
वेंस का दावा: ईरान ने IAEA निरीक्षकों को फिर से प्रवेश की अनुमति दी, तेहरान ने नहीं की पुष्टि
स्विट्ज़रलैंड में हुई वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को देश में आने की अनुमति दे दी है, लेकिन ईरानी पक्ष ने इसे औपचारिक वार्ता की शुरुआत नहीं माना।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने सोमवार को स्विट्ज़रलैंड के बुर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में संवाददाताओं से कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को फिर से देश में आमंत्रित करने पर सहमति दे दी है। उन्होंने इसे “अमेरिकी जनता के लिए एक बड़ा मील का पत्थर” और ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में पहला कदम बताया। वेंस के अनुसार, निरीक्षकों की वापसी को लेकर बातचीत इसी सप्ताह, संभवतः सोमवार से ही शुरू हो सकती है। हालांकि, न तो ईरान और न ही IAEA ने इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि की है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने इसके विपरीत स्पष्ट किया कि रविवार की बैठक परमाणु समझौते पर औपचारिक वार्ता की शुरुआत नहीं थी, बल्कि इसमें केवल दोनों पक्षों ने अपनी स्थितियाँ प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पर धमकी भरी पोस्ट के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने चतुर्भुज बैठक से हटने की घोषणा कर दी, लेकिन मध्यस्थों के ज़रिये संदेशों का आदान-प्रदान जारी रहा। तेहरान का रुख है कि विस्तृत परमाणु वार्ता तभी शुरू हो सकती है जब पिछले सप्ताह हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के प्रावधान पहले लागू किए जाएँ।
मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान और कतर के विदेश मंत्रालयों ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि अमेरिका और ईरान 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने की रूपरेखा पर सहमत हुए हैं और तकनीकी स्तर की बातचीत इस सप्ताह जारी रहेगी। मध्यस्थों के अनुसार, लेबनान में युद्धविराम को स्थायी बनाने के लिए एक “संघर्ष प्रबंधन प्रकोष्ठ” बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए संचार माध्यम स्थापित करने पर भी सहमति बनी। वेंस ने दावा किया कि जलडमरूमध्य खुला है और तेल-गैस की कीमतों में गिरावट आई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 21 अगस्त तक ईरान को कच्चे तेल और पेट्रोरसायन उत्पादों के निर्यात की अस्थायी अनुमति भी दे दी है।
यह घटनाक्रम फरवरी के अंत में इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से शुरू हुए लगभग चार महीने के युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के बीच सामने आया है। जून 2025 की सैन्य कार्रवाइयों के बाद से IAEA निरीक्षक ईरान की मुख्य परमाणु सुविधाओं तक नहीं पहुँच पाए हैं, जबकि एजेंसी के अनुमान के अनुसार ईरान के पास 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम है, जो हथियार-स्तर के करीब माना जाता है। पिछले सप्ताह हस्ताक्षरित एमओयू में इस यूरेनियम को IAEA की निगरानी में पतला करने का प्रावधान शामिल है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रहना कच्चे तेल की आपूर्ति और मूल्य स्थिरता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जबकि पाकिस्तान की मध्यस्थकर्ता भूमिका क्षेत्रीय कूटनीति में उसकी सक्रियता को रेखांकित करती है। फिलहाल तकनीकी दल बुर्गनस्टॉक में बातचीत जारी रखेंगे, लेकिन तेहरान की इस शर्त कि पहले एमओयू लागू हो, अंतिम परमाणु समझौते की समय-सीमा को प्रभावित कर सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने ईरान द्वारा IAEA निरीक्षकों को वापस बुलाने की सहमति को एक बड़ी उपलब्धि और स्थायी परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में पहला कदम बताया, लेकिन ईरान ने अभी पुष्टि नहीं की है और इस घोषणा को अमेरिकी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश किया गया है जिसमें तेहरान के इरादों पर संदेह बना हुआ है।
लैटिन अमेरिकी मीडिया ने ईरान द्वारा IAEA निरीक्षणों पर सहमति के अमेरिकी दावे को मध्य पूर्व युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक कदम के रूप में रिपोर्ट किया, होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने और तेल की कीमतों में गिरावट पर प्रकाश डाला, जबकि यह भी बताया कि ईरान ने अभी पुष्टि नहीं की है।
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