
ईरान ने IAEA निरीक्षकों को देश में आने की सहमति दी, 60 दिनों में अंतिम समझौते का रोडमैप तय
स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता के पहले दौर के बाद उपराष्ट्रपति वेंस ने परमाणु निरीक्षण, होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान युद्धविराम पर प्रगति की घोषणा की।
स्विट्ज़रलैंड के बुर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में रविवार से सोमवार तक चले अमेरिका-ईरान वार्ता के पहले उच्च-स्तरीय दौर के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को देश में वापस आमंत्रित करने पर सहमति दे दी है। वेंस के अनुसार, निरीक्षकों की वापसी पर बातचीत इसी सप्ताह या आज से ही शुरू हो सकती है। मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर ने एक संयुक्त बयान में बताया कि दोनों पक्षों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति बना ली है, और तकनीकी वार्ता इसी सप्ताह जारी रहेगी। इसके साथ ही अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 21 अगस्त तक के लिए ईरानी तेल पर प्रतिबंध अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए।
वार्ता के परिणामों को लेकर पक्षों के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इसे “एक सफल अंतिम समझौते के लिए बहुत अच्छी नींव” बताया और कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है तथा लेबनान में युद्धविराम बनाए रखने के लिए एक “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल” बनाने पर सहमति हुई है। दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि परमाणु मुद्दे पर केवल संक्षिप्त चर्चा हुई, विस्तृत बातचीत शुरू नहीं हुई है, और औपचारिक वार्ता पिछले सप्ताह हस्ताक्षरित ज्ञापन के बिंदुओं के क्रियान्वयन के बाद ही आरंभ होगी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पर धमकी भरी पोस्ट के विरोध में कुछ समय के लिए वार्ता से वॉकआउट भी किया, हालाँकि बाद में मध्यस्थों के ज़रिए संदेशों का आदान-प्रदान फिर शुरू हुआ।
इस सहमति के ठोस निहितार्थ कई मोर्चों पर दिखने लगे हैं। IAEA निरीक्षकों की वापसी से ईरान के 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम भंडार की निगरानी का रास्ता खुल सकता है, जिस तक जून 2025 के अमेरिकी-इज़राइली हमलों के बाद से एजेंसी की पहुँच नहीं थी। होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक संचार चैनल बनाया गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति को झटका लगने की आशंका कम हुई है। वेंस ने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरानी परिसंपत्तियाँ अनफ़्रीज़ की जाती हैं तो उस धन का उपयोग अमेरिकी सोयाबीन, मक्का और गेहूँ की खरीद के लिए होगा, न कि आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए — यह प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और कतर के अधिकारियों ने मिलकर तैयार किया।
यह वार्ता 28 फ़रवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध को समाप्त करने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। पिछले सप्ताह अमेरिकी और ईरानी राष्ट्रपतियों ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से एक प्रारंभिक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सभी मोर्चों पर युद्धविराम, प्रतिबंधों की समाप्ति और परमाणु कार्यक्रम पर अलग समझौते की रूपरेखा शामिल है। इज़राइल ने इस समझौते पर गहरी आपत्ति जताई है और दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने की बात कही है, जबकि लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिका और कतर के साथ फ़ोन कॉल में युद्धविराम को मज़बूत करने के उपायों पर चर्चा की। अगला ठोस कदम 23 से 25 जून तक वॉशिंगटन में लेबनान-इज़राइल द्विपक्षीय वार्ता है, जबकि स्विट्ज़रलैंड में तकनीकी टीमें शेष सप्ताह परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों और विवाद समाधान तंत्र पर काम करती रहेंगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिका-ईरान वार्ता ने अंतिम समझौते के लिए अच्छी नींव रखी, और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहा। लेबनान पर, वाशिंगटन इज़राइल की सुरक्षा और लेबनानी संप्रभुता के बीच संतुलन चाहता है, लेकिन यह मामला अभी भी जारी चर्चा का विषय है।
उच्च-स्तरीय वार्ता ने युद्ध समाप्त करने के लिए 60-दिवसीय रोडमैप तैयार किया, जिसमें ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों की वापसी पर सहमति दी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने अंतिम समझौते के लिए ठोस नींव की सराहना की, जबकि हिज़्बुल्लाह-इज़राइल संघर्ष पर ट्रम्प की धमकियाँ दबाव बनाए हुए हैं।
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