
36 साल का सूखा खत्म: ऑस्ट्रिया ने जॉर्डन को 3-1 से हराकर रचा इतिहास
ऑस्ट्रिया ने 2026 विश्व कप में 36 साल बाद जीत दर्ज की, जबकि पदार्पण कर रहे जॉर्डन ने अपना पहला गोल कर सांत्वना पाई; अब ग्रुप J की अगुवाई के लिए अर्जेंटीना से भिड़ंत तय।
सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र के सांता क्लारा स्टेडियम में मंगलवार रात खेले गए मुकाबले में ऑस्ट्रिया ने न केवल जॉर्डन को 3-1 से हराया, बल्कि विश्व कप फुटबॉल में 36 वर्षों के अपने जीत के अकाल को भी समाप्त कर दिया। यह जीत ऑस्ट्रिया के लिए 1990 में इटली में अमेरिका को 2-1 से हराने के बाद पहली है, जबकि टीम पिछले छह टूर्नामेंटों से बाहर रहने के बाद 28 साल के अंतराल के साथ इस मंच पर लौटी है। दूसरी ओर, पहली बार विश्व कप खेल रहे जॉर्डन ने अली ओलवान के शानदार गोल से अपना ऐतिहासिक पहला स्कोर दर्ज किया, लेकिन आखिरी क्षणों में आत्मघाती गोल और पेनल्टी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
मैच की कहानी उतार-चढ़ाव भरी रही। रोमानो श्मिड ने 21वें मिनट में बॉक्स के बाहर से जोरदार प्रहार कर ऑस्ट्रिया को बढ़त दिलाई, लेकिन दूसरे हाफ की शुरुआत में ओलवान ने पोस्ट से टकराकर अंदर जाने वाले शॉट से बराबरी कर दी। इसके बाद वीएआर ने दो बार हस्तक्षेप किया—पहले मार्को अर्नाटोविच के कॉर्नर पर किए गए हेडर को ऑफसाइड करार देकर रद्द किया, फिर कुछ ही मिनटों बाद दूसरे कॉर्नर पर यज़ान अल-अरब के शरीर से लगकर गेंद अपने ही जाल में चली गई। यह आत्मघाती गोल 76वें मिनट में ऑस्ट्रिया को 2-1 से आगे कर गया। चोट के समय में अर्नाटोविच ने पेनल्टी पर ठंडे दिमाग से गोल कर स्कोर 3-1 कर दिया, जिससे यूरोपीय टीम की वापसी यादगार बन गई।
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से इस नतीजे को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। यूरोपीय मीडिया ऑस्ट्रिया के मानसिक दृढ़ता और राल्फ रांगनिक की रणनीति की सराहना कर रहा है, जिसमें अनुभवी अर्नाटोविच का सब्स्टीट्यूट के रूप में उतरकर खेल बदलना अहम रहा। एशियाई स्रोत, विशेषकर इंडोनेशियाई और भारतीय आउटलेट, जॉर्डन के साहसिक प्रदर्शन को रेखांकित कर रहे हैं—टीम ने पहले मिनट से ही आक्रामक रुख अपनाया और यूरोपीय रक्षापंक्ति को कड़ी चुनौती दी। लैटिन अमेरिकी प्रेस का ध्यान स्वाभाविक रूप से अर्जेंटीना पर है, जो लियोनेल मेसी की हैट्रिक की बदौलत अल्जीरिया को 3-0 से हराकर ग्रुप J में शीर्ष पर है। अब ऑस्ट्रिया भी तीन अंकों के साथ बराबरी पर है, लेकिन गोल अंतर में पीछे है।
दक्षिण एशियाई संदर्भ में देखें तो जॉर्डन का पदार्पण और पहला गोल एशियाई फुटबॉल के बढ़ते स्तर का संकेत है। हालांकि भारत अभी विश्व कप से दूर है, लेकिन जॉर्डन जैसी टीमों का संघर्ष यह दिखाता है कि एएफसी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार गहरी हो रही है। ऑस्ट्रिया के लिए यह जीत महज तीन अंक नहीं, बल्कि एक पीढ़ीगत बोझ उतारने जैसी है—अब टीम के सामने सोमवार को डलास में अर्जेंटीना से होने वाली भिड़ंत में ग्रुप की बढ़त हासिल करने की चुनौती है।
आगे का विश्लेषण साफ करता है कि ऑस्ट्रिया को अपनी रक्षापंक्ति की कमजोरियों पर काम करना होगा, क्योंकि जॉर्डन ने जिस तरह से मौके बनाए वह मेसी जैसे खिलाड़ियों के सामने भारी पड़ सकता है। वहीं जॉर्डन के लिए यह टूर्नामेंट अनुभव का खजाना लेकर आया है—पहले ही मैच में गोल करना और अंत तक लड़ना उन्हें अल्जीरिया के खिलाफ अगले मुकाबले में आत्मविश्वास देगा। ग्रुप J की तस्वीर अब रोमांचक मोड़ पर है, जहां अगला चरण दो पूर्व चैंपियन और एक भूखी यूरोपीय टीम के बीच सत्ता संघर्ष तय करेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ऑस्ट्रिया ने जॉर्डन को 3-1 से हराकर ग्रुप J में अर्जेंटीना के साथ शीर्ष स्थान साझा कर लिया, जहाँ मेस्सी की हैट्रिक से अल्जीरिया ध्वस्त हुआ। डलास में सोमवार को ऑस्ट्रिया-अर्जेंटीना मुकाबला ग्रुप की बढ़त तय करेगा।
ऑस्ट्रिया ने 28 साल बाद विश्व कप में वापसी करते हुए जॉर्डन पर 3-1 से जीत दर्ज की, और मिडफील्डर कोनराड लाइमर ने टीम की मजबूत मानसिकता की प्रशंसा की। इस जीत से वे ग्रुप J में अर्जेंटीना के साथ समान अंकों पर दूसरे स्थान पर हैं, लेकिन गोल अंतर में पीछे हैं।
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