
रोम की गली से सेंट्रल पार्क तक: टॉम हैंक्स के सत्तर बरस, एक ऐसे सितारे की कहानी जो अपने किरदारों जैसा ही निकला
हॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद चेहरे ने न सिर्फ़ लगातार दो ऑस्कर जीते, बल्कि अपनी निजी ज़िंदगी में भी वही सहजता और करुणा बरती जो पर्दे पर उनके किरदारों की पहचान बनी।
साल 2008 था, रोम का पैंथियन चौक फ़िल्म ‘एंजल्स ऐंड डीमन्स’ की शूटिंग की वजह से अस्त-व्यस्त था। भीड़ और बैरिकेड्स के बीच एक दुल्हन अपनी शादी की तस्वीरों के लिए रास्ता नहीं बना पा रही थी। तभी वहाँ मौजूद एक अभिनेता ने फ़िल्मी स्टार वाला रवैया छोड़, ख़ुद आगे बढ़कर उस दुल्हन को अपने साथ ले जाकर पूरे चौक का चक्कर लगवाया और सुरक्षित उसकी मंज़िल तक पहुँचाया। वह शख़्स टॉम हैंक्स थे। यह क़िस्सा कोई प्रचार-सामग्री नहीं, बल्कि उस दिन वहाँ मौजूद लोगों की आँखों देखी है, और यह ठीक वैसी ही कहानी है जैसी हैंक्स के किरदार पर्दे पर जीते आए हैं।
नौ जुलाई 1956 को कैलिफ़ोर्निया के कॉनकॉर्ड में जन्मे टॉम हैंक्स का बचपन एक शहर से दूसरे शहर भटकने में बीता। चार साल की उम्र में माता-पिता का तलाक़, दस बार स्कूल बदलना, और एक अकेलापन जिसने उन्हें इंसानी व्यवहार का बारीक पर्यवेक्षक बना दिया। यह अकेलापन ही था जो उन्हें स्कूल के नाटकों की ओर खींच लाया, और फिर ओहायो के ग्रेट लेक्स थिएटर फ़ेस्टिवल तक ले गया, जहाँ मामूली तनख़्वाह पर काम करते हुए अभिनय से उनका रिश्ता पक्का हुआ। अस्सी के दशक की शुरुआत में टेलीविज़न सीरीज़ ‘बोसम बडीज़’ ने उन्हें कॉमेडी का एक जाना-पहचाना चेहरा बनाया, लेकिन असली पहचान मिली 1988 में पेनी मार्शल की ‘बिग’ से, जहाँ एक बारह साल के बच्चे का शरीर में तीस साल का आदमी बन जाने का किरदार निभाकर उन्होंने पहला ऑस्कर नामांकन हासिल किया।
इसके बाद जो हुआ, वह हॉलीवुड के इतिहास में विरल है। 1993 में ‘फ़िलाडेल्फ़िया’ में एड्स से जूझते एक वकील की भूमिका ने उन्हें पहला ऑस्कर दिलाया, और ठीक अगले साल ‘फ़ॉरेस्ट गम्प’ ने दूसरा। लगातार दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अकादमी पुरस्कार जीतने वाले वे स्पेंसर ट्रेसी के बाद दूसरे व्यक्ति बने। ‘फ़ॉरेस्ट गम्प’ ने न सिर्फ़ दुनिया भर में धूम मचाई, बल्कि भारत में भी इसकी गूँज सुनाई दी—आमिर ख़ान ने वर्षों बाद ‘लाल सिंह चड्ढा’ के रूप में इसका रीमेक बनाया। इसी दौरान हैंक्स ने स्टीवन स्पीलबर्ग के साथ मिलकर ‘सेविंग प्राइवेट रायन’ जैसी युद्ध-गाथा को जन्म दिया, और ‘टॉय स्टोरी’ शृंखला में काउबॉय वुडी की आवाज़ बनकर एनिमेशन की दुनिया में भी अमिट छाप छोड़ी। आलोचकों के अनुसार, ‘टॉय स्टोरी 2’ को 100% रेटिंग के साथ उनके करियर की सबसे सराही गई फ़िल्म माना जाता है, भले ही उसमें वे पर्दे पर नज़र न आए हों।
पर्दे के बाहर भी हैंक्स का जीवन एक शांत कथा की तरह बहता रहा। 1981 में ‘बोसम बडीज़’ के सेट पर रीटा विल्सन से मुलाक़ात, 1988 में शादी, और फिर अड़तीस साल का वह दांपत्य जिसके बारे में विल्सन बताती हैं कि वे कभी भी रात को एक-दूसरे से नाराज़ होकर नहीं सोते। यह रिश्ता तब और गहराया जब 2015 में विल्सन ने स्तन कैंसर की जाँच के बाद डबल मास्टेक्टॉमी करवाई और हैंक्स हर क़दम पर साथ खड़े रहे। ख़ुद हैंक्स भी टाइप 2 डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं, जिसकी वजह से उन्होंने चीनी और अल्कोहल से दूरी बना ली है। अपनी सेहत के प्रति यह सजगता उन्हें सिल्वेस्टर स्टेलोन जैसे साथी कलाकारों से अलग करती है, जिन्होंने अस्सी की उम्र में भी कठोर शारीरिक प्रशिक्षण जारी रखा है।
हैंक्स की दुनिया सिर्फ़ फ़िल्मों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने नाम के शब्द-खेल ‘हैंक्स कॉफ़ी फ़ॉर आवर ट्रूप्स’ के ज़रिए युद्ध-दिग्गजों की सहायता का एक अनूठा ज़रिया बनाया, जिसकी पूरी आमदनी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और परिवारों की मदद में जाती है। यह पहल कुछ-कुछ वैसी ही है जैसी उनके ‘फ़ॉरेस्ट गम्प’ के सह-कलाकार गैरी सिनिस ने अपनी फ़ाउंडेशन के ज़रिए की—सिनिस ने लेफ्टिनेंट डैन का किरदार निभाने के बाद घायल सैनिकों के लिए घर बनवाने का अभियान छेड़ दिया। हैंक्स का एक और अनोखा प्रेम है टाइपराइटरों से; उनके संग्रह में ढाई सौ से अधिक मशीनें हैं, जिनमें एक हर्मीस 2000 भी शामिल है जो उन्होंने सबसे पहले ख़रीदी थी।
आज जब वे सत्तर के हुए, तो यूनान के एंटीपारोस द्वीप पर अपने सफ़ेद विला में परिवार के साथ जन्मदिन मनाने की ख़बरें हैं—वही देश जिसने उन्हें और रीटा को मानद नागरिकता दी है। एक ऐसा सितारा जो कभी होटल बॉय था और चेर व हैरी बेलाफ़ोंटे के बैग ढोता था, आज हॉलीवुड का वह चेहरा है जिसे अमेरिकी जनता अपने देश की सबसे प्रतिनिधि शख़्सियत मानती है। और शायद यही वजह है कि जब वे न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में किसी छात्रा का खोया पहचान-पत्र उठाकर ट्विटर पर उसे लौटाने की कोशिश करते हैं, तो लगता है कि पर्दे का ‘अच्छा आदमी’ असल में पर्दे के बाहर भी उतना ही वास्तविक है।
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America recognizes in Tom Hanks its most authentic face, a timeless icon embodying national values.
A poll transforms Hanks into a national emblem, making his image universal and rooted in American identity.
Hanks' wisdom on patience and time is a reminder that greatness is built from the everyday.
A personal anecdote from the actor is elevated to a universal lesson, turning his figure into a model of conduct.
Tom Hanks is not just an actor but a figure whose roles have become part of the cultural canon, confirmed by an authoritative selection.
A list of best roles compiled by a historian lends objectivity to the assessment and places Hanks in the pantheon of world cinema.
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