
वैश्विक बाजारों में तकनीकी शेयरों की भारी बिकवाली, कोस्पी 10% टूटा; भारतीय बाजार भी धड़ाम
दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क सूचकांक में एक दशक की सबसे बड़ी गिरावट ने एशिया से लेकर अमेरिका तक निवेशकों की धारणा को हिला दिया।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक मंगलवार को 10 प्रतिशत लुढ़ककर 8,203.84 पर बंद हुआ, जिससे सियोल स्टॉक एक्सचेंज को 20 मिनट के लिए कारोबार रोकना पड़ा। यह गिरावट सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी चिप कंपनियों में 12 प्रतिशत से अधिक की बिकवाली से शुरू हुई और तेजी से जापान, यूरोप और अमेरिकी वायदा बाजारों में फैल गई। जापान का निक्केई 3.6 प्रतिशत टूटा, जबकि अमेरिका में नैस्डैक वायदा 2.5 प्रतिशत से अधिक लाल निशान में रहे। स्पेसएक्स के शेयर लगातार तीसरे दिन गिरे और तीन सत्रों में 600 अरब डॉलर का बाजार मूल्य गंवाने के बाद मंगलवार को संक्षिप्त रूप से अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम मूल्य 150 डॉलर से नीचे चले गए।
यह बिकवाली कई कारकों के संगम से उपजी। दक्षिण कोरियाई बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कोस्पी में हाल के महीनों की तेज रैली – जो वर्ष की शुरुआत से लगभग दोगुनी हो चुकी थी – के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक थी, लेकिन खुदरा निवेशकों द्वारा लिए गए अत्यधिक उधार ने गिरावट को और गहरा कर दिया। वहीं, अमेरिकी विश्लेषकों ने माइक्रोन टेक्नोलॉजी के बुधवार को आने वाले तिमाही नतीजों से पहले ‘चिंता’ को बिकवाली का एक प्रमुख कारण बताया, क्योंकि माइक्रोन को एआई मांग का बैरोमीटर माना जाता है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावना – सीएमई ग्रुप के आंकड़ों के अनुसार इसकी संभावना एक सप्ताह में 57 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत तक पहुंच गई – ने ऊंचे मूल्यांकन वाले तकनीकी शेयरों पर दबाव डाला।
भारतीय बाजार भी इस वैश्विक झटके से अछूते नहीं रहे। बीएसई सेंसेक्स लगभग 900 अंक गिरकर 76,200 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 23,850 से नीचे फिसल गया। सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों में सबसे अधिक गिरावट रही, टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो में 3 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। विश्लेषकों ने इसका कारण वैश्विक तकनीकी खर्च में सुस्ती की आशंका और एआई से जुड़े अत्यधिक मूल्यांकन को बताया। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट – ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया – ने भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कुछ राहत के संकेत दिए, क्योंकि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में प्रगति के बाद वाशिंगटन ने ईरानी तेल पर प्रतिबंध दो महीने के लिए स्थगित कर दिए।
अब निवेशकों की निगाहें माइक्रोन के नतीजों और गुरुवार को आने वाले अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय मूल्य सूचकांक पर टिकी हैं, जो फेड की मौद्रिक नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। दक्षिण कोरिया में खुदरा निवेशकों की उच्च उधारी और एआई बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च को लेकर बने संदेह आने वाले सत्रों में बाजार की धारणा को प्रभावित करते रहेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एआई-संचालित शेयर बाजार का बुलबुला फूट गया है, सियोल का कॉस्पी 10% गिरा और वैश्विक तकनीकी बिकवाली शुरू हो गई। अधिक मूल्यांकित चिप निर्माता और स्पेसएक्स जैसी एआई कंपनियां गिरावट का नेतृत्व कर रही हैं, जबकि ईरान संघर्ष पर अनिश्चितता बाजार की घबराहट बढ़ा रही है। यह तीव्र उलटफेर संकेत देता है कि महीनों की तेजी अस्थिर थी।
दक्षिण कोरियाई तकनीकी शेयरों की गिरावट भारत के लिए एक अवसर है, क्योंकि विदेशी निवेशक अधिक स्थिर भारतीय बाजार की ओर रुख कर सकते हैं। सेमीकंडक्टर शेयरों में भारी बिक्री से प्रेरित कॉस्पी की 10% की गिरावट एआई बुलबुले के जोखिमों को उजागर करती है। भारत के अपेक्षाकृत स्थिर रिटर्न सुरक्षा चाहने वाली पूंजी को आकर्षित कर सकते हैं।
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