
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट: जेल में धार्मिक अधिकार हनन पर अधिकारियों पर व्यक्तिगत मुकदमा नहीं
रैस्टाफेरियन कैदी के बाल जबरन काटने पर 6-3 से फैसला—राज्य कर्मचारियों पर व्यक्तिगत दायित्व नहीं, धार्मिक स्वतंत्रता कानून की प्रवर्तनीयता पर सवाल।
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को 6-3 के बहुमत से निर्णय दिया कि लुइज़ियाना की जेल में बंद रैस्टाफेरियन धर्मावलंबी डेमन लैंडोर उन जेल प्रहरियों और वार्डन पर व्यक्तिगत रूप से हर्जाने का मुकदमा नहीं कर सकते, जिन्होंने 2020 में उन्हें कुर्सी से हथकड़ी लगाकर उनके घुटनों तक लंबे ड्रेडलॉक्स जबरन काट दिए थे। लैंडोर ने धार्मिक स्वतंत्रता बहाली अधिनियम (आरएलयूआईपीए) के तहत मुकदमा किया था, लेकिन न्यायालय ने कहा कि यह कानून राज्य कर्मचारियों पर व्यक्तिगत दायित्व नहीं डालता।
रूढ़िवादी बहुमत की ओर से न्यायमूर्ति नील गोरसच ने लिखा कि संघीय सरकार जब राज्यों को जेल संचालन के लिए धन देती है, तो शर्तें लगा सकती है, लेकिन संविधान के व्यय खंड के तहत कांग्रेस को राज्य कर्मचारियों पर सीधे दायित्व थोपने का अधिकार नहीं है—इसके लिए उनकी सहमति आवश्यक है। इसके विपरीत, उदारवादी न्यायमूर्ति केतनजी ब्राउन जैक्सन ने असहमति में कहा कि यह फैसला कांग्रेस के नागरिक अधिकारों, स्वास्थ्य सेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसे कानूनों को “एक धनी निजी पार्टी के सौदेबाजी” में बदल देता है और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के शिकार कैदियों को बिना उपचार के छोड़ देता है।
अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संघ (एसीएलयू) और अमेरिकन्स यूनाइटेड फॉर सेपरेशन ऑफ चर्च एंड स्टेट जैसे संगठनों ने इस फैसले की निंदा करते हुए कहा कि यह कैदियों, विशेषकर गैर-ईसाई धर्मावलंबियों, के धार्मिक अधिकारों को कमजोर करता है और जेल अधिकारियों को जवाबदेही से बचने का रास्ता देता है। लुइज़ियाना राज्य ने लैंडोर के साथ हुए व्यवहार को “धार्मिक स्वतंत्रता के विपरीत” माना और अपनी जेल ग्रूमिंग नीति में संशोधन किया, लेकिन उसने यह तर्क दिया कि संघीय कानून व्यक्तिगत कर्मचारियों पर आर्थिक दायित्व की अनुमति नहीं देता, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
विधि विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय हाल के वर्षों में सर्वोच्च न्यायालय के धार्मिक स्वतंत्रता के पक्ष में दिए गए कई फैसलों से भिन्न है, जिनमें मुख्यतः ईसाई याचिकाकर्ताओं को राहत मिली थी। वॉक्स पत्रिका के विश्लेषण में कहा गया कि गोरसच की राय आपातकालीन गर्भपात देखभाल और नर्सिंग होम सुरक्षा जैसे अन्य संघीय कानूनों को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि वे भी व्यय खंड के तहत राज्यों पर शर्तें लगाते हैं। दक्षिण एशिया के संदर्भ में, यह मामला धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और राज्य प्राधिकार के बीच संतुलन के सवाल को उठाता है, हालांकि भारत में जेलों में धार्मिक प्रथाओं की सुरक्षा के लिए अलग संवैधानिक प्रावधान मौजूद हैं। फिलहाल, लैंडोर के पास कोई संघीय कानूनी उपचार नहीं बचा है, लेकिन उन्होंने जवाबदेही की लड़ाई जारी रखने की घोषणा की है। यह मामला अब निचली अदालतों में आगे नहीं बढ़ेगा, और विधायी सुधार की संभावना पर बहस जारी है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के रूढ़िवादी बहुमत ने 6-3 के फैसले में कहा कि एक रस्ताफ़ेरियन कैदी जेल अधिकारियों पर उसके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए जबरन ड्रेडलॉक काटने के लिए मुकदमा नहीं कर सकता। यह निर्णय धार्मिक स्वतंत्रता के हालिया विस्तार में एक स्पष्ट अपवाद माना जा रहा है, जो कैदियों को बिना उपचार के छोड़ देता है। नागरिक स्वतंत्रता समर्थकों ने इसकी निंदा की और कहा कि यह राज्य हिरासत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को कमजोर करता है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जिस रस्ताफ़ेरियन व्यक्ति के जेल में ड्रेडलॉक काटे गए, वह संघीय धार्मिक स्वतंत्रता कानून के तहत राज्य के अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से मौद्रिक हर्जाना नहीं मांग सकता। लुइसियाना ने स्वीकार किया कि यह व्यवहार धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ था और उसने अपनी ग्रूमिंग नीति बदल दी। यह फैसला स्पष्ट करता है कि कानून राज्य कर्मचारियों पर उनकी व्यक्तिगत क्षमता में मुकदमा करने की अनुमति नहीं देता।
संबंधित लेख
ट्रंप की चेतावनी: हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर शुल्क लगा तो ईरान से वार्ता तत्काल समाप्त
7 भाषाएँ · 25 स्रोत
खेलरोनाल्डो का ऐतिहासिक दोहरा गोल, छह विश्व कप में स्कोर करने वाले पहले खिलाड़ी बने
8 भाषाएँ · 18 स्रोत
भू-राजनीति और राजनीतिकोलंबिया में वामपंथी उम्मीदवार ने हार स्वीकारी, ट्रंप-समर्थित डे ला एस्प्रिएला की जीत
6 भाषाएँ · 20 स्रोत