और प्रतिवादी इनेस सोटो की सज़ा जुलाई में सुनाई जानी है। सॉन्ग सहित कई दोषियों ने अपील की घोषणा की है। अमेरिकी कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने सज़ाओं का स्वागत करते हुए कहा कि ‘चरमपंथी हिंसा के लिए हमारे देश में कोई जगह नहीं है’, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने न्यायिक प्रक्रिया की निगरानी जारी रखने की बात कही है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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टेक्सास में, एंटिफा से जुड़े आठ प्रदर्शनकारियों को दशकों की जेल हुई, जिसमें एक पूर्व मरीन को ICE केंद्र के बाहर पुलिस अधिकारी पर गोली चलाने के लिए 100 साल की सजा मिली। 6 जनवरी के दंगाइयों से कहीं अधिक कठोर ये सज़ाएं स्पष्ट संदेश देती हैं कि कानून प्रवर्तन पर हमलों का अधिकतम बल से जवाब दिया जाएगा। इस बीच, स्वीडन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए दंड सख्त कर रहा है, सार्वजनिक जवाबदेही को मजबूत कर रहा है।
स्वीडन ने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के लिए कठोर दंड को मंजूरी दी है, 'सार्वजनिक हैसियत का दुरुपयोग' नामक एक नया अपराध पेश किया है। व्यापक रूप से स्वागत किए गए इस सुधार में गंभीर कर्तव्य उल्लंघनों के लिए डेढ़ साल तक की जेल का प्रावधान है। यह कदम टेक्सास में देखी गई असंगति के विपरीत है, जहां एक प्रदर्शनकारी को 100 साल की सजा मिली, जो न्याय और आनुपातिकता पर सवाल खड़ा करता है।
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