
ट्रंप की धमकियों के बाद स्विट्जरलैंड वार्ता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विरोध, बातचीत अनिश्चित
ईरान ने हिजबुल्लाह पर नए हमले की अमेरिकी चेतावनी के विरोध में स्विट्जरलैंड में चल रही शांति वार्ता अस्थायी रूप से छोड़ दी, हालांकि राजनयिक सूत्रों का कहना है कि संवाद जारी है।
अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के ब्यूर्गनस्टॉक में रविवार से शुरू हुई शांति वार्ता एक दिन के भीतर ही गहरे संकट में घिर गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता के दौरान ही सोशल मीडिया पर धमकी दी कि यदि ईरान लेबनान में अपने ‘प्रतिनिधियों’ (हिजबुल्लाह) को ‘समस्या पैदा करने’ से नहीं रोकता तो अमेरिका ‘पिछले सप्ताह की तरह और भी कड़ा’ हमला करेगा। फॉक्स न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया तो ‘उनका देश नहीं बचेगा’ तथा अमेरिका उस पर नियंत्रण कर सकता है और वहाँ से गुज़रने वाले तेल का 20 प्रतिशत शुल्क वसूल सकता है। इसके तत्काल बाद ईरानी राज्य मीडिया ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने विरोध स्वरूप वार्ता स्थल छोड़ दिया, हालांकि बाद में एक अमेरिकी राजनयिक और मध्यस्थ देशों के सूत्रों ने दावा किया कि ईरानी प्रतिनिधि बातचीत में बने हुए हैं और संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।
अमेरिकी पक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में हुई इस वार्ता में शुरुआती दौर में लेबनान में युद्धविराम लागू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने पर केंद्रित रही। वेंस ने पत्रकारों से कहा कि ‘पिछले कुछ दिनों में लेबनान में युद्धविराम सुनिश्चित करने में बड़ी प्रगति हुई है’ और राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रतिनिधिमंडल को ईरानी जनता के साथ संबंधों में ‘नया अध्याय’ शुरू करने का निर्देश दिया है। वहीं ईरानी मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ ने ट्रंप की धमकियों को गंभीरता से न लेने की बात कहते हुए जवाब दिया कि ‘हमारी सशस्त्र सेनाएँ अलग ढंग से जवाब देने को तैयार हैं, चाहे वे कुछ भी कहें, कार्रवाई हम करते हैं।’ तेहरान का रुख़ स्पष्ट है कि जब तक लेबनान में इज़रायली हमले पूरी तरह नहीं रुकते और जमे हुए ईरानी परिसंपत्तियों को जारी करने और तेल निर्यात की छूट जैसे आर्थिक लाभ नहीं मिलते, तब तक परमाणु कार्यक्रम पर ठोस चर्चा संभव नहीं है।
एक सप्ताह पहले हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत 60 दिनों की बातचीत के लिए यह वार्ता हो रही है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना, सभी मोर्चों पर युद्धविराम, तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश के बदले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में ढील जैसे मुद्दे शामिल हैं। लेकिन शुक्रवार को लेबनान में नए युद्धविराम की घोषणा के बावजूद इज़रायल और हिजबुल्लाह के बीच झड़पें जारी रहीं, जिसके बाद ईरान ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से बंद करने की घोषणा कर दी। अमेरिकी अधिकारियों ने जलडमरूमध्य के पूरी तरह बंद होने से इनकार किया, लेकिन शिपिंग आँकड़ों के अनुसार वहाँ यातायात पर तत्काल प्रभाव पड़ा। वैश्विक तेल बाज़ार में हल्की तेज़ी देखी गई।
दक्षिण एशिया के लिए यह संकट विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि भारत सहित क्षेत्र के देश अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए होर्मुज मार्ग पर निर्भर हैं। लंबे समय तक जलडमरूमध्य बंद रहने से आपूर्ति श्रृंखला और कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान और क़तर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति की सार्वजनिक धमकियों और ईरान की सख़्त प्रतिक्रिया ने कूटनीतिक प्रक्रिया को कमज़ोर कर दिया है। अमेरिकी राजनयिक सूत्रों के अनुसार, रविवार रात तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रही और सोमवार को उच्च-स्तरीय चर्चा के बाद तकनीकी दल आगे काम करेंगे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान बिना पूर्व शर्त पूरी हुए कब तक मेज़ पर बना रहेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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The US president threatened new strikes despite the signed agreement calling for a halt to hostilities in Lebanon. Iranian media highlight the contradiction between Trump's words and the commitment made, framing the threat as an attempt to sabotage negotiations. Local press expresses indignation and skepticism toward US sincerity.
Trump issued an ultimatum to Tehran to stop its proxies in Lebanon, threatening stronger strikes. Israeli media emphasize American resolve to defend regional security and also report the warning regarding the Strait of Hormuz. Coverage highlights urgency and the need for a firm response against Iranian aggression.