
टीकों के दूरगामी प्रभाव: HPV से सर्वाइकल कैंसर मृत्यु दर लगभग शून्य, शिंगल्स वैक्सीन से डिमेंशिया का जोखिम 24% कम
इंग्लैंड में HPV टीकाकरण के बाद 20-24 वर्ष की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर से मृत्यु का जोखिम लगभग समाप्त हो गया, जबकि अमेरिकी अध्ययन में शिंगल्स वैक्सीन और डिमेंशिया के बीच सुरक्षात्मक संबंध मिला।
इंग्लैंड में 2008 में शुरू हुए HPV टीकाकरण कार्यक्रम के वास्तविक प्रभाव का आकलन करने वाले एक ऐतिहासिक अध्ययन में पाया गया कि 12-13 वर्ष की आयु में टीका लगवाने वाली महिलाओं की 30 वर्ष से पहले सर्वाइकल कैंसर से मृत्यु की संभावना लगभग शून्य हो गई। द लैंसेट में प्रकाशित इस विश्लेषण में 20-34 वर्ष की महिलाओं के राष्ट्रीय कैंसर मृत्यु दर और टीकाकरण आंकड़ों का उपयोग किया गया। टीकाकृत 30-34 वर्ष आयु वर्ग में मृत्यु जोखिम अटीकाकृत महिलाओं की तुलना में 63 प्रतिशत कम दर्ज किया गया। यह पहला अध्ययन है जो सीधे तौर पर दर्शाता है कि HPV वैक्सीन न केवल कैंसर की रोकथाम करती है बल्कि जीवन बचाने में भी सक्षम है।
इसी क्रम में, अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक बड़े अवलोकनात्मक अध्ययन में पाया कि शिंगल्स की नई वैक्सीन ‘शिंगरिक्स’ लेने वाले वृद्धाश्रम निवासियों में डिमेंशिया का जोखिम 24 प्रतिशत कम रहा। 2017-2022 के बीच 5,09,926 व्यक्तियों के चिकित्सा रिकॉर्ड के विश्लेषण से पता चला कि टीकाकरण के बाद चार वर्षों में 18.8 प्रतिशत लोगों में डिमेंशिया विकसित हुआ, जबकि बिना टीके वालों में यह दर 24.6 प्रतिशत थी। हालांकि यह अध्ययन कारण-कार्य संबंध स्थापित नहीं करता, शोधकर्ताओं ने संभावित क्रियाविधि बताई है: शिंगल्स की रोकथाम से तंत्रिका सूजन और स्ट्रोक का खतरा घटता है, या वैक्सीन की मजबूत प्रतिरक्षा उत्तेजना अप्रत्यक्ष रूप से मस्तिष्क स्वास्थ्य की रक्षा करती है।
वैश्विक स्तर पर इन निष्कर्षों ने टीकाकरण नीतियों को नई दिशा दी है। संयुक्त अरब अमीरात के स्वास्थ्य मंत्रालय ने HPV-संबंधी बीमारियों के उन्मूलन के लिए एक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार करने हेतु विशेषज्ञ सत्र आयोजित किया, जिसमें टीकाकरण, प्रारंभिक जांच और जन जागरूकता पर बल दिया गया। भारत में हर साल कैंसर के लगभग 15 लाख नए मामले सामने आते हैं, और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने रोकथाम व प्रारंभिक निदान को सबसे बड़ा हथियार बताया। तेलंगाना ने कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित कर रजिस्ट्री स्थापित की है, जबकि आंध्र प्रदेश के बसवतारकम इंडो-अमेरिकन कैंसर अस्पताल जैसे संस्थान सुलभ उपचार प्रदान कर रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य 2030 तक 90 प्रतिशत किशोरियों को HPV टीके से पूर्णतः आच्छादित करना है, लेकिन इंग्लैंड में ही टीकाकरण दरों में गिरावट की चिंता जताई गई है। शिंगल्स वैक्सीन के लिए अगला पड़ाव कारण-संबंध स्थापित करने वाले नियंत्रित परीक्षण होंगे। फिलहाल, दोनों टीकों के दूरगामी सुरक्षात्मक प्रभाव इस बात की पुष्टि करते हैं कि टीकाकरण केवल संक्रामक रोगों से बचाव का साधन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति का आधार बन सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि शिंगल्स वैक्सीन शिंग्रिक्स वृद्ध वयस्कों में डिमेंशिया के जोखिम में 24% की कमी से जुड़ी है। शोधकर्ताओं ने पांच लाख से अधिक नर्सिंग होम निवासियों के चिकित्सा डेटा का विश्लेषण किया, जो सुझाव देता है कि टीका अपने प्राथमिक उद्देश्य से परे मस्तिष्क की रक्षा कर सकता है। यह खोज डिमेंशिया के खिलाफ लड़ाई में एक नया रास्ता प्रदान करती है, जो उम्रदराज़ समाजों में एक बढ़ती चुनौती है।
इंग्लैंड में एचपीवी वैक्सीन की बदौलत युवा महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतें शून्य हो गई हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि टीके ने 2020 से 2024 के बीच कम से कम 200 मौतों को रोका, जो व्यापक टीकाकरण की शक्ति को दर्शाता है। यह सफलता की कहानी रोकथाम योग्य कैंसर को खत्म करने में टीकाकरण कार्यक्रमों के महत्व पर प्रकाश डालती है।
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